मध्यप्रदेश सरकार के नए “महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास नियम-2026” लागू होने के बाद भोपाल और इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों में विकास योजनाओं को मंजूरी देने की व्यवस्था बदल गई है।

अब इन क्षेत्रों के विकास प्राधिकरण खुद मास्टर प्लान बना सकेंगे, उसमें बदलाव कर सकेंगे और नई योजनाएं लागू कर सकेंगे। इसके लिए हर बार मंत्रालय (वल्लभ भवन) से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। सरकार ने उन्हें नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 49 से 60 तक की शक्तियां दे दी हैं।
इन्हीं अधिकारों के आधार पर इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) पहले ही करीब एक दर्जन टाउन प्लानिंग स्कीम (टीपीएस) लागू कर चुका है। अब यही व्यवस्था भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में भी लागू होगी। इससे भोपाल, सीहोर और रायसेन के साथ इंदौर, उज्जैन, धार, देवास और शाजापुर के चिन्हित क्षेत्रों में टाउनशिप, सड़क, औद्योगिक क्षेत्र और अन्य बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट तेजी से मंजूर और विकसित हो सकेंगे।
विकास के लिए मंत्रालय की मंजूरी जरूरी नहीं
1. 40 हेक्टेयर से कम जमीन का लैंड यूज नहीं बदलेगानिजी डेवलपर तभी मास्टर प्लान में बदलाव या लैंड यूज बदलवा सकेंगे, जब उनके पास एकमुश्त कम से कम 40 हेक्टेयर (करीब 100 एकड़) जमीन होगी।आवेदन के साथ 25 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर फीस देनी होगी। मंजूरी मिलने पर संबंधित भूमि की कलेक्टर गाइडलाइन दर का 15% शुल्क भी जमा करना होगा।लैंड यूज बदलने से पहले संबंधित क्षेत्र के अखबारों में सूचना प्रकाशित कर आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे।महानगर प्राधिकरण को टाउन प्लानिंग स्कीम (टीपीएस) लागू करने की पूरी शक्ति मिलेगी। इंदौर में आईडीए इसी व्यवस्था के तहत करीब एक दर्जन टीपीएस पर काम कर रहा है।
2. पूरे महानगर की ट्रैफिक व्यवस्था एक एजेंसी संभालेगी
भोपाल और इंदौर-उज्जैन क्षेत्र के लिए यूनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (यूएमटीए) बनाई जाएगी। इसमें मुख्य सचिव, महानगर आयुक्त, एनएचएआई, रेलवे, पुलिस, विमानन व प्रदूषण विभाग मिलकर पूरे क्षेत्र की ट्रैफिक योजना तैयार करेंगे।
3. हितों का टकराव मिला तो सदस्य हटाए जाएंगे
किसी सदस्य का योजनाओं में निजी आर्थिक हित मिलने पर राज्य सरकार उसे पद से हटा सकेगी।बैठकों में किसी प्रतिनिधि को भेजने की अनुमति नहीं होगी।सभी पीपीपी परियोजनाओं में निजी भागीदारों का चयन पारदर्शी ऑनलाइन टेंडर के जरिए होगा।
कैसे बंटेगा काम… 45 सदस्यीय समिति करेगी महानगरों के विकास पर फैसला
- सीएम अध्यक्ष: मास्टर प्लान, विकास योजनाओं व बड़े नीतिगत फैसलों पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली 45 सदस्यीय समिति लेगी।
- 3 मंत्री उपाध्यक्ष: नगरीय विकास, पंचायत और राजस्व मंत्री उपाध्यक्ष।
- अफसरों की बड़ी टीम: मुख्य सचिव, नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव, 10 विभागों के प्रमुख सचिव, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के कमिश्नर, भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग के कमिश्नर तथा भोपाल, इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, सीहोर और रायसेन के कलेक्टर सदस्य होंगे।
- मेट्रो और टीएंडसीपी भी शामिल: मप्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक और अन्य संबंधित अधिकारी भी समिति का हिस्सा रहेंगे।
- महानगर आयुक्त सबसे अहम: महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण के आयुक्त के पास टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डायरेक्टर जैसी शक्तियां होंगी। वे योजनाओं के क्रियान्वयन और मंजूरी की प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभाएंगे।