शिकायत और समाधान का यह उज्जैन मॉडल अच्छा है… कौशल किशोर चतुर्वेदी

शिकायत और समाधान का यह उज्जैन मॉडल अच्छा है…
सामान्य तौर पर, अब यह ट्रेंड सेट हो गया है कि विपक्षी दल की आवाज़
सरकार सुनती नहीं है। और अगर सरकार ज्ञापन वगैरह ले भी ले, तब यह तय माना जाता है कि सरकार ने औपचारिकतावश विपक्षी दल से ज्ञापन लेकर मामले की इतिश्री कर दी है। और विपक्षी दल को भी सरकार से इससे ज्यादा कोई उम्मीद नहीं रहती है। लेकिन जिला स्तर पर उज्जैन से शराब के गुजरात पहुंचने और लोगों की मौत के मामले में गंभीर उज्जैन जिला कांग्रेस द्वारा धरना देने और जिम्मेदारों द्वारा पांच दिन में जाँच रिपोर्ट संबंधितों को उपलब्ध कराने का आश्वासन देकर धरना समाप्त करवाने का मामला वास्तव में उत्कृष्ट माना जा सकता है। विपक्षी दलों को संतुष्ट करने की यह
परम्परा पूरे मध्य प्रदेश में अनुकरण के योग्य है।
जहरीली शराब कांड पर उज्जैन में कांग्रेस का हल्लाबोल के तहत आबकारी कार्यालय का दो घंटे घेराव किया गया। गुजरात में 09 मौतों और दर्जनों लोगों के बीमार होने के बाद उज्जैन कांग्रेस ने तीखे सवाल उठाए। विधायक और जिला अध्यक्ष महेश परमार ने पूछा कि “उज्जैन से शराब गुजरात कैसे पहुंची?” 28 पेटियों की कथित खेप पर पूछा, उत्पादन से बिक्री तक ट्रैकिंग के बावजूद तस्करी कैसे हुई? मामले की गंभीरता को देखते हुए आबकारी अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया और कांग्रेस को रिपोर्ट की प्रति पाँच दिवस में उपलब्ध करवाने की बात कही। और इसके साथ ही मामले का पटाक्षेप हो गया। दरअसल गुजरात के भावनगर में कथित जहरीली शराब के सेवन से हुई मौतों के मामले ने मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया। गुजरात पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि शराब की 28 पेटियों की खेप मध्य प्रदेश के उज्जैन से भावनगर पहुंची थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस घटना में अब तक 09 लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग अस्पताल में भर्ती हैं। इसी मामले को लेकर कांग्रेस विधायक महेश परमार और शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने 20 अगस्त 2026 को जिला आबकारी कार्यालय का घेराव किया और करीब दो घंटे तक धरना दिया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने तख्तियां लेकर नारेबाजी की और ‘रघुपति राघव राजा राम’ की धुन गाते हुए शराब तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस पर आबकारी अधिकारियों द्वारा कांग्रेस द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच कराने और जांच रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध करवाने के आश्वासन के बाद धरना समाप्त हुआ।
मूल खबर इतनी ही है। धरने को संबोधित करते हुए विधायक महेश परमार ने कहा कि “उज्जैन से गुजरात, 28 पेटियां, 9 मौतें और दर्जनों लोग गंभीर हैं। मुख्यमंत्री जी, आपके गृह नगर से शराब गुजरात कैसे पहुंची? नौ मौतों पर मौन नहीं, जवाब चाहिए।” परमार ने कहा कि सवाल सिर्फ गुजरात में हुई मौतों का नहीं है, बल्कि उस पूरे तंत्र का है जिसके जरिए शराब उत्पादन से लेकर उसकी बिक्री तक निगरानी और ट्रैकिंग का दावा किया जाता है। यदि गुजरात पुलिस की प्रारंभिक जांच में उज्जैन से खेप पहुंचने की बात सामने आई है, तो मध्य प्रदेश के पुलिस और आबकारी विभाग को बताना होगा कि यह खेप उज्जैन में कहां से आई, किसने भेजी, किस वाहन से रवाना हुई, रास्ते में किन स्थानों से गुजरी और गुजरात में इसे किस नेटवर्क ने हासिल किया। तराना विधायक ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में पनीर, दूध, मावा, दवाइयां, पानी और अब शराब तक की गुणवत्ता और शुद्धता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय शुरू किए गए ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ अभियान का संदर्भ देते हुए सरकार से पूछा जाना चाहिए कि आज नकली और मिलावटी सामग्री के खिलाफ उसी स्तर की कार्रवाई क्यों दिखाई नहीं देती। परमार ने कहा कि महाकाल की नगरी की पहचान धार्मिक आस्था और पवित्रता से है। ऐसे में यदि इसी शहर से कथित तौर पर नकली शराब की खेप दूसरे राज्य तक पहुंच रही है तो यह केवल कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि उज्जैन की साख से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।

मध्य प्रदेश सरकार ने अप्रैल 2025 से उज्जैन सहित 19 धार्मिक शहरों में शराबबंदी लागू की थी। उज्जैन इस सूची में शामिल था। कांग्रेस ने इसी पृष्ठभूमि में सवाल उठाया कि जिस शहर को धार्मिक नगरी और शराबबंदी वाले क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया, वहां से गुजरात तक शराब की कथित खेप कैसे पहुंच गई? कांग्रेस नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि यदि शराब की आपूर्ति और बिक्री पर आबकारी विभाग की निगरानी है तो 28 पेटियों की कथित खेप विभाग की नजर से कैसे निकल गई। कांग्रेस ने जांच में विशेष रूप से सप्लाई चेन, वाहन, परमिट/दस्तावेज, स्रोत, रिसीवर, भुगतान और स्थानीय नेटवर्क की पड़ताल करने की मांग की है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी ने प्रदेश भाजपा सरकार से यह भी पूछा कि क्या उज्जैन में अवैध रूप से शराब की बिक्री के ऐसे ठिकाने मौजूद हैं, जिन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि शहर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री के कथित ठिकानों की तत्काल जांच करवाई जाए।

कांग्रेस ने साथ ही मालवा-निमाड़ की कुछ डिस्टलरियों से कथित अवैध सप्लाई, गुजरात में शराब पहुंचाने के लिए सीमावर्ती जिलों में ऊंचे मूल्य पर लिए जाने वाले शराब ठेकों और धार-अलीराजपुर जैसे क्षेत्रों की बिक्री एवं आपूर्ति के पैटर्न की भी जांच की मांग उठाई। इन आरोपों की स्वतंत्र सरकारी जांच से पुष्टि होना अभी बाकी है।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि अंतरराज्यीय स्तर पर शराब की तस्करी केवल स्थानीय स्तर के कुछ लोगों के बूते संभव नहीं हो सकती। इसलिए जांच केवल शराब की पेटियां जब्त करने या कुछ लोगों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे नेटवर्क तक पहुंचनी चाहिए। कांग्रेस ने पूछा कि गुजरात पहुंची कथित खेप का उज्जैन कनेक्शन किस स्तर तक है और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। पार्टी ने यह भी मांग की कि जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि कथित शराब उज्जैन में कहां से निकली और क्या स्थानीय स्तर पर किसी सरकारी तंत्र की लापरवाही या मिलीभगत रही।
उज्जैन में पहले भी जहरीली शराब के गंभीर मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2020 के जहरीली शराब प्रकरण में पुलिसकर्मियों की कथित संलिप्तता सामने आने के बाद एसआईटी जांच और अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी। इस पुराने संदर्भ ने मौजूदा मामले में कांग्रेस के सवालों को और धार दे दी है।

तो करीब दो घंटे तक चले प्रदर्शन में शराब तस्करी और अवैध शराब के खिलाफ नारेबाजी के साथ कार्यकर्ताओं ने ‘रघुपति राघव राजा राम’ की धुन गाकर भी विरोध दर्ज कराया। धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने शहर और आसपास अवैध शराब बिक्री के कथित ठिकानों की जानकारी भी आबकारी अधिकारियों को दी। आबकारी विभाग के प्रभारी अधिकारियों ने कांग्रेस द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं की जांच कराने तथा जांच के बाद रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद कांग्रेस ने धरना समाप्त किया।
वास्तव में समय सीमा में जाँच रिपोर्ट कांग्रेस को उपलब्ध करवाने की आबकारी विभाग की पहल ने यह साफ कर दिया कि विपक्ष की चिंता का वह सम्मान करते हैं। और विपक्ष के सरोकार से उनका भी सरोकार है। शायद इसी के चलते कांग्रेस भी संतुष्ट होकर धरना समाप्त करने को राजी हुई। और वास्तव में, सभी मामलों में ऐसा ही होना चाहिए। इसीलिए
शिकायत और समाधान का यह उज्जैन मॉडल सराहनीय है… इसे जवाबदारी और गंभीरता के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।

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