क्राइम ब्रांच के तत्कालीन टीआई सुजीत श्रीवास्तव, कॉन्स्टेबल विकास सेंधव, निजी ड्राइवर अभय सिंह और निजी व्यक्ति दीपक पटेल के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस की FIR के बाद नए तथ्य सामने आए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जिस महिला ने लोकायुक्त में शिकायत की थी, उसका बेटा आईटी इंजीनियर है। आरोप है कि मोबाइल डेटा लीक, बैंक खाते से संदिग्ध ट्रांजैक्शन और FIR का डर दिखाकर उस पर लगातार दबाव बनाया गया।
सूत्रों के मुताबिक, इंजीनियर को कई बार गाड़ी में बैठाकर ले जाया गया। कुछ मौकों पर उसका मोबाइल भी अपने पास रख लिया गया। लगातार फोन और दबाव के चलते वह इतना परेशान हो गया कि करीब तीन दिन तक ठीक से सो नहीं पाया। परिवार ने उसके व्यवहार में बदलाव देखा तो पूछताछ की। इसके बाद युवक ने परिवार को पूरी बात बताई। उसकी मां ने 2 अप्रैल को लोकायुक्त पुलिस में शिकायत की।
इसी बीच 13 अगस्त को इंदौर बायपास पर फीनिक्स मॉल के पास युवक का एक्सीडेंट हो गया। हादसे में सिर, पैर समेत शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। वह ICU में भर्ती है। फिलहाल, बातचीत की स्थिति में नहीं है।
सबसे पहले 3 एआई तस्वीरों में देखिए प्रताड़ना

सबसे पहले युवक को जबरन गाड़ी में बैठाकर ले जाया गया।


ऐसे बढ़ता गया इंजीनियर पर दबाव
सूत्रों के मुताबिक, मार्च के आखिरी 3-4 दिन में युवक के पास टीआई से जुड़े लोगों के फोन आने शुरू हुए। उसे शिकायत और कथित जांच के नाम पर दबाव में लिया गया। आरोप है कि उसे अलग-अलग तरीकों से मानसिक दबाव में रखा गया।
मोबाइल डेटा और बैंक खाते का डर दिखाया
युवक से कहा गया कि उसके मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट से संदिग्ध ट्रांजैक्शन हुए हैं। मोबाइल का डेटा लीक होने की बात कहकर भी उसे डराया गया। उसे बताया गया कि मामला गंभीर है और कार्रवाई हो सकती है।
FIR और परिवार को बताने की बात कही
आरोप है कि युवक को FIR दर्ज होने और इसकी जानकारी परिवार तक पहुंचने का डर दिखाया जाता था। उसे परिवार को इस बारे में कुछ नहीं बताने के लिए भी कहा गया।

गाड़ी में बैठाकर ले जाने का आरोप
सूत्रों के मुताबिक, तत्कालीन टीआई सुजीत श्रीवास्तव युवक को कई बार अपनी गाड़ी में बैठाकर ले जाते थे। कुछ मौकों पर उसे गाड़ी में ही रोक कर रखने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि उसका मोबाइल भी अपने पास रख लिया जाता था।
अधिकारी के नाम पर रुपए मांगने का आरोप
सूत्रों के मुताबिक, टीआई से जुड़े बताए जा रहे दो लोगों ने युवक को फोन किया। आरोप है कि इन लोगों ने कहा कि अधिकारी ने रुपए मांगे हैं। युवक से ऐसे लोगों की करीब 4-5 बार बातचीत हुई।
रकम जुटाने के लिए करीब 7 बार फोन
परिवार को मामले की जानकारी मिलने से पहले युवक पर रुपए का इंतजाम करने का दबाव बनाया गया। इस दौरान उसे करीब सात बार फोन आने की बात सामने आई है।

कॉल रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट सुरक्षित किए
परिवार ने युवक के पास आए कुछ फोन कॉल की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी। रकम के लेन-देन से जुड़े स्क्रीनशॉट, दस्तावेज और अन्य तकनीकी साक्ष्य भी जुटाए गए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर लोकायुक्त पुलिस से संपर्क किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, लोकायुक्त पुलिस की कोशिश थी कि संबंधित लोगों को रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा जाए, लेकिन परिस्थितियां ऐसी नहीं बन सकीं। इसके बाद जांच में टीआई के नजदीकी बताए जा रहे व्यक्ति के खाते में UPI से रकम ट्रांसफर होने और बाकी रकम नकद दिए जाने से जुड़े साक्ष्य जुटाए गए।

साढ़े चार महीने चली तकनीकी जांच
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों का सत्यापन किया। कॉल डिटेल, लेन-देन और अन्य तथ्यों की कड़ियां जोड़ने में जांच एजेंसी को करीब साढ़े चार महीने लगे।
जांच के बाद 24 अगस्त को क्राइम ब्रांच के तत्कालीन टीआई सुजीत श्रीवास्तव, कॉन्स्टेबल विकास सेंधव, निजी ड्राइवर अभय सिंह और निजी व्यक्ति दीपक पटेल के खिलाफ केस दर्ज किया गया।
लोकायुक्त पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम की धारा 7 और BNS की धारा 61(2) के तहत केस दर्ज किया है। अब विवेचना में रिश्वत की मांग, रकम के लेन-देन और प्रत्येक आरोपी की भूमिका की जांच की जा रही है।
अमेरिका में नौकरी कर चुका इंजीनियर
संबंधित युवक आईटी इंजीनियर है। वह पहले अमेरिका में रहकर नौकरी कर चुका है। फिलहाल, वह भारत से ही एक विदेशी कंपनी के लिए ऑनलाइन काम करता है। घटना के करीब चार महीने बाद 13 अगस्त को इंदौर बायपास पर उसका एक्सीडेंट हो गया। हादसे के बाद से वह अस्पताल में भर्ती है। गंभीर चोटों के कारण फिलहाल वह बात करने की स्थिति में नहीं है।
