मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र यानि यूसीसी, यूसीसी और यूसीसी … कौशल किशोर चतुर्वेदी

मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र यानि यूसीसी, यूसीसी और यूसीसी …
विधानसभा के मानसून सत्र के एक दिन पहले जगदीशपुर में हुई कैबिनेट बैठक कहीं न कहीं यही मंशा लिए थी कि यह सत्र समान नागरिक संहिता विधेयक यानि यूसीसी के लिए जाना जाएगा। सामान्यतः विधानसभा सत्र के दौरान कैबिनेट की बैठक विधानसभा परिसर में ही होती रही है। लेकिन मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने यूसीसी बिल को मंजूरी देने के लिए ऐतिहासिक स्थल जगदीशपुर को खास तौर से चुना था ताकि एक ऐतिहासिक बिल को मंजूरी भी मिले और सत्र के पहले ही संदेश मध्यप्रदेश के सभी नागरिकों तक पहुंच सके। और तय रणनीति के मुताबिक ही सरकार ने मानसून सत्र के पहले दिन ही यूसीसी विधेयक को पेश कर दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि विधानसभा की मूल कार्य सूची में इस विषय को शामिल नहीं किया गया था और सरकार ने पूरक कार्यसूची जारी कर कहीं न कहीं चोरी से यूसीसी बिल को पहले दिन पेश करने का रास्ता चुना है। यूसीसी यानि विपक्ष की स्थायी असहमति को समाए हुए वह बिल जिस पर कम से कम कांग्रेस कभी भी सहमत नहीं हो सकती। और यह भी तय है कि भाजपा सरकार को कांग्रेस की सहमति वाला यूसीसी विधेयक मंजूर भी नहीं है। नियम प्रक्रिया के तहत विधेयक पारित होने से पहले चर्चा के प्रावधान की औपचारिकता हंगामेदार रहेगी, यह सत्ता पक्ष और विपक्ष सभी को मालूम है। और सभी को यह भी मालूम है कि यूसीसी विधेयक हंगामे के बीच ही पारित हो जाएगा और तीन अन्य राज्यों की तरह ही मध्यप्रदेश इसे लागू करने वाला चौथा राज्य भी बन जाएगा।
20 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश विधानसभा में भारी हंगामे के बीच समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया गया। कांग्रेस ने पूरक कार्यसूची के जरिए बिल लाने पर आपत्ति जताई, जबकि भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने विरोध कर रहे कांग्रेस विधायकों पर तीखा हमला बोला। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए भारी हंगामे के बीच समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 2026 को विधानसभा के पटल पर रख दिया है। सरकार के इस कदम को जहां सत्ता पक्ष प्रदेश के इतिहास में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव बता रहा है, वहीं विपक्ष ने इसे लेकर तीखा विरोध दर्ज कराया है। तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास मंत्री गौतम टेटवाल ने सदन में इस बिल को प्रस्तुत किया, जिसके बाद विपक्ष की ओर से जोरदार नारेबाजी शुरू हो गई। भारी विरोध-प्रदर्शन और आक्रामक तेवरों के बावजूद विधानसभा अध्यक्ष ने इस विधेयक को रिकॉर्ड पर ले लिया। अब इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण विधेयक पर सदन में 21 जुलाई 2026 को विस्तृत चर्चा होना तय है। और इस चर्चा के साथ ही हंगामा होना भी तय है। विधेयक का विरोध करने के लिए भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील सदन में काले कपड़े पहनकर पहुंचे, जिस पर राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई। कांग्रेस विधायक के इस अंदाज पर भोपाल हुजूर से बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने बेहद तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यूसीसी लागू होने से उन मुल्ला-मौलवियों को घबराहट हो रही है जो अब इसके बाद हलाला, तीन-चार शादियां और तीन तलाक जैसी प्रथाओं को अंजाम नहीं दे पाएंगे। रामेश्वर शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस भी इन्हीं तत्वों की भाषा बोल रही है। उन्होंने आगे कहा कि आतिफ अकील काले कपड़े पहनें या पीले, इससे सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन प्रदेश में अब किसी भी तरह के काले कारनामे नहीं चलने दिए जाएंगे। दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस विधेयक को पेश करने के सरकारी तौर-तरीकों पर गंभीर आपत्ति जताई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कई कांग्रेस विधायकों ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह विधेयक मूल कार्यसूची का हिस्सा नहीं था। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने मुख्य एजेंडे में इसे शामिल न करके आखिरी वक्त पर सप्लीमेंट्री कार्यसूची के जरिए पिछले दरवाजे से विधेयक को पेश करने की जानकारी दी। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस प्रक्रिया पर सबसे तीखा वार करते हुए बयान दिया कि सरकार ने चोरों की तरह छिपकर इस बिल को सदन के पटल पर रखा है। मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने पलटवार किया, जबकि कांग्रेस की तरफ से जयवर्धन सिंह और उमंग सिंघार लगातार प्रक्रियागत खामियों को लेकर आक्रामक बने रहे।
मध्य प्रदेश से पहले देश के तीन राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल
लागू किया जा चुका है। फरवरी 2024 में उत्तराखंड, मार्च 2026 में गुजरात और मई 2026 में असम में यूसीसी बिल पारित हो चुका है। मध्यप्रदेश सरकार का दावा है कि इस कानून का मकसद बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारी सुनिश्चित करना है। यह सद्भाव की भावना को बढ़ावा देता है। साथ ही सभी नागरिकों को समान मानता है।
कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून देश के लिए एक नया अध्याय साबित होगा। साथ ही, उन्होंने उन आरोपों को खारिज किया कि इससे आदिवासी रीति-रिवाजों पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों के रीति-रिवाजों, परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों, प्रथाओं या जीवनशैली में बिल्कुल भी कोई दखल नहीं दिया गया है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति के लिए यूसीसी लागू करने की जल्दबाजी कर रही है, लेकिन ओबीसी और पिछड़े वर्गों के अधिकारों पर पूरी तरह खामोश है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ओबीसी समाज के मुद्दों पर चर्चा से आखिर क्यों बच रही है। सिंघार ने कहा कि कांग्रेस सदन के भीतर और बाहर सामाजिक न्याय और जनहित के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेगी। पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि देश का युवा यूनिफॉर्म सिविल कोड नहीं, बल्कि यूनिफॉर्म एजुकेशन कोड चाहता है।
अब वह देश का युवा क्या चाहता है, यह कॉकरोच जनता पार्टी के 20 दिन के अनशन में सामने आ चुका है। सोनम बांगचुक को भाजपा ने अहसास करा दिया है कि सरकारी तंत्र की सेहत पर ऐसे अनशनों से कोई फर्क नहीं पड़ता। यूसीसी विधेयक को लेकर भी मध्यप्रदेश सरकार ने ऐसा ही रुख अपनाया है कि विपक्ष का विरोध उनके लिए कोई मायने नहीं रखता। और इसी सन्देश के साथ मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक पारित होना तय है…और यह बात भी सच है कि मध्य प्रदेश की सोलहवीं विधानसभा का यह एकादश सत्र अगर किसी एक विषय के लिए जाना जाएगा, तो वह यूसीसी, यूसीसी और यूसीसी ही है…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं