
भाजपा के गठन के बाद सक्रिय हुई पहली पीढ़ी के अच्छे दिन अब चले गए हैं…
उपचुनाव की घोषणा के बाद दतिया में जहां नरोत्तम मिश्रा चुनाव की तैयारियों में जुटे थे, तब भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व नरोत्तम का विकल्प तलाशने में व्यस्त था। नरोत्तम मिश्रा जब समाज के एक-एक व्यक्ति को मनाने और पुराने समय में हुई किसी भी गलती के लिए खुले मन से माफी मांगकर जीत की पूरी रणनीति बना रहे थे, तब भाजपा नेतृत्व सर्वे के जरिए यह तलाश रहा था कि नरोत्तम से उत्तम प्रत्याशी कौन रहेगा। और जब 10 जुलाई 2026 को डॉ. नरोत्तम मिश्रा अन्य दलों के नेताओं को भाजपा की सदस्यता दिलाने में व्यस्त थे, तब भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व उस अधिकृत आदेश पर मुहर लगा रहा था, जिसमें नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को दतिया उपचुनाव के लिए चेहरा बनाया गया है। निश्चित तौर से पार्टी प्रत्याशी की जीत-हार को लेकर अब भी कोई दावा नहीं किया जा सकता है, लेकिन डॉ. नरोत्तम मिश्रा के गले में राजनैतिक कैरियर को खत्म करने की माला भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के इस निर्णय ने खुद-ब-खुद डाल दी है। और इसके साथ ही, यह भी तय हो गया है कि अब 21 वीं सदी के तीसरे दशक के आते-आते 1980 में भाजपा गठन के बाद सक्रिय हुई संघर्ष करने वालों की पहली पीढ़ी के नेताओं के अच्छे दिन पूरी तरह से खत्म हो गए हैं।
और जैसा होना था वह हो भी रहा है। दतिया में प्रवेश के सारे प्रमुख रास्तों पर नरोत्तम मिश्रा के समर्थक पहुंचे। नरोत्तम मिश्रा को टिकट मिलने पर जिन समर्थकों को ढोल नगाड़ों की थाप पर खुशी का इजहार करना था, अब वह समर्थक आक्रोश जताने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। नरोत्तम का टिकट कटने के बाद भाजपा जिला कार्यालय के सामने हजारों भाजपा कार्यकर्ताओं ने हाइवे जाम किया। नाराजगी का मंजर चारों तरफ दिखा। झांसी हाईवे को समर्थकों ने जाम कर दिया और 2 किमी तक वाहनों की कतारें लग गईं। 11 जुलाई 2026 को दतिया बंद की चेतावनी जारी की गई है। टिकट बदलने की मांग की जा रही है। वहीं दतिया उपचुनाव में घोषित किए गए भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने पार्टी नेतृत्व का आभार जताया है। आशुतोष तिवारी ने कहा कि पार्टी ने मुझ पर भरोसा जताया है। उन्होंने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को अपना अभिभावक बताया। आशुतोष तिवारी भाजपा संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं। वे मध्य प्रदेश भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री रह चुके हैं और मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। भाजपा ने संगठनात्मक अनुभव और लंबे राजनीतिक कार्यकाल को देखते हुए आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है।
बता दें कि यह हाई-प्रोफाइल सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता रद्द होने की वजह से खाली हुई है। साल 2023 के आम चुनाव में राजेंद्र भारती ने बड़ा उलटफेर करते हुए तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को शिकस्त दी थी लेकिन, कोऑपरेटिव बैंक धोखाधड़ी से जुड़े एक बेहद पुराने आपराधिक मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली की एक अदालत ने राजेंद्र भारती को 3 साल की कैद की सजा सुना दी। सुप्रीम कोर्ट के कड़े नियमों के मुताबिक, सजा का ऐलान होते ही विधानसभा सचिवालय ने तुरंत राजेंद्र भारती की विधायकी रद्द कर दी, जिसके चलते दतिया में उपचुनाव की नौबत आई।
अगर दतिया के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें, तो पिछले डेढ़ दशक से यहां डॉ. नरोत्तम मिश्रा का एकछत्र दबदबा रहा है। उन्होंने लगातार 3 बार यहां कमल खिलाकर दतिया को बीजेपी का अभेद्य किला बना दिया था। ऐसे में यह उपचुनाव जहां बीजेपी के लिए अपने इस पुराने और खोए हुए गढ़ को वापस छीनने और पुरानी बादशाहत की वापसी की लड़ाई है, वहीं कांग्रेस के सामने अपनी इस हालिया जीत को नए चेहरे के खिलाफ भी बरकरार रखने की बहुत बड़ी चुनौती होगी।
आगामी 30 जुलाई को जनता अपना फैसला ईवीएम में बंद करेगी और 3 अगस्त को जब पेटियां खुलेंगी, तभी साफ हो पाएगा कि दतिया के इस त्रिकोणीय दंगल का असली विजेता कौन बनता है? विजेता कोई भी बने, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने
का मतलब क्या यह माना जाए कि यह संगठन का सोचा समझा फैसला है या फिर संघ के जरिए आशुतोष ने डॉ. नरोत्तम को अभिभावक बनकर उन्हें आशीर्वाद
देने की भूमिका थमा दी। इसके अलावा, क्या इस फैसले में नरोत्तम की जीत का भय भाजपा की सत्ता भी महसूस कर रही थी? जो भी हो फिलहाल यही कहा जा सकता है कि
सरकार में शामिल भारतीय जनता पार्टी की पहली पीढ़ी के सदस्यों का हाल भी बहुत अच्छा नहीं है तो नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर भी भाजपा ने यही संदेश दिया है कि भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के बाद संघर्ष कर अपना स्थान बनाने वाले पहली पीढ़ी के नेताओं के अच्छे दिन अब पूरी तरह खत्म होने को हैं…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं