विकास पर केंद्रित रहा यह जनविश्वास…
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जन विश्वास कार्यक्रमों की श्रृंखला में यह ट्रेंड नजर आने लगा था कि सरकारी अफसरों और कर्मचारियों पर गाज गिरना तय है। बिना सस्पेंशन
के जनविश्वास की कल्पना शायद
सरकारी कारिन्दे नहीं कर पा रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट
में सिर्फ विकास, विकास और विकास पर जोर देकर अब सस्पेंशन की धारणा को ब्रेक कर दिया है। हालांकि, इसके पीछे की एक वजह यह भी हो सकती है कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बालाघाट जिले में बच्चों की मौत के बाद मुद्दे को इतना तूल दे दिया था कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने यही ठीक समझा कि बालाघाट में विकास के जरिए ही जन्म विश्वास पर जोर दिया जाए। वहीं लांजी में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम इस क्षेत्र की समस्या के मूल कारणों तक पहुंचकर उसके स्थायी समाधान की दिशा में कार्य कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी बीमारियों की रोकथाम सुनिश्चित की जा सके। जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उनके दर्द और कष्ट को मैंने महसूस किया है और अपनी ओर से परिजनों को 2-2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। यानी विकास के साथ संवेदना और विश्वास संग डॉ. मोहन यादव ने विपक्ष को ताक पर रखकर रंग जमा दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने बालाघाट जिले में नक्सलवादी गतिविधियों को जड़ से खत्म कर दिया है। आज हमारा प्रशासन और अधिकारी उन इलाकों तक पहुंचे हैं, जहां बीते कई सालों तक कभी कोई नहीं पहुंच पाया। बालाघाट जिला वह क्षेत्र रहा है, जहां नक्सलियों ने दिसंबर 1999 में तत्कालीन सरकार के मंत्री की निर्मम हत्या कर दी थी। राज्य के लिए 30 से 35 साल का वह दौर अत्यधिक कष्टकारी समय था। अब हमारी सरकार नक्सलमुक्त हो चुके इन क्षेत्रों में विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बालाघाट के 100 अति पिछड़े गांवों में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए लगभग 225 करोड रुपए की राशि हमने आज ही मंजूर कर दी है। स्थानीयजन की आजीविका और रोजगार के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं विकसित करने का प्रबंध भी किया है। इसके अंतर्गत सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य प्रत्येक क्षेत्र में कार्य किए जाएंगे। आज मंजूर की गई राशि अस्पताल खोलने, शासकीय स्कूलों के उन्नयन, सामुदायिक भवनों के निर्माण पर खर्च की जाएगी। हमारे प्रशासनिक अधिकारी अलग-अलग इलाकों में शिविर लगाकर लोगों को जन कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित कर रहे हैं। वहीं बैंगा जनजाति पर फोकस करते हुए उन्होंने एक बड़ी घोषणा भी कर डाली। सीएम ने कहा कि बैगा समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान के लिए बैगा विकास प्राधिकरण की स्थापना की जाएगी। इस प्राधिकरण से बैगा समुदाय के लिए सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अधोसंरचना विकास के कार्य प्राथमिकता से पूरे किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बैगा समुदाय को शिक्षा, आजीविका और कौशल विकास के साथ जोड़कर उन्हें भरपूर लाभ दिया जाएगा। डॉ॰ मोहन यादव का फोकस इसी बात पर रहा कि नक्सल मुक्त हो चुके बालाघाट को अब आत्मनिर्भर बनाना उनकी प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से अब सुरक्षित बालाघाट के बाद समृद्ध बालाघाट बनाने का संकल्प लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब हम नक्सलवाद से अवरुद्ध हुई बालाघाट जिले की विकास की धारा को समृद्धि और खुशहाली की ओर लेकर जाएंगे।
सबसे बड़ी बात यह है कि विकास की कल्पना धरातल पर उतर कर ही रहेगी क्योंकि मुख्यमंत्री ने कहा कि बालाघाट और लांजी क्षेत्र के विकास के लिए हमने विपक्ष के निर्वाचित विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी साथ लेकर क्षेत्र के विकास की योजना तैयार की है। आने वाले समय में हम नेता प्रतिपक्ष और सभी दलों को भी साथ लेकर क्षेत्र के विकास के लिए कार्य करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बालाघाट नंबर वन जिला बने इस कोशिश में हम कार्य कर रहे हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बालाघाट वह जिला है, जिसने पूरे देश में सबसे पहले नक्सलवाद को आखिरी सलाम किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे बोंदारी गांव में ग्रामवासियों से आत्मीय संवाद किया। मुख्यमंत्री ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठे, जनजातीय समाज की समस्याएं सुनीं और उन्हें मौके पर ही हल किया।
तो बालाघाट में आयोजित जन विश्वास कार्यक्रम ने एक अलग छाप छोड़ी है। पहली बात तो यह कि रक्षाबंधन की वजह से तय दिन शुक्रवार की जगह जनविश्वास का आयोजन शनिवार 29 अगस्त 2026 को किया गया। वहीं बालाघाट में बच्चों की मौत होने की बड़ी वजह सामने होते हुए भी किसी भी कर्मचारी-अधिकारी को निलंबित किए बिना मुख्यमंत्री ने विकास को ही जन विश्वास का आधार बनाया। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा जनता का विश्वास जीतने के लिए शुरू किए गए जन विश्वास कार्यक्रम के पहले चार आयोजन में से बालाघाट को हमेशा इसलिए याद किया जाएगा, क्योंकि यह जनविश्वास कार्यक्रम सिर्फ और सिर्फ विकास पर केंद्रित रहा… यहां तनाव नहीं सद्भाव ही नजर आया।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।
