शिक्षक दिवस पर बच्चों के बीच पहुंचे मोदी को पंडित नेहरू याद आ रहे होंगे… कौशल किशोर चतुर्वेदी

शिक्षक दिवस पर बच्चों के बीच पहुंचे मोदी को पंडित नेहरू याद आ रहे होंगे…
शिक्षक दिवस से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों से कहा कि वे सिर्फ किताबों तक सीमित न रहें बल्कि बच्चों के जीवन को भी समझें। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को हर बच्चे की खूबियों को पहचानना चाहिए, बच्चों का स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताना कम करना चाहिए और समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए।
और शिक्षक दिवस पर ही प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली मेट्रो में सफर किया। वह बच्चों पर प्यार लुटाते, उन्हें समझाते और बातचीत करते नजर आए। दिल्ली मेट्रो में सफर करने वाले लोगों को सुखद आश्चर्य हुआ, जब उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने बीच ट्रेन में यात्रा करते हुए देखा। इस दौरान उन्होंने ट्रेन में यात्रा कर रहे लोगों खासकर बच्चों और महिलाओं से बातचीत भी की। इस यात्रा के जो वीडियो सामने आए हैं, उसमें मेट्रो में प्रधानमंत्री मोदी के आसपास बहुत से बच्चे बैठे हुए नजर आ रहे हैं और वह उनसे बात करते और उन्हें कुछ समझाते दिख रहे हैं। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली मेट्रो की यह यात्रा उस वक्त की जब वो डीयू के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। बात बात बस इतनी सी है कि शिक्षक दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी तरह से बच्चों के साथ रहे, बच्चों से बात की और बच्चों को लेकर शिक्षकों को भी नसीहत दी। वैसे तो यह सब बहुत आम था लेकिन जेन-ज़ी के प्रदर्शन के बाद मोदी के बच्चों के प्रति इस प्रेम को कुछ अलग नजरिए से भी देखा जा रहा है। जेन-ज़ी के बाद अब जेन अल्फा भी देश के अलग-अलग हिस्सों में मुखर होते नजर आ रहे हैं और अपनी बात भी मनवा रहे हैं। अपनी बात तार्किकता के साथ प्रशासन और जिम्मेदारों के सामने रख रहे हैं। मोदी तो जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान ही जेन-ज़ी स्टाइल में संवाद करने लगे थे। तो जेन-ज़ी को गंभीरता से लेकर उनके प्रति एक अलग रणनीति पर भी काम कर रहे हैं। शिक्षक दिवस पर बच्चों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यवहार को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
बात जब बच्चों की आती है तो देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू सभी को याद आ जाते हैं। वैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दल के नेता देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू पर निशाना साधने में पीछे नहीं रहते हैं, लेकिन बात जब बच्चों की आएगी तब पंडित नेहरू हमेशा ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चार कदम आगे खड़े नजर आएंगे।
पंडित जवाहरलाल नेहरू बच्चों से अगाध प्रेम करते थे, जिसके कारण बच्चे उन्हें प्यार से “चाचा नेहरू” बुलाते थे। नेहरू जी का मानना था कि बच्चे देश का भविष्य और बगीचे की कलियों जैसे होते हैं। बच्चों के प्रति उनके इसी अपार प्रेम के कारण हर साल 14 नवंबर को उनके जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनका विचार था कि बच्चों को डर और दबाव के बजाय प्यार, विश्वास और अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए। वे व्यस्तता के बावजूद बच्चों के साथ खेलते, हंसते और उनके बीच अपनी पद-प्रतिष्ठा भूल जाते थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षकों से कहा कि वे केवल किताबों और तय पाठ्यक्रम तक सीमित न रहें बल्कि अपने छात्रों की जिंदगी, उनकी रुचियों और परेशानियों को भी समझने की कोशिश करें। शिक्षक दिवस से पहले लोक कल्याण मार्ग स्थित 7 नंबर पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षा केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं है। शिक्षकों को बच्चों को बेहतर तरीके से समझना चाहिए और उनके रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी समस्याओं से निपटने में उनकी मदद करनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान कहा कि हमें किताबों से बाहर निकलना होगा, हमें पाठ्यक्रम से बाहर निकलना होगा। हमें बच्चों के जीवन में प्रवेश करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह सुनिश्चित करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है कि बच्चे बचपन से जुड़ी जिज्ञासा, रचनात्मकता और खुलेपन को खोएं। प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम की समस्या पर चिंता जताई। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों को खेलकूद, शारीरिक और रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करने को कहा ताकि वे मोबाइल और दूसरे डिजिटल उपकरणों पर कम समय बिताएं। उन्होंने कहा कि बच्चों को ऐसी गतिविधियों में शामिल करना जरूरी है, जिससे उनका आत्मविश्वास और सामाजिक स्किल बेहतर हो।
निश्चित तौर से मोदी के द्वारा शिक्षक दिवस पर बच्चों के साथ संवाद को सामान्य रूप से देखा जाना चाहिए। लेकिन जेन-ज़ी के परिणामदायी प्रदर्शन के बाद बच्चों के आस-पास मोदी का होना कहीं न कहीं बच्चों को समझने और समझाने के लिए बेहतर संवाद जैसा ही महसूस हो रहा है। और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बच्चों के प्रति प्रेम के प्रकटीकरण में भी यह बात समझ में आ ही रही है। और यह भी सच के करीब ही है कि वैसे भाजपा और एनडीए देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू पर कैसी भी टिप्पणी करें।लेकिन शिक्षक दिवस पर बच्चों के बीच पहुंचे मोदी को पंडित नेहरू याद आ रहे होंगे…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।

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