छुट्टी के दिन खुला हाईकोर्ट, बिना नोटिस एडवोकेट अमित रावल का ऑफिस सील करने पर निगम को फटकार; विशेष सुनवाई में तत्काल सील हटाने के आदेश, अग्नि सुरक्षा पर सोसायटी से दो सप्ताह में जवाब तलब

इंदौर नगर निगम द्वारा बिना पूर्व सूचना एक एडवोकेट का कार्यालय सील किए जाने के मामले में हाई कोर्ट ने अवकाश के दिन विशेष अनुमति देकर सुनवाई की। मामले की तत्काल आवश्यकता को देखते हुए कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए नगर निगम को एडवोकेट अमित रावल का कार्यालय तुरंत खोलने का आदेश दिया।

कोर्ट ने माना कि कार्यालय सील रहने से अधिवक्ता का पेशेवर और न्यायालयीन कामकाज प्रभावित हो रहा है। हालांकि, हाई कोर्ट ने अग्नि सुरक्षा के मुद्दे को गंभीर सार्वजनिक हित का विषय मानते हुए संबंधित सोसायटी को दो सप्ताह के भीतर आवश्यक अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन कर जवाब पेश करने के निर्देश भी दिए।

बिना नोटिस कार्यालय सील करने पर उठाया सवाल याचिकाकर्ता अमित रावल की ओर से एडवोकेट अंशुल हार्डिया ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान एडवोकेट रितेश इनानी भी मौजूद रहे। याचिका में बताया गया कि एमजी रोड स्थित उनके कार्यालय को नगर निगम ने बिना किसी पूर्व नोटिस या सूचना के सील कर दिया।

इससे उनका पूरा पेशेवर और न्यायालयीन कामकाज प्रभावित हो गया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि सोमवार को विभिन्न न्यायालयों में उनके कई प्रकरण सूचीबद्ध हैं। कार्यालय बंद होने के कारण वे उनकी तैयारी नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनके मुवक्किलों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

नगर निगम ने बताया सीलिंग का कारण सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से बताया गया कि जिस भवन में कार्यालय स्थित है, उसकी सोसायटी ने अग्नि सुरक्षा संबंधी नोटिस का पालन नहीं किया था। इसी कारण पूरे परिसर को सील किया गया। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि भवन में संचालित कार्यालयों और दुकानों के संचालकों को ऐसे किसी नोटिस की जानकारी नहीं दी गई थी। साथ ही उनके कार्यालय में आवश्यक अग्निशमन उपकरण पहले से उपलब्ध हैं।

हाईकोर्ट ने दी अंतरिम राहत जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत देते हुए नगर निगम को उनके कार्यालय की सील तत्काल हटाने का निर्देश दिया। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अग्नि सुरक्षा का विषय सार्वजनिक हित से जुड़ा है। इसलिए संबंधित सोसायटी को आवश्यक अग्नि सुरक्षा मानकों का तत्काल पालन करने और दो सप्ताह के भीतर इस संबंध में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।