Zomato से खाना मंगवाना हुआ महंगा! ₹14.99 प्लेटफॉर्म फीस के बाद Cash on Delivery पर ₹5 से ₹20 तक ‘Pay on Delivery Fee’, ऑनलाइन पेमेंट करने वालों को राहत

फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो से खाना ऑर्डर करना अब महंगा हो गया है। अब आप जोमैटो से खाना ऑर्डर करते समय ‘कैश ऑन डिलीवरी’ यानी डिलीवरी के वक्त नकद भुगतान का ऑप्शन चुनते हैं, तो आपको 5 रुपए ज्यादा देने होंगे।

यह नया शुल्क एप के बिल समरी में ‘पे ऑन डिलीवरी फीस’ के नाम से अलग से जुड़ेगा। कुछ यूजर्स के एप बिल में यह फीस 7 रुपए से लेकर 20 रुपए तक अलग-अलग भी दिखाई दे रही है।हालांकि, जो यूजर UPI, क्रेडिट/डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग जैसे डिजिटल माध्यमों से ऑनलाइन भुगतान करेंगे, उन पर यह एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेगा।

प्लेटफॉर्म फीस और पैकिंग चार्ज के अलावा नया शुल्क लगेगा

जोमैटो की ओर से लगाया गया यह नया ‘पे ऑन डिलीवरी फीस’ कंपनी के प्लेटफॉर्म फीस, रेस्टोरेंट पैकेजिंग चार्ज, डिलीवरी चार्ज और GST से अलग है।यानी अब आपको खाने के साथ-साथ पैकेजिंग, डिलीवरी, प्लेटफॉर्म और कैश में भुगतान करने तक के अलग से पैसे देने होंगे। हालांकि, स्विगी ने फिलहाल ऐसा कोई चार्ज लागू नहीं किया है।

छोटे शुल्क से कंपनी को करोड़ों रुपए का फायदा

जोमैटो पर हर दिन करीब 23 से 25 लाख ऑर्डर किए जाते हैं। अगर सिर्फ 5 रुपए का छोटा सा एक्स्ट्रा चार्ज भी लगाया जाए, तो कंपनी को हर दिन 1.25 करोड़ रुपए तक की ज्यादा कमाई हो सकती है।भले ही सभी ग्राहक कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प न चुनें, फिर भी इस फैसले से जोमैटो का मुनाफा सालाना सैकड़ों करोड़ रुपए बढ़ जाएगा।

₹2 से शुरू हुई प्लेटफॉर्म फीस ₹14.99 तक पहुंची

फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स की ओर से ऑर्डर पर अलग-अलग शुल्क जोड़ने का सिलसिला नया नहीं है। अप्रैल 2023 में जोमैटो और स्विगी ने सिर्फ ₹2 प्लेटफॉर्म फीस से शुरुआत की थी, जो अब बढ़कर ₹14.99 प्रति ऑर्डर (प्लस 18% GST) हो चुकी है।दिखने में यह ₹2 से ₹15 का चार्ज छोटा लगता है, लेकिन ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी कंपनियां इन छोटे चार्जेस से ही सालाना ₹3,500 से ₹4,000 करोड़ की मोटी कमाई कर लेती हैं।

फूड डिलीवरी मार्केट में कॉम्प्टिशन बढ़ा

जोमैटो का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब देश के क्विक-कॉमर्स और फूड-डिलीवरी सेक्टर में मुकाबला काफी तेज हो गया है। रैपिडो का ‘ओनली’ प्लेटफॉर्म और फ्लिपकार्ट का नया ‘ईट इन’ सर्विस इस मार्केट में कदम रख रहे हैं।इसके अलावा स्विश जैसी नई स्टार्टअप कंपनियों ने भी हाल ही में नई फंडिंग हासिल की है, जिससे जोमैटो और स्विगी जैसी स्थापित कंपनियों पर अपनी प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ाने का दबाव और बढ़ गया है।

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