भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय के अधीन आने वाली देश की सबसे विश्वसनीय ई नीलामी सेवा- एमएसटीसी (MSTC) के प्लेटफॉर्म पर एक बड़े और योजनाबद्ध फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जोधपुर की फर्म सूरज इंटरप्राइजेज ने आरोप लगाया है कि इंदौर की पेगासस इनलैंड कंटेनर डिपो प्राइवेट लिमिटेड ने उन्हें ऑनलाइन नीलामी में ‘स्टेनलेस स्टील स्क्रैप’ के नाम पर धातु का कचरा बेचकर लगभग 20 लाख रुपए की ठगी की है।
ऑनलाइन नीलामी में स्टेनलेस स्टील स्क्रैप के नाम पर धातु का कचरा बेचकर लगभग 20 लाख रुपए की ठगी की गई।
एमएसटीसी एक मिनी रत्न कंपनी है, जो ई-कॉमर्स का बड़ा प्लेटफॉर्म है। यह अब तक 4 लाख से ज्यादा नीलामी कर चुका है। एमएसटीसी का मानना है कि उनकी सेवाओं ने उद्योगपतियों के मन में भरोसा पैदा किया है, मगर इस मामले ने मिनी रत्न कंपनी की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठा दिए हैं। आखिर कैसे हुई ये धोखाधड़ी, जोधपुर की कंपनी ने शिकायत में क्या आरोप लगाए हैं

पूरा मामला समझिए यह कहानी अगस्त 2025 के आखिरी सप्ताह में शुरू हुई, जब एमएसटीसी के पोर्टल पर एक नीलामी की जानकारी अपलोड की गई।
1.पोर्टल पर दिखाया 26,800 किलो स्क्रैप इंदौर की फर्म ‘पेगासस इनलैंड कंटेनर डिपो प्राइवेट लिमिटेड’ ने एमएसटीसी पोर्टल पर जानकारी दी कि उसके पास 26,800 किलोग्राम स्टेनलेस स्टील स्क्रैप (ज्यूरिक ग्रेड) का माल नीलामी के लिए उपलब्ध है। पोर्टल पर विक्रेता के अधिकृत व्यक्ति के तौर पर अरुण कुमार का नाम और मोबाइल नंबर दिया गया था। हालांकि, माल की कोई भी तस्वीर पोर्टल पर अपलोड नहीं की गई थी, जो अपने आप में एक रेड फ्लैग था।
2.फोन पर दिया 100% शुद्धता का भरोसा जोधपुर स्थित सूरज इंटरप्राइजेज मेटल स्क्रैप का कारोबार करती है। इस कंपनी ने नीलामी में रुचि दिखाई। माल की फोटो न होने पर उन्होंने पोर्टल पर दिए गए नंबर पर संपर्क किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को कंपनी का मैनेजर अरुण कुमार बताया। शिकायत के अनुसार, अरुण कुमार ने फोन पर माल को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे।
बातचीत को और विश्वसनीय बनाने के लिए अरुण कुमार ने फर्म की बात कंपनी के डायरेक्टर हरीश शर्मा से भी करवाई। हरीश शर्मा ने यह दावा कर भरोसे को और पुख्ता कर दिया कि पूरा माल एक सरकारी एजेंसी से प्रमाणित है और उनके पास इसका सर्टिफिकेट भी मौजूद है।

3.भरोसा करके जीती बोली और चुकाए 20 लाख इन मौखिक आश्वासनों और एमएसटीसी जैसे प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म पर भरोसा करते हुए सूरज इंटरप्राइजेज ने 5 सितंबर 2025 को हुई नीलामी में बोली लगाई और जीत हासिल की। इसके बाद फर्म ने पूरी रकम का भुगतान कर दिया। भुगतान के बाद 22 अक्टूबर को डिलीवरी ऑर्डर जारी कर दिया गया।

4.डिलीवरी पर खुलासा, जब ‘स्टील’ की जगह निकला कचरा 3 नवंबर 2025 को सूरज इंटरप्राइजेज के प्रतिनिधि मोहम्मद शाहिद, अपने साथियों महेश वैद्य और नवीन तापड़िया के साथ इंदौर के पास पीथमपुर स्थित पेगासस के गोडाउन पर डिलीवरी लेने पहुंचे। वहां मार्गदर्शन के लिए मैनेजर अरुण कुमार और डायरेक्टर हरीश शर्मा भी मौजूद थे।
जब कंटेनर खोला गया तो जोधपुर की टीम के पैरों तले जमीन खिसक गई। शिकायत के मुताबिक कंटेनर से जो नमूना निकाला गया, उसमें स्टेनलेस स्टील की कोई क्वालिटी नहीं थी। जब उस पर चुंबक लगाया गया तो वह चिपक गया, यानी वह लोहा मिश्रित कचरा था।

1% भी स्टेनलेस स्टील नहीं मिला जोधपुर की कंपनी के मुताबिक माल में ‘ज्यूरिक ग्रेड’ का एक भी लक्षण नहीं था, जो एक उच्च गुणवत्ता वाला स्क्रैप माना जाता है। पूरा कंटेनर खाली करके देखा गया, लेकिन उसमें 1% भी स्टेनलेस स्टील नहीं मिला। यह देखते ही जोधपुर की फर्म ने मौके पर ही आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि उन्हें वही माल चाहिए, जिसका वादा किया गया था। यह तो सिर्फ कचरा है।
इस पर इंदौर की फर्म का रवैया पूरी तरह बदल गया। उन्होंने नीलामी के एक नियम “As Is Where Is Basis” (जैसा है, जहां है के आधार पर) का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया और कहा, “आप हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते।”

आरोपी का गोलमोल जवाब- हम सिर्फ कस्टोडियन जब हमारी टीम ने इस मामले पर इंदौर की फर्म से बात की, तो मैनेजर और डायरेक्टर दोनों ने जिम्मेदारी एक-दूसरे और कस्टम विभाग पर डाल दी। मैनेजर अरुण कुमार ने कहा- नीलामी हुई है, माल बिका है। यह हमारा कंटेनर नहीं, कस्टम का रहता है। सील भी वही काटते हैं। नीलामी का नियम है कि जो जैसा दिख रहा है, वैसा ही बिकेगा। बोली लगाने वालों को इंस्पेक्शन के लिए 15-20 दिन का समय दिया जाता है। माल कचरा है या जो भी है, कंडीशन यही है। अब हमारा कोई रोल नहीं है।
वहीं डायरेक्टर हरीश शर्मा ने कहा,
यह माल इम्पोर्ट का है, जो कस्टम के पास आता है। हम तो सिर्फ कस्टोडियन (रखवाले) हैं। माल का मूल्यांकन और रिजर्व प्राइस कस्टम से अप्रूव मूल्यांकनकर्ता ही तय करता है। नियमों में साफ लिखा है कि बोली लगाने से पहले इंस्पेक्शन जरूरी है। अब यह मामला एमएसटीसी और जोधपुर की फर्म के बीच का है। हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं।
जोधपुर फर्म का पलटवार- माल बदला गया है इंदौर की फर्म के दावों के विपरीत सूरज इंटरप्राइजेज के नवीन तापड़िया का कहना है- हमने कस्टम अधिकारियों से बात की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह माल कस्टम का नहीं, बल्कि कंटेनर डिपो का निजी माल है। इंदौर की फर्म ने माल बदला है। उन्होंने हमें यह भी नहीं बताया कि यह माल किस देश से आया है। यह पूरी तरह से योजना बनाकर की गई ठगी है।