
भोपाल पुलिस की गिरफ्त में आई कथित फर्जी IAS तृप्ति
सिंह मामले की जांच में एक और अहम खुलासा हुआ है। ठगी के मायाजाल की मास्टर माइंड तृप्ति ने खुद को कभी ट्रेनी आईएएस बता कर लोगों को सरकारी नौकरी लगाने का झाँसा दिया कभी भोपाल स्थित प्रशासनिक अकादमी में पदस्थ बता कर रौब झाड़ा। जब नौकरी नहीं लगा सकी तो लोगों ने पैसा मांगने के लिए दबाव बनाया तृप्ति ने घबरा कर सुसाइड करने का प्रयास किया और हाथ की नस काट ली।
लेकिन समय पर ईलाज हो जाने से वह बच गई।
भोपाल के बागसेवनिया थाने में हिरासत में मौजूद फर्जी IAS तृप्ति सिंह ये पुलिस पूछताछ कर रही है। बात चीत में ठगोरी तृप्ति को लेकर कई खुलासे हो रहे हैं। भोपाल से बीटेक करने के बाद उसने यह काम शुरू किया। जब उससे पूछा गया की तुम फर्जी IAS बनकर क्यों ठगी करती थी ? तो उसने बताया प्रेम विवाह किया खुद गरीब परिवार से थी ससुराल समृद्ध है। वहां उसे सम्मान नहीं मिलने से उसने फर्जी आईएएस अफसर बनकर खुद का स्तर उंचा उठाने की कोशिश की। इसके लिए उसने भारत सरकार लिखी सफेद इनोवा कार
और ड्राइवर लेकर घूमना शुरू कर दिया।
शुरूवात में कुछ लोगों को नौकरी लगाने का झाँसा दिया वह झाँसे में आ गए और पैसा मिल गया तो वह इस काम को आसान काम समझ कर शिकार तलाशने लगी।
इस काम में उसका छोटा भाई सुधांशु भी पैसों के लालच में शामिल हो गया दोनो भाई बहन मिलकर ठगी की वारदात को अंजाम देने लगे। “बाग सेवनिया पुलिस के मुताबिक- इसके बाद उसने इस पहचान का इस्तेमाल ठगी के लिए करना शुरू कर दिया। तृप्ति और उसका भाई ऐसे लोगों की तलाश करते थे, जिन्हें सरकारी नौकरी की जरूरत थी।”
शिकार तलाशने के बाद उसे विश्वास में लेकर अपने साथी प्रखर सिंह के साथ मिलकर फर्जी जॉइनिंग लेटर तैयार करते थे। यह लेटर पीड़ित को देकर उसका फोन उठाना भी बंद कर देते थे।
चंदेरी पुलिस ने प्रखर को लखनऊ से गिरफ्तार कर उसका लैपटॉप जब्त किया है। पूछताछ के बाद उसे जेल भेज दिया गया था। पुलिस को अनुमान है कि प्रखर के लैपटॉप और दूसरे डिजिटल डिवाइस की जांच से फर्जी दस्तावेज तैयार करने के तरीके और इससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी मिल सकती है। इधर, आरोपी भाई-बहन तृप्ति और सुधांशु को 3 सितंबर को भोपाल की बाग सेवनिया पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट पर लाई है। दोनों 7 सितंबर तक रिमांड पर हैं।”