भोपाल में 26 टन गोमांस मिलने के बाद कत्लखाने के संचालक असलम कुरैशी का नाम चर्चा में है। 26 टन मांस मिलने का मतलब ये है कि इसके लिए करीब 260 गायों की हत्या की गई है। आरोप हैं कि भोपाल के जहांगीराबाद में संचालित सरकारी स्लॉटर हाउस में गायों को काटा गया है। इसके बाद ये मांस बाहर भेजा जा रहा था।
शुरूआती तौर पर इस पूरे एपिसोड का मास्टरमाइंड असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा को माना जा रहा है। पुलिस ने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे जेल भी भेज दिया है।
दो दशक पहले तक जानवरों की खाल बेचने वाले असलम ने इतना बड़ा साम्राज्य कैसे खड़ा कर लिया? उसे किसकी शह पर सरकारी कांट्रेक्ट मिलते रहे? और 20 साल के लिए स्लॉटर हाउस का संचालन कैसे मिल गया

शहर में 35 से ज्यादा प्रॉपर्टी, लग्जरी लाइफस्टाइल कई ठेके हासिल करने से लेकर प्राइम प्रॉपर्टीज पर नजर रखने वाले चमड़ा की शहर में 35 से ज्यादा प्रॉपर्टी बताई जा रही हैं। इनमें से कई तो बड़े बंगले हैं। बताया जाता है कि चमड़ा के तार सट्टेबाजी से भी जुड़े हैं। उसे जानने वाले कहते हैं कि असलम की रईस मिजाजी का हाल यह है कि वह जुआ खेलने के लिए मुंबई और दुबई तक जाता रहा है। उसके पास कई महंगी गाड़ियां हैं।

अफसरों से नजदीकी बनाकर मांस सप्लाई का ठेका लिया असलम के परिवार को करीब से जानने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शमशुल हसन बल्ली बताते हैं कि ये परिवार पुश्तैनी रूप से जानवरों का चमड़ा उतारने और बेचने का काम करता था। असलम के दादा हाफिज कुरैशी परिवार को लेकर कानपुर से मध्यप्रदेश आए। दूसरी पीढ़ी में पिता शफीक ने इस काम को आगे बढ़ाया।
90 के दशक के आखिर में परिवार का काम असलम के हाथ में आया तो उसने नया रास्ता अपनाया। असलम ने अधिकारियों से सांठ-गांठ कर वन विहार में वन्य प्राणियों के लिए मांस सप्लाई का ठेका हासिल कर लिया। उसके कर्मचारी शहर से मरे हुए जानवर तो पहले से उठाते ही थे, धीरे-धीरे असलम काम को बढ़ाता गया। जानवरों के अवशेष से भी वह पोल्ट्री फीड बनाने का काम करने लगा।

मरी हुई गायों का मांस बेचने का भी आरोप शमशुल हसन बल्ली बताते हैं की जहांगीराबाद में जिंसी के पास नीम वाली सड़क पर चमड़ा का मकान था, वहीं असलम ने जेल बाग रोड पर बड़ी जमीन हासिल की। इस जमीन पर मृत पशुओं को रखा जाने लगा, यहीं से कुछ दूरी पर उसने सड़क किनारे बड़ा बंगला बनवाया।
अपने रसूख का इस्तेमाल कर असलम ने विवादित संपत्तियों को लेना शुरू किया। जेल बाग रोड पर ही एक के बाद एक कई मकान खड़े किए तो मदरसे के पास भी खाली जमीन हासिल कर ली।
बल्ली आरोप लगाते हैं कि उसके पास शहर से बेसहारा मवेशियों के शव उठाने का भी ठेका है। इनमें अधिकतर गायें होती हैं। ऐसे में कोई आश्चर्य नहीं कि मरे हुए मवेशियों का वैज्ञानिक ढंग से निपटारा करने की बजाय उनका भी मांस बेच दिया जा रहा हो।

ट्रेन से भी भेजा जाता था मांस, सर्टिफिकेट भैंस के मांस का लगाते असलम के कारनामों पर आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता राजेश तिवारी बताते हैं- मैने पिछले साल 3 बार असलम चमड़ा की शिकायत की, लेकिन निगम ने कार्रवाई नहीं की। मैंने उसके खिलाफ सोशल मीडिया पर भी लिखा।
11 अक्टूबर 2025 को मैंने इसके खिलाफ नगर निगम कमिश्नर को शिकायत की थी। इसमें कहा था कि नगर निगम के स्लॉटर हाउस में गायें काटी जा रही हैं, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। यदि उसी समय प्रशासन ने मेरी शिकायत सुनी होती तो सैकड़ों गायें बच जातीं।
तिवारी ने ये भी आरोप लगाया कि पहले गाय का मांस ट्रेन से भेजा जाता था। मैंने रेलवे के पार्सल ऑफिस में बात की तो जवाब मिला कि ये लोग सर्टिफिकेट लाकर देते हैं। तिवारी ने कहा कि असलम के भोपाल में 35 मकान हैं। उसने ये मकान कैसे खरीदे, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

असलम का राइट हैंड शिब्बू संभालता था सारा काम ने असलम के अवैध मांस के कारोबार की पड़ताल की तो पता चला कि उसका मांस का पूरा कारोबार शिब्बू संभालता था, लेकिन 26 टन गोमांस मामले में पुलिस ने केवल असलम को आरोपी बनाया है।
पूरे मामले को सामने लाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले चंद्रशेखर तिवारी बताते हैं, असलम का सारा काम शिब्बू संभालता है। मांस ट्रेन से भेजे जाते समय शिब्बू और उसके लड़के ही मांस के बॉक्स बुक करते थे।

पुलिस की जांच पर भी सवाल
- क्या 26 टन गोमांस के लिए गायें अकेले असलम लाया और उसी ने काटने को अंजाम दिया?
- जब अकेला व्यक्ति ऐसा नहीं कर सकता तो केवल असलम को आरोपी क्यों बनाया गया?
- गिरफ्तारी के बाद असलम को रिमांड पर लेकर उसके साथियों और प्रश्रय देने वालों के बारे में पूछताछ क्यों नहीं की गई?
3 साल पहले भी उठे थे सवाल, विधायक बोले- एनएसए लगेगा करीब तीन साल पहले भी भोपाल में बड़ी संख्या में गायों की मौत का मामला सुर्खियों में रहा था। भोपाल से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित जीवदया गोशाला के पास मृत गोवंश फेंके गए थे। इससे यहां ‘कब्रगाह’ जैसी तस्वीर सामने आई थी। गोशाला के भी कई पशु मृत हुए थे।
जांच में सामने आया था कि नगर निगम के ठेकेदार ने गोशाला से 1 किलोमीटर दूर ही मृत गोवंश के शव फेंके थे। गोशाला के शव भी यही फेंके जाने लगे। इससे शव-कंकाल का ढेर लग गया और तस्वीर किसी कब्रगाह जैसी ही नजर आई। ठेकेदार असलम कुरैशी ही था।
कुरैशी के पास करीब 30 साल से शहर से मृत पशुओं के शव उठाने का जिम्मा है। पशुओं का जो चमड़ा और हड्डी निकलती है, उसे फैक्ट्री में भेजा जाता है। इसी ठेकेदार को निगम ने स्लॉटर हाउस का जिम्मा दिया। बाकायदा एमआईसी से मंजूरी भी दी गई।
इस मामले में हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा का भी बयान आया है। उन्होंने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है। बजरंग दल ने प्रदर्शन कर ट्रक को रोका था। मांस के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। इसमें गोमांस की पुष्टि हुई है। गो तस्करी, गो हत्या का मामला दर्ज किया जाएगा। NSA की कार्रवाई भी की जाएगी। जो भी अधिकारी इसमें शामिल होगा उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करेंगे।