पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर और वहीं के सेक्टर सात में भूमिपूजन के तीन माह बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया है।क्योंकि इकोनॉमिक कॉरिडोर में अब तक सिर्फ 4 फीसदी निजी जमीन ही मिल पाई है। पीथमपुर के सेक्टर-7 में 73% जमीन मिल गई है, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया है।

3 मई 2026 को मुख्यमंत्री ने इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण के लिए भूमिपूजन किया था। तब से अब तक वहां किसी भी प्रकार की औद्योगिक गतिविधि शुरू नहीं हो पाई है। विशेषज्ञों के अनुसार, नैनोद से धार रोड तक सरकारी कॉरिडोर की रफ्तार जमीन के पेंच में फंसी है।
यही स्थिति एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप के रूप में विकसित हो रहे पीथमपुर सेक्टर-7 (इनक्यूबेशन सिटी) की है। यहां कई बड़े समूहों ने निवेश किया है। जून 2023 से डेवलपमेंट जारी है, लेकिन तीन साल बाद भी आधी से ज्यादा निजी जमीन मिलना बाकी है।

कॉरिडोर: 17 गांवों से गुजरना है रूट, 96% निजी जमीन नहीं मिलीइकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए 1331.02 हेक्टेयर जमीन प्रस्तावित है, जिसमें 165.88 हेक्टेयर सरकारी और 1165.13 हेक्टेयर निजी भूमि शामिल है। सरकारी जमीन तो उपलब्ध है, लेकिन असली चुनौती 17 गांवों से होकर गुजरने वाली निजी जमीन है।
मौजूदा स्थिति: भैंसलाय, सोनवाय, नैनोद, मोकलाय और नावदा पंथ जैसे गांवों में किसानों की सहमति लेने की प्रक्रिया सुस्त है। अब तक केवल 22 रजिस्ट्रियों के जरिये 46.04 हेक्टेयर (3.95%) निजी जमीन ही मिल पाई है। पेंच कहां फंसा: भूमि अधिग्रहण कानून के तहत किसान 4 गुना मुआवजे की मांग पर अड़े हुए हैं।
पीथमपुर सेक्टर-7: 3 साल बाद भी 236 हेक्टे. भूअधिग्रहण अधूरा है। पीथमपुर सेक्टर-7 में 1268.08 हेक्टेयर जमीन में से 390.50 हेक्टेयर सरकारी और 877.58 हेक्टेयर निजी भूमि है। स्थिति: जून 2023 से सड़क, बिजली, पानी और ड्रेनेज जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर का काम जारी है। अब तक 398 रजिस्ट्रियों के जरिए 641.11 हेक्टेयर (73%) निजी जमीन मिल चुकी है।
75 मीटर चौड़ी रोड बनाना है
सिंहस्थ-2028 में अब 20 महीने हैं। इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण में 75 मीटर चौड़ी सड़क बनना है। जमीन अधिग्रहण की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए डेडलाइन तक काम पूरा होना मुश्किल नजर आ रहा है।