7 महीने में 1850 वाहन चोरी, 16 करोड़ का नुकसान; देवास–सोनकच्छ गैंग सक्रिय, लसूड़िया–विजय नगर हॉटस्पॉट पुलिस के पास प्लान नहीं, एडी कमिश्नर ने दिए मॉनिटरिंग के निर्देश

शहर से बीते 7 महीने में 1822 दोपहिया और 31 चार पहिया वाहन चोरी हो चुके हैं। इनकी अनुमानित कीमत 16 करोड़ रुपए से ज्यादा है। इन वाहनों की चोरी की रिपोर्ट थानों में दर्ज है। प्रतिमाह शहर से 200 से 250 वाहन चोरी हो रहे हैं। उधर, पुलिस के पास चोरी रोकने का कोई एक्शन प्लान नहीं है।

7 महीने में सिर्फ 3 वाहन चोर गैंग पकड़ी गई है, इनसे केवल एक या दो दर्जन वाहन ही रिकवर हुए हैं। कई गैंग के तो सरगना भी हाथ नहीं लगे हैं। जनता इसलिए भी परेशान है कि थानों में रिपोर्ट दर्ज कराने में ही 15 से 20 दिन तक चक्कर काटना पड़ते हैं। कई थानों में तो एफआईआर दर्ज ही नहीं की जाती है।

सोनकच्छ, देवास और बाग टांडा के बदमाश सक्रिय वाहन चुराने के लिए देवास की धानी घाटी, सोनकच्छ व देवास के आसपास के बदमाश तो सक्रिय हैं ही, धार जिले में बाग-टांडा, राजस्थान और महाराष्ट्र के बदमाश चार पहिया वाहन चुराने आ रहे हैं। ये सभी युवा चोर हैं जो पुराने बदमाशों की तरह रैकी करने के बाद नई गाड़ियों के हर तरह के लॉक तोड़ने में माहिर हैं। ये चोर बुलेट, रेसिंग बाइक व ब्रांडेड बाइक के ताले चंद मिनट में तोड़ देते हैं।

रिकॉर्ड न बिगड़े, इसलिए एफआईआर टालते हैं भास्कर ने पड़ताल की तो पता चला कि चोरी की जितनी शिकायतें दर्ज हैं, उससे डेढ़ गुना ज्यादा वाहन चोरी हुए हैं। हर थाने की पुलिस अपना रिकॉर्ड मेंटेन रखने के लिए रिपोर्ट नहीं लिखती। ऊपर से ज्यादा प्रेशर आया तो ही रिपोर्ट दर्ज की जाती है। थानों में वाहन चोरी होने के 24 घंटे तक शिकायत दर्ज नहीं करते। एफआईआर के लिए 15 से 20 दिन तक टालमटोल की जाती है।

पुलिस सिर्फ फुटेज पर निर्भर रह जाती है शहर के चार जोन में नए आईपीएस डीसीपी हैं, लेकिन एक ने भी अपने जोन में चोरी रोकने के लिए कोई प्लान नहीं बनाया है। चोरों को पकड़ने के लिए पुलिस केवल कैमरों के फुटेज पर ही निर्भर है। थानों से बाहर निकलकर बदमाशों को पकड़ने का कोई प्रयास नहीं किया जाता। यदि किसी फुटेज में बदमाश की पहचान हो गई तो उस तक पहुंचने का प्रयास होता है। लसूड़िया, बाणगंगा, विजय नगर, एमआईजी, भंवरकुआं और संयोगितागंज थाने ऐसे हैं, जहां हर महीने 25 से 30 वाहन चोरी होते हैं।

एफआईआर में वाहन की कीमत नहीं लिखते एफआईआर के समय वाहन की कीमत नहीं लिखी जाती। कभी लिखी भी तो काफी कम, लेकिन जब कोई गिरोह पकड़ाता है तो ये ही वाहन लाखों की कीमत के बताए जाते हैं। एक दोपहिया वाहन की कीमत 90 हजार रुपए भी मानें तो शहर से चोरी हुए 1822 दोपहिया वाहनों की कीमत 16 करोड़ 39 लाख 80 हजार रुपए बैठती है। इनमें नई व लग्जरी बाइक और बुलेट की कीमत डेढ़ से दो लाख रुपए तक भी है।

बायपास, रिंग रोड से सटे क्षेत्र निशाने पर वाहन चोरी मामलों में पहले नंबर पर थाना लसूड़िया, दूसरा विजय नगर और तीसरे नंबर पर बाणगंगा है। हालांकि इन थानों का क्षेत्रफल बड़ा है। ये बायपास, रिंग रोड से सटे हैं। गाड़ी चुराने के बाद बायपास या नेशनल हाईवे पर चोर आसानी से भाग निकलते हैं। ये बात भी सामने आई कि बदमाश शहर के चेकिंग पॉइंट से भी वाकिफ हैं। बायपास, रिंग रोड से सटे क्षेत्र चोरों के निशाने पर हैं।

विशेष मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं

एडि. कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर अमित सिंह ने कहा कि, चारों जोन के डीपीएस को विशेष मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। जिन थाना क्षेत्रों में सर्वाधिक वाहन चोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहां बीट सिस्टम को मजबूत करने के साथ विशेष पेट्रोलिंग करेंगे।

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