सत्तर दिन में सत्ता को सफल चुनौती देकर अब विपक्ष संग खड़े हैं कॉकरोच… कौशल किशोर चतुर्वेदी

सत्तर दिन में सत्ता को सफल चुनौती देकर अब विपक्ष संग खड़े हैं कॉकरोच…
अमेरिका में बैठे अभिजीत दिपके और कॉकरोच जनता पार्टी ने 70 दिन में वह मुकाम हासिल कर लिया है, जिसकी कल्पना कम से कम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्बाध कार्यकाल में विपक्ष ने तो कभी भी नहीं की होगी। 10 साल तक नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी हासिल करने में विफल रही कांग्रेस और विपक्ष भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कार्यशैली पर कितना भी प्रहार करता रहा हो, लेकिन मोदी के सामने हरदम बौना ही नजर आता रहा। अगर मोदी सरकार की किरकिरी किसी ने कराई है, तो वह उस शब्द ‘कॉकरोच’ ने कराई है, जो अनायास ही भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेरोजगारों को लेकर की गई टिप्पणी से निकला था। और अमेरिका में बैठे अभिजीत ने जेन-जी के सफल दौर में इस शब्द के सहारे 70 दिन में भारत की मोदी सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। अभिजित और उसकी सोच को हल्के ढंग में लेकर केंद्र की भाजपा सरकार ने जो गलती की, उसकी कल्पना पूरी दुनिया में अपना लोहा बनवाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से कतई नहीं की जा सकती थी। और विडम्बना की बात यह भी है कि धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफा होने के साथ यह चुनौती खत्म नहीं हुई है। अगर देखा जाए तो विपक्ष यानी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की पार्टी कांग्रेस और यूपीए के साथ अब कॉकरोच की एक अकल्पनीय ऊर्जा से भरी भीड़ भी खड़ी है जो कह रही है कि ‘झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।’
कॉकरोच जनता पार्टी के बारे में अगर कुछ बात की जाए तो कॉकरोच जनता पार्टी (संक्षिप्त: सीजेपी; शाब्दिक अर्थ: ‘तिलचट्टा जनता पार्टी’) एक भारतीय व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन है, जिसकी स्थापना 16 मई 2026 को अभिजीत दिपके द्वारा की गई थी। दिपके एक राजनीतिक संचार रणनीतिकार हैं, जो पूर्व में आम आदमी पार्टी के साथ काम कर चुके हैं। इस आंदोलन का नाम भारत के सत्ताधारी दल, भारतीय जनता पार्टी का एक व्यंग्यात्मक अनुकरण है। मई 2026 में भारत के न्यायिक और सोशल मीडिया परिदृश्य में उत्पन्न हुए एक प्रमुख विवाद के बाद यह आंदोलन अस्तित्व में आया। इसकी उत्पत्ति 15 मई 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत द्वारा एक अदालती सुनवाई के दौरान की गई उस मौखिक टिप्पणी के विरोध में हुई थी, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर बेरोजगार युवाओं की तुलना “तिलचट्टों” और “समाज के परजीवियों” से की थी। अपनी स्थापना के कुछ ही दिनों के भीतर, इस आंदोलन ने 3,50,000 से अधिक आधिकारिक पंजीकरण प्राप्त कर लिए और इंस्टाग्राम पर इसके 3 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हो गए। यह आंदोलन केवल डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसने जमीनी स्तर पर भी कई गतिविधियाँ की हैं, जहाँ पार्टी के स्वयंसेवक कॉकरोच की वेशभूषा पहनकर विरोध प्रदर्शनों और सफाई अभियानों में हिस्सा लेते हैं। यद्यपि यह आंदोलन वर्तमान में भारत निर्वाचन आयोग के तहत एक राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत नहीं है, फिर भी यह भारतीय युवाओं को प्रभावित करने वाले व्यापक सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों के खिलाफ सक्रिय रूप से अभियान चला रहा है।
पार्टी ने व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए एक औपचारिक पाँच-सूत्रीय घोषणापत्र जारी किया है। सेवानिवृत्ति के बाद मुख्य न्यायाधीशों को राज्यसभा या किसी अन्य पद पर नियुक्त करने पर रोक लगाई जाए। मतदान के अधिकारों का उल्लंघन होने पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ यूएपीए के तहत कार्रवाई की जाए (यह 2025 के चुनावी विवाद के संदर्भ में है)। संसद और सभी कैबिनेट पदों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। मीडिया में एकाधिकार खत्म करने के लिए अडाणी समूह और रिलायंस के स्वामित्व वाले मीडिया घरानों के लाइसेंस रद्द किए जाएं, और “गोदी मीडिया” के एंकरों की वित्तीय जाँच हो। दल-बदल करने वाले विधायकों या सांसदों के चुनाव लड़ने पर 20 साल का प्रतिबंध लगाया जाए। पांच मांगों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज के सुझाव पर पार्टी ने अपने घोषणापत्र में यह भी जोड़ा है कि सीजेपी आरटीआई अधिनियम के प्रति जवाबदेह होगी और कोई भी गुप्त फंड स्थापित नहीं करेगी।
6 जून 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर मंतर, नई दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से नीट 2026 पेपर लीक और सीबीएसई परिणामों में हुई कथित ग्रेडिंग अनियमितताओं के खिलाफ था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली के प्रशासन, उसकी पारदर्शिता और ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ मूल्यांकन व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान
के इस्तीफे की माँग की।
पर दुनिया की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी के मुखिया और दुनिया के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा में नंबर 2 पर आसीन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शायद अभिजीत और कॉकरोच जनता पार्टी की क्षमताओं का आकलन उस तरह से नहीं कर पाए, जिस तरह से एक सफल रणनीतिकार के रूप में यह जोड़ी भारतीय राजनीति में इतिहास बनाने में सफल रही है। और 28 जून 2026 को सोनम वांगचुक द्वारा युवाओं के समर्थन में मांगें माने जाने तक आमरण अनशन की शुरुआत की गई। कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन द्वारा रफ्तार पकड़ने के साथ ही 25 जुलाई 2026 तक हुए घटनाक्रमों ने मोदी सरकार को बैकफुट पर लाते हुए धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया। यानि 25 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार ने कॉकरोज जनता पार्टी और प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख माँगों को स्वीकार कर लिया।
फिलहाल मांगें माने जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है। लेकिन यह कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन का अंत नहीं बल्कि शुरुआत है। इसके संकेत कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी पहली जीत के साथ ही दे दिए हैं। युवाओं की ताकत और विरोध के सामने किसी भी सत्ता का टिक पाना मुमकिन नहीं रहा है, इतिहास इसका गवाह है। और युवाओं ने ही मोदी की सरकार बनाने में हमेशा ही प्रमुख भूमिका निभाई है। और अब वही युवा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार से जवाब मांग रहा है, जवाबदेही और पारदर्शिता की उम्मीद कर रहा है और अडाणी-अंबानी मुक्त पत्रकारिता के चौथे स्तम्भ की अपेक्षा कर रहा है। सत्ता में आने के बाद भले ही कॉकरोच जनता पार्टी के हालात भी बदतर हो जाएं, वह भविष्य की बात है। पर फिलहाल तो विपक्ष के संग खड़े होकर कॉकरोच जनता पार्टी यह अहसास करा रही है कि वह मोदी सरकार की नींद उड़ाने का हौसला रखती है। और विपक्ष संग खड़े होकर कॉकरोच सत्ता को चुनौती देने में सक्षम हैं, यह बात वह साबित कर चुके हैं। केंद्र के बाद अब नंबर बिहार का है तो उसके बाद फिर केंद्र या कोई भी राज्य इनके निशाने पर आ सकता है। भारत में जेन-जी को जिंदा करने का काम अभिजीत दिपके ने कर दिया है, लेकिन यह जेन-जी समय आने पर अभिजीत दिपके को भी आइना दिखा सकती है। यह जेन-जी की स्वाभाविक यात्रा ही मानी जाएगी। फिलहाल तो जेन-जी भारत सरकार और मोदी-शाह की टीम को आइना दिखा रही है। आगे-आगे क्या होता है, बस यह देखने वाली बात है। और देखने वाली बात यह भी है कि जेन-जी खुद को संगठित बनाए रखने के लिए क्या तरीके अपनाती है। और देखने वाली बात यह भी है कि इन युवाओं को जेन-जी के रूप में भाजपा के करीब लाने के लिए मोदी-शाह की टीम क्या रणनीति अपनाती है। यदि मोदी-शाह की टीम इसमें सफल नहीं हुई तो वह उनकी सबसे बड़ी हार होगी…और यदि ऐसा हुआ तो सत्तर दिन में सत्ता को खुली चुनौती देने के बाद विपक्ष संग खड़े कॉकरोच भाजपा को सत्ता में आने से रोकने में सबसे बड़ी बाधा बन जाएंगे, यह तय है…।
जेन-जी की इस महत्वपूर्ण जीत के साथ ही मध्य प्रदेश का गौरव दुष्यंत कुमार त्यागी का यह शेर स्वतः ही याद आ जाता है कि
“कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।”
इन युवा यारों ने एक पत्थर तबीयत से उछाल भी दिया है और आसमान में सुराख भी कर दिया है। यह अहसास अब भारत को हो चुका है और मोदी-शाह को भी हो चुका होगा। सत्ता के लिए दुख की सबसे बड़ी बात यह है कि सत्तर दिन में सत्ता को सफल चुनौती देकर अब विपक्ष संग खड़े हैं कॉकरोच…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं