चंदेरी में किला कोठी का कमरा… सामने खुद को बड़ा सरकारी अधिकारी बताने वाली एक महिला… बातचीत में सरकारी नौकरी और अच्छी सैलरी का भरोसा… और फिर हर उम्मीदवार से लाखों रुपए की मांग।
अशोकनगर के चंदेरी में महंगी कार, लग्जरी होटल और आईफोन से दिखाती थी रुतबा।
यह कोई और नहीं, भोपाल की रहने वाली तृप्ति सिंह राजपूत है, जिस पर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर चंदेरी के 4 युवकों से 9 लाख 80 हजार रुपए की ठगी का आरोप है। पुलिस जांच में मामला सिर्फ ठगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि फर्जी सरकारी पहचान और रुतबा दिखाने का पूरा तंत्र सामने आया है।
पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी तृप्ति सिंह राजपूत खुद को कभी आईएएस अधिकारी, कभी मध्यप्रदेश टूरिज्म विभाग की एडिशनल डायरेक्टर और कभी मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD) का हेड बताती थी।प्रभाव जमाने के लिए वह फर्जी आईडी कार्ड, लेटरहेड और सरकारी कार्यालयों की तस्वीरों का इस्तेमाल करती थी। किराए की इनोवा पर भारत सरकार की नेम प्लेट लगाकर घूमती थी। उसके पास से सीबीआई अधिकारी का एक कथित फर्जी कार्ड भी मिला है।

एक साल पहले की कहानी…
पुलिस के मुताबिक, 7 अप्रैल 2025 को तृप्ति सिंह, उसका भाई सुधांशु सिंह राजपूत और उनके साथी तनुज बैश्य व अंजलि सिंह चंदेरी पहुंचे थे। चारों किला कोठी में ठहरे थे।यहां उनकी मुलाकात शिकायतकर्ताओं जयकुमार कोली निवासी पसियापुरा, चंदेरी, विजय कुमार दुबे, ऋतिक शर्मा और राघव सोनी से हुई। बातचीत में तृप्ति ने खुद को मध्य प्रदेश टूरिज्म विभाग की एडिशनल डायरेक्टर बताया।
सरकारी पद का हवाला देकर उसने पहले भरोसा बनाया। इसके बाद बातचीत नौकरी तक पहुंची। आरोपियों ने कहा कि वे मानव संसाधन विकास मंत्रालय में अच्छी तनख्वाह वाली सरकारी नौकरी लगवा सकते हैं। तृप्ति ने खुद को मंत्रालय का हेड तक बताया।
हर उम्मीदवार से करीब 3 लाख मांगे, 9.80 लाख नकद लिए
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने हर उम्मीदवार से करीब 3 लाख रुपए मांगे। सरकारी नौकरी की उम्मीद में युवक उनके झांसे में आ गए। चार युवकों से कुल 9 लाख 80 हजार रुपए नकद लिए गए।नौकरी की प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर उनके जरूरी दस्तावेज भी ले लिए गए। करीब 2 लाख रुपए बाद में देने की बात तय हुई थी। रकम लेने के बाद नौकरी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।समय बीतने के साथ युवकों को आरोपियों के दावों पर संदेह होने लगा। करीब तीन महीने पहले जून में मामला पुलिस तक पहुंचा और पुलिस ने आरोपियों की गतिविधियों की निगरानी शुरू की।

पकड़ाई तो बोली- तुम जानते नहीं हम कौन हैं
एसपी राजीव कुमार मिश्रा के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने सीधे गिरफ्तारी करने के बजाय आरोपियों की गतिविधियों और संपर्कों पर नजर रखी। तकनीकी साक्ष्य जुटाए गए और शिकायतकर्ताओं के माध्यम से संपर्क बनाए रखा गया।पुलिस ने आरोपियों तक यह संदेश पहुंचाया कि कुछ नए उम्मीदवार नौकरी के संबंध में मिलना चाहते हैं। उन्हें दोबारा चंदेरी बुलाया गया। 23 अगस्त को तृप्ति और उसका भाई सुधांशु फिर किला कोठी पहुंचे।
पुलिस पहले से तैयार थी। दोनों को महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में हिरासत में लिया गया और पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया।पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी के दौरान भी तृप्ति ने अपने कथित पद का रौब दिखाने की कोशिश की और कहा, “तुम जानते नहीं हम कौन हैं।” पुलिस का कहना है कि उस समय तक उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटाए जा चुके थे।
पूछताछ में खुली रुतबा दिखाने की पूरी कहानी
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में तृप्ति के कथित तौर पर अधिकारी बनने के तरीके सामने आए। पुलिस के अनुसार, वह सिर्फ मौखिक तौर पर खुद को सरकारी अधिकारी नहीं बताती थी, बल्कि इसके लिए पूरा माहौल तैयार करती थी।
फर्जी आईडी कार्ड, लेटरहेड, सरकारी कार्यालयों की तस्वीरें और भारत सरकार की नेम प्लेट वाली किराए की इनोवा का इस्तेमाल प्रभाव जमाने के लिए किया जाता था। महंगे होटलों में ठहरना और साथ में लोगों को लेकर चलना भी इसी रुतबे का हिस्सा था।भाई सुधांशु भी उसके साथ रहता था, जो कथित तौर पर अपनी पहचान पत्रकार के रूप में देता था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस पूरे सेटअप में कौन-कौन लोग उसकी मदद कर रहे थे।

42 लाख की जीप से पहुंची थी चंदेरी
पुलिस के मुताबिक, तृप्ति गिरफ्तारी से पहले करीब 42 लाख रुपए कीमत की जीप से चंदेरी पहुंची थी। जांच में यह भी सामने आया है कि वह पहले किराए की इनोवा का इस्तेमाल करती थी, जिस पर भारत सरकार की नेम प्लेट लगी होती थी।पुलिस अब इन वाहनों के इस्तेमाल, उनके मालिकों और बुकिंग से जुड़ी जानकारी जुटा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सरकारी अधिकारी होने की छवि बनाने में और किन लोगों की मदद ली गई।
पुलिस को CBI का फर्जी कार्ड भी मिला
तृप्ति के पास से सीबीआई अधिकारी का एक कथित फर्जी कार्ड भी मिला है। पुलिस यह पता लगा रही है कि यह कार्ड केवल रुतबा दिखाने के लिए बनाया गया था या इसका इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति से ठगी करने में भी हुआ जांच अब चंदेरी से बाहर निकलकर भोपाल और दूसरे शहरों तक पहुंच गई है। आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्कों, बैंक खातों और लेन-देन की जानकारी खंगाली जा रही है।
ठगी के पैसों से खरीदे 1.50-1.50 लाख के आईफोन
पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि तृप्ति और उसके भाई ने कथित ठगी से मिले पैसों से महंगे सामान खरीदे। दोनों ने करीब 1.50-1.50 लाख रुपए कीमत के आईफोन लिए। सिर्फ इन दो मोबाइल पर करीब 3 लाख रुपए खर्च किए गए।एसपी राजीव कुमार मिश्रा के अनुसार, अब यह पता लगाया जा रहा है कि ठगी की रकम किन बैंक खातों में गई और उसका इस्तेमाल कहां हुआ। खरीदे गए सामान और अन्य संपत्तियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

बिजनेसमैन से IAS बनकर शादी की बात भी सामने आई
पुलिस को तृप्ति के बारे में यह जानकारी भी मिली है कि उसने भोपाल के एक बिजनेसमैन से खुद को आईएएस अधिकारी बताकर शादी की थी। बाद में पति को उसके दावों पर संदेह हुआ। कथित सच्चाई सामने आने के बाद दोनों के बीच विवाद हुआ और बताया जा रहा है कि इसके बाद पति ने उसे अपने साथ नहीं रखा।पुलिस इस जानकारी का भी सत्यापन कर रही है। तृप्ति ने पूछताछ में बताया है कि उसने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। पुलिस उसकी शैक्षणिक योग्यता और उसके द्वारा बताई गई अन्य जानकारियों की भी जांच कर रही है।
पुराने शिकार और पूरे नेटवर्क को खंगाल रही पुलिस
पुलिस का कहना है कि चंदेरी का मामला संभवत: इकलौता नहीं है। अन्य लोग भी इनके शिकार बने हैं या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। आरोपियों के मोबाइल, कॉन्टैक्ट लिस्ट, बैंक ट्रांजेक्शन, दस्तावेज और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।पुलिस यह पता लगा रही है कि नौकरी के नाम पर कितने लोगों से संपर्क किया गया और कितनों से रुपए लिए गए।

मुख्य आरोपी समेत दो गिरफ्तार, दो फरार
गिरफ्तार तृप्ति सिंह राजपूत (30) भोपाल के संत आसाराम नगर, बाग मुगलिया की निवासी है। उसका भाई सुधांशु सिंह राजपूत (23) भी आरोपी है। दोनों को चंदेरी के किला कोठी से गिरफ्तार किया गया।
एसपी के अनुसार, दोनों से पुलिस रिमांड पर पूछताछ की जा रही है। पुलिस फर्जीवाड़े के तरीके, संभावित पीड़ितों, रकम और उसके इस्तेमाल से जुड़े सवालों के जवाब तलाश रही है।वहीं, इनके सहयोगी तनुज बैश्य और अंजलि सिंह अभी फरार हैं। पुलिस दोनों की तलाश कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी सरकारी पहचान तैयार करने और उसका इस्तेमाल करने में और कौन लोग शामिल थे।
एसपी बोले- सरकारी नौकरी के नाम पर किसी को पैसे न दें
एसपी राजीव कुमार मिश्रा ने कहा कि कोई व्यक्ति खुद को आईएएस, आईपीएस, सीबीआई या किसी बड़े सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर नौकरी लगवाने के बदले रुपए मांगे तो पहले उसकी पहचान और दावे की आधिकारिक स्तर पर पुष्टि करें।सरकारी नौकरी निर्धारित प्रक्रिया से मिलती है। किसी अधिकारी के पद, पहचान या रुतबे के आधार पर निजी तौर पर रकम देने से बचें। ठगी की आशंका होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें।
