दतिया उपचुनाव… निकाले जाते रहेंगे करीब नौ फीसदी कम हुए मतदान के मायने… कौशल किशोर चतुर्वेदी

दतिया उपचुनाव… निकाले जाते रहेंगे करीब नौ फीसदी कम हुए मतदान के मायने…
दतिया के मतदाताओं ने फैसला सुना दिया है। उपचुनाव के लिए 30 जुलाई 2026 को हुए मतदान में 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। सभी 291 मतदान केंद्रों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार कुल 1,57,461 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।पुरुष मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 74.09 रहा, जबकि महिलाओं ने 68.48 प्रतिशत मतदान किया।प्रत्याशियों की किस्मत अब ईवीएम में कैद हो गई है। उपचुनाव के नतीजे 3 अगस्त को मतगणना के बाद घोषित किए जाएंगे। और तब तक चुनाव में हुए करीब नौ फीसदी कम मतदान के मायने निकाले जाते रहेंगे।
दतिया उपचुनाव, भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण है, तो बहुत ही उम्मीदों से भरा हुआ भी है। अब जब उपचुनाव में विधानसभा चुनाव 2023 की तुलना में करीब नौ फीसदी मतदान कम हुआ है, तब इसके मायने निकाले जाने पर होने वाली चर्चा बहुत दिलचस्प हो गई है। दतिया विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में अभी तक का सर्वाधिक 80.20 फीसदी मतदान का रिकॉर्ड बना था। यह 1957 के बाद का सर्वाधिक था। मायने निकालने का सही समय यह इसलिए भी है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने तीन विधानसभा चुनाव जीतकर और मंत्री पदों पर रहकर दतिया में विकास की नई इबारत लिखने वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को टिकट दिया था, वजह यह थी कि वह पिछला विधानसभा चुनाव करीब साढ़े सात हजार मतों से कांग्रेस के राजेन्द्र भारती से हार गए थे। और भाजपा की चुनावी सर्वे में डॉ. नरोत्तम मिश्रा उपचुनाव में भी हार की कगार पर नजर आ रहे थे। लेकिन दतिया के भाजपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी के इस फैसले पर कड़ा आक्रोश जताया था। अब चुनाव के मायने भाजपा के इसी फैसले के इर्द-गिर्द निकाले जाएंगे। टिकट न मिलने के बाद भी डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने न केवल आशुतोष तिवारी के चुनाव की कमान संभाली, बल्कि दिन रात मेहनत कर भाजपा कार्यकर्ताओं से पार्टी के पक्ष में मतदान करने की अपील भी की। लेकिन बाहरी तौर पर यही कयास लगाए जाते रहे कि भाजपा कार्यकर्ता पार्टी के फैसले से आहत नजर आते रहे। वहीं कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को चुनाव मैदान में उतारकर दतिया के मतदाताओं का भरोसा जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब इस बात को लेकर ही चर्चा होनी है कि भाजपा और कांग्रेस में से किन के समर्थकों ने मतदान केंद्र जाने में कंजूसी बरती है। हालांकि, माना जाता है कि घर से मतदाताओं को मतदान केंद्र तक ले जाने में भाजपा हमेशा ही कांग्रेस से आगे रही है। और संगठन के मामले में भाजपा को हमेशा ही कांग्रेस से बेहतर माना जा रहा है। इन सब खूबियों के बाद भी कम मतदान होने पर भाजपा के खेमे में कहीं न कहीं थोड़ी निराशा तो जरूर होगी। यह बात तय है कि दतिया उपचुनाव में जो भी मायने निकाले जाएंगे, उनके केंद्र में नरोत्तम मिश्रा ही रहेंगे। हालांकि, भाजपा के लिए दतिया उपचुनाव में पाने के लिए सब कुछ है, तो खोने के लिए कुछ भी नहीं है। हो सकता है कि इन प्रतिकूल परिस्थितियों में एक बार फिर भाजपा के हाथ हार ही लगे, लेकिन तब भी कांग्रेस की जीत भाजपा को डैमेज नहीं कर पाएगी। लेकिन यदि भाजपा यह उपचुनाव जीतती है, तब यह कैडर बेस पार्टी नए चेहरों को मैदान में उतारकर पूरे आत्मविश्वास के साथ जीत का दावा खुलकर करने से पीछे नहीं हटेगी।
तो देखने वाली बात यही है कि 3 दिन के इंतजार के बाद दतिया में कमल खिलने वाला है या फिर कांग्रेस कमाल करने वाली है। व्यक्तिगत तौर पर
भाजपा की हार कहीं न कहीं मतदाताओं के दिल में डॉ. नरोत्तम मिश्रा के प्रति प्रेम की अभिव्यक्ति मानी जाएगी और भाजपा संगठन को यह सीख देती नजर आएगी कि मतदाताओं की भावनाओं को आहत कर लिए गए फैसले पार्टी के हित में परिणामदायी नहीं रहेंगे। फिलहाल तो मतदान में कमी ने कांग्रेस का उत्साह बढ़ाया है।फिलहाल तो दतिया उपचुनाव के बाद के यह तीन दिन मायने निकाले जाने की माथापच्ची में ही गुजरने वाले हैं…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं