मुरैना जिले के पोरसा के 20 वर्षीय सर्वेश राठौर की आत्महत्या का मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर वायरल सुसाइड वीडियो के बाद परिवार ने मेडिकल संचालकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।परिवार का दावा है कि पोरसा के एक मेडिकल स्टोर संचालक ने पहले सर्वेश को उधारी में नशीले इंजेक्शन देकर इसकी लत लगाई।
फिर पैसों के लिए इस कदर प्रताड़ित किया कि उसे अपनी जान देना पड़ी। इसी नशे के अवैध कारोबार के दम पर मेडिकल संचालक ने 10 साल में करोड़ों की संपत्ति बना ली। हाईवे किनारे 5 मंजिला इमारत खड़ी कर दी

मौत से पहले सर्वेश का वायरल वीडियो
शुक्रवार को अपने सीने में देशी कट्टे से गोली मारने से ठीक पहले सर्वेश राठौर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उसने रोते हुए अपना दर्द और पोरसा में फैल रहे नशे के जाल का सच उजागर किया था। “मेरा नाम सर्वेश राठौर है। मुझे 4 साल से नशे के इंजेक्शन की लत लग चुकी है, जिससे मेरी मानसिक स्थिति खराब हो जाती है। मैं इसे अटेर रोड स्थित अग्रवाल मेडिकल से लाता हूं। अब तक करीब 10-12 लाख रुपए बर्बाद कर चुका हूं। मैं इसे छोड़ना चाहता हूं, पर छोड़ नहीं पा रहा। पोरसा के 80% लड़के इस नशे से बर्बाद हो रहे हैं। मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं। प्रशासन से गुजारिश है कि इस मेडिकल स्टोर पर सख्त कार्रवाई की जाए।”वीडियो बनाने के तुरंत बाद सर्वेश ने घर के बाहर गली में खुद को गोली मार ली। परिजन जब तक पहुंचे, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं।
चाचा का आरोप- ‘पहले लत लगाई, फिर उधारी वसूली के नाम पर दीं धमकियां’

पोरसा की गांधी नगर कॉलोनी में जब भास्कर की टीम पहुंची तो पिता राजू राठौर सदमे में बेसुध बैठे थे। मृतक के चाचा मुन्नालाल ने बताया- 4 साल पहले तक सर्वेश हर काम में आगे रहता था और पिता के फल के कारोबार में हाथ बंटाता था। अग्रवाल मेडिकल के संपर्क में आने के बाद उसे इंजेक्शन की लत लगी। उसने अपने घर और दुकान के करीब 12 लाख रुपए नशे में फूंक दिए।
जब परिवार को पता चला तो उसे दुकान से अलग कर दिया गया। इसके बाद वह प्राइवेट नौकरी करने लगा। सैलरी के साथ-साथ घर से पैसे चुराकर इंजेक्शन खरीदने लगा।मेडिकल स्टोर वाले ने पहले तो उसे उधारी पर इंजेक्शन दिए, फिर अचानक 25 हजार रुपए की वसूली के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। 15 दिन से आरोपी उसे प्रताड़ित कर रहे थे। कह रहे थे “जाकर कहीं मर जा, हम तो रुपए वसूल कर ही रहेंगे।”

10 साल में नाश्ते की दुकान से करोड़ों का साम्राज्य
घटना के बाद से ही अग्रवाल मेडिकल के संचालक सुनील अग्रवाल और राजू अग्रवाल फरार हैं। उनके घर पर ताला लटका है। पड़ोसियों ने बताया- 10 साल पहले तक तीनों भाइयों (सुनील, राजू और नीरज) की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। एक भाई मेडिकल पर काम करता था। दूसरा नाश्ते का ठेला चलाता था।
लॉकडाउन के दौरान शराब दुकानें बंद हुईं तो इन्होंने नशीले इंजेक्शन बेचना शुरू कर दिया। 135 रुपए का इंजेक्शन 500 रुपए तक में बेचा जाता था। देखते ही देखते इन्होंने कई प्लॉट, गाड़ियां और हाईवे किनारे 5 हजार वर्गफीट में 5 मंजिला मकान खड़ा कर लिया। इसकी कीमत 5 करोड़ रुपए है।

सवाल सुनते ही ड्रग इंस्पेक्टर ने काटा फोन
इस मामले में जब ड्रग इंस्पेक्टर बाबूलाल बर्थरिया से सवाल पूछे तो उनका रवैया टालमटोल वाला रहा।
- सवाल: अग्रवाल मेडिकल पर क्या कार्रवाई हुई?
- जवाब: हम ठोस कार्रवाई कर रहे हैं, ताकि लाइसेंस कैंसिल हो सके।
- सवाल: बैन दवाओं का इतना स्टॉक रखने की परमिशन कहां से मिली?
- जवाब: बिना डॉक्टर की सलाह के दवा नहीं दी जा सकती, कितना स्टॉक था, इसकी जांच करेंगे।
- सवाल: सील होने के बाद भी यह स्टोर दोबारा किसकी परमिशन से खुला?
- जवाब: मैं अभी जरूरी काम कर रहा हूं…” और इतना कहते ही इंस्पेक्टर ने फोन काट दिया।
खुदकुशी के लिए उकसाने का केस दर्ज, मेडिकल स्टोर सील
पोरसा थाना प्रभारी दिनेश कुशवाहा ने बताया कि मेडिकल संचालक सुनील अग्रवाल और राजू अग्रवाल के खिलाफ खुदकुशी के लिए उकसाने (IPC 306) का केस दर्ज कर लिया गया है। दबिश दी जा रही है और मेडिकल स्टोर को सील कर दिया गया है।
ऑपरेशन या आईसीयू में मरीज का गिरता बीपी संभालने में किया जाता है
जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. शरद शर्मा के अनुसार, जिस दवा (मेफेंटरमाइन सल्फेट) का इस्तेमाल नशा करने के लिए किया जा रहा था, वह एक कार्डियक स्टिमुलेंट है। इसका उपयोग केवल अस्पतालों में ऑपरेशन या आईसीयू के दौरान मरीज का गिरता हुआ ब्लड प्रेशर संभालने के लिए किया जाता है। बिना मेडिकल देखरेख के इसका इस्तेमाल हार्ट अटैक, मानसिक असंतुलन, डिप्रेशन और मौत का कारण बन सकता है।
