
मोहन सरकार के फैसलों से दु:खी होगी राजीव की आत्मा और राहुल का मन…
मध्य प्रदेश में इन दिनों मोहन सरकार के फैसलों से कांग्रेस बहुत दु:खी है। राजीव गांधी का नाम राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से हटा दिया गया है। कांग्रेस के खेमे में मोहन सरकार के इस फैसले से बहुत आक्रोश है। तो वहीं युवाओं से संवाद करने आ रहे राहुल गांधी को इंदौर में नेहरू स्टेडियम न दे कर सरकार ने कांग्रेस को दूसरा बड़ा झटका दिया है। यह दोनों ही फैसले निश्चित तौर से कांग्रेस के खेमे में निराशा और आक्रोश पैदा कर रहे हैं। निश्चित तौर से मोदी और मोहन सरकार के इन फैसलों से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आत्मा और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का मन बहुत दु:खी होगा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी 19 सितंबर को इंदौर आएंगे और यहां आयोजित होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में प्रदेशभर के विद्यार्थियों एवं युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक, युवाओं के अधिकार और उनके भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर छात्रों की बात सुनी जाएगी। कार्यक्रम के लिए कांग्रेस ने इंदौर के नेहरू स्टेडियम को उपलब्ध कराने की मांग की थी। स्टेडियम की अनुमति को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर आयोजन के लिए नेहरू स्टेडियम उपलब्ध कराने तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने का आग्रह किया था। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ‘छात्रों की गूंज’ कोई सामान्य राजनीतिक सभा नहीं, बल्कि देश के भविष्य और युवाओं के सपनों से जुड़ा गैर-राजनीतिक जनसंवाद है। ऐसे आयोजन को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए। यदि नेहरू स्टेडियम उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो कांग्रेस जिला प्रशासन से चर्चा कर इंदौर में अन्य उपयुक्त स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करेगी। कांग्रेस का उद्देश्य स्थान को लेकर विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि छात्रों की आवाज को राहुल गांधी तक और राहुल गांधी की आवाज को छात्रों तक पहुंचाना है। लेकिन मोहन सरकार ने नेहरू स्टेडियम न देकर यह साफ कर दिया है कि वह कांग्रेस मुक्त मध्यप्रदेश की पक्षधर हैं। हालांकि कांग्रेस ने अब दूसरी जगह आयोजन करने का मन बना लिया है।मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि भाजपा सरकार को छात्रों और युवाओं की आवाज से डरने के बजाय उसे सुनना चाहिए। ‘छात्रों की गूंज’ पूरी तरह युवाओं के सवालों और उनके भविष्य से जुड़ा कार्यक्रम है। लोकतंत्र में किसी भी विचार या संवाद से डरने के बजाय उसका स्वागत किया जाना चाहिए।
तो दूसरी तरफ राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को तीन हिस्सों में बांटने और उसका नाम बदलने के फैसले को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीतिक विवाद ने जन्म ले लिया है। कांग्रेस ने भाजपा सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के योगदान को मिटाने की कोशिश बताया है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि आरजीपीवी के नाम से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम हटाना भाजपा सरकार की ‘ओछी मानसिकता’ का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी के कार्यकाल में देश ने आधुनिक तकनीक की दुनिया में प्रवेश किया और सूचना क्रांति व कंप्यूटर युग की शुरुआत हुई। कमलनाथ ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “नाम बदलकर इतिहास नहीं बदल सकते। अच्छे और बुरे हर काम का हिसाब होता है, हम भी हिसाब करेंगे।” नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सरकार के फैसले की घोर निंदा की। उन्होंने कहा कि देश में सूचना प्रौद्योगिकी की क्रांति लाने और कंप्यूटर युग की शुरुआत करने में राजीव गांधी का महत्वपूर्ण योगदान था। सिंघार ने सवाल उठाया कि जिन नेताओं ने देश के लिए अपना समय दिया, योगदान दिया और शहादत दी, उनके नाम हटाना क्या उचित है?
वास्तव में यह दो मामले इसी बात की गवाही दे रहे हैं कि भाजपा की डबल इंजन की सरकारें पूरी तरह से कांग्रेस मुक्त भारत बनाने में जुटी है और मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की सोच पर अमल कर रही हैं। इसी क्रम में आरजीपीवी से राजीव गांधी का नाम अलग किया गया है। तो राहुल गांधी के आयोजनों पर अनुमति देने में सावधानी बरत कर मोहन सरकार अपने राजनैतिक हितों के प्रति सजगता का परिचय दे रही है। पर यह बात हजार फीसदी सही है कि इन फैसलों से राजीव गांधी की आत्मा दु:खी हो रही होगी तो राहुल गांधी का मन भी दु:खी होगा…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।