
कोरोनावायरस ने दुनिया में मौजूद आय में असमानता को भयंकर तरीके से और बढ़ा दिया है, जिससे कि इसका असर शिक्षा, स्वास्थ्य और एक बेहतर जीवन जीने के अधिकारों पर और गहरा होगा. यूएनडीपी और डेनवर विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के मुताबिक कोविड-19 महामारी के गंभीर दीर्घकालिक परिणामों के चलते वर्ष 2030 तक 20 करोड़ 70 लाख और लोग घोर गरीबी की ओर जा सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो दुनिया भर में बेहद गरीब लोगों की संख्या एक अरब के पार हो जाएगी। लेकिन दूसरी ओर दुनिया को 10 टॉप अमीरों ने कोरोना काल में दोनों हाथों से पैसा बनाया है। इस दौरान इन्होंने इतनी दौलत कमाई कि इससे दुनिया की गरीबी खत्म हो सकती है।
नॉन-प्रॉफिट ग्रुप Oxfam की एक रिपोर्ट के मुताबिक 18 मार्च से 31 दिसंबर 31, 2020 के दौरान दुनिया के 10 शीर्ष अरबपतियों की संपत्ति में 540 बिलियन डॉलर का इज़ाफा हुआ। ऐसा अनुमान है कि इस दौरान कम से कम 20 करोड़ से 50 करोड़ लोग गरीब हो गए हैं। दुनिया के अमीर लोगों और दुनिया भर में गरीबी में जीने और गरीबी में ही मर जाने वाले लोगों के बीच की खाई खतरनाक तरीके से गहरा गई है। Oxfam की यह रिपोर्ट स्विट्जरलैंड में हो रहे दावोस समिट में पेश की जाएगी।
कितनी बढ़ी अरबपतियों की दौलत
‘The Inequality Virus’ रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर में 18 मार्च से 31 दिसंबर 2020 तक अरबपतियों की दौलत में 3.9 ट्रिलियन डॉलर का इजाफा हुआ। इस अवधि में दुनिया के टॉप 10 रईसों की संपत्ति में 540 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है। वहीं, इस दौरान महामारी के चलते करोड़ों लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ा है। बहुत से लोग भुखमरी के कगार पर आ गए।
रिपोर्ट ने कहा है कि इस महामारी ने इस फैक्ट को उजागर कर दिया है कि दुनिया में जो लोग 2 डॉलर से 10 डॉलर की प्रतिदिन आय पर निर्भर रहते हैं, वे गरीबी के कगार पर हैं। यानी उन्हें एक दिन भी दिहाड़ी न मिले तो वो गरीबी को कुचक्र में फंस जाएंगे। Oxfam ने कहा कि कोरोना संकट के कारण जब उड़ानें बंद थीं तो अरबपति अपने लिए प्राइवेट जेट्स खरीद रहे थे।
मिट सकती है दुनिया की गरीबी
रिपोर्ट के मुताबिक कोरोनावायरस के शुरू होने के बाद से ही दुनिया के 10 सबसे अरबपतियों ने जितनी संपत्ति बनाई है, उससे दुनिया में हर किसी को गरीबी के चंगुल से बचाया जा सकता है और सबको एक कोविड-19 वैक्सीन फ्री में दी जा सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोनावायरस ने दिखा दिया है कि दुनिया में मानवता के पास गरीबी से निकलने का कोई स्थायी समाधान नहीं है। वहीं अरबपतियों को ऐसे संकट में और दौलत बनाने का कोई नैतिक और आर्थिक तुक नहीं बनता है। उनकी दौलत का लाखों लोगों की जिंदगी और अरबों रोजगार बचाने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।