15 सितंबर को ₹2 हजार से ज्यादा के UPI पेमेंट पर 0.4% MDR लगाने की घोषणा हुई। पूरे देश में व्यापारी इसका विरोध करने लगे। आज 23 सितंबर को मध्य प्रदेश के कई बाजारों में व्यापारी UPI स्कैनर पर काला कपड़ा बांधकर ‘नो-UPI डे’ मना रहे हैं।
सवाल 1: आज बाजार जाएंगे तो UPI से पेमेंट कर पाएंगे या नहीं?
जवाब- यह कोई सरकारी आदेश नहीं है, व्यापारिक संगठनों का सांकेतिक विरोध है।यानी हर दुकान पर UPI बंद रहेगा, यह जरूरी नहीं- जिन दुकानदारों ने इस अभियान में शामिल होने का फैसला किया है, वहीं आज UPI से मना किया जा सकता है।भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर और सागर समेत कई शहरों के व्यापारिक संगठन इसमें शामिल हैं। इंदौर में अकेले 100 से ज्यादा संगठन इसके समर्थन में हैं, और यहां रिटेल
गारमेंट्स एसोसिएशन ने पोस्टर अभियान भी शुरू किया है, अगले चार दिन में 10 लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य लेकर।काला कपड़ा लगाने का मतलब है, दुकानदार QR स्कैनर ढककर बता रहे हैं कि आज UPI नहीं ले रहे। कुछ जगह यह पूरे दिन के लिए है, कुछ जगह सिर्फ प्रतीकात्मक- इसलिए खरीदारी से पहले दुकानदार से पूछ लेना बेहतर रहेगा।
सवाल 2: आज UPI नहीं चला तो ₹2,000 से ज्यादा की खरीदारी कैसे करेंगे?
जवाब- कैश, डेबिट-क्रेडिट कार्ड या दुकान पर मौजूद कोई और माध्यम इस्तेमाल किया जा सकता है।मान लीजिए आपको आज ₹5,000 की किराना या कपड़ों की खरीदारी करनी है और दुकानदार UPI नहीं ले रहा। ऐसे में पेमेंट के लिए कैश, डेबिट या क्रेडिट कार्ड और दुकान पर उपलब्ध किसी दूसरे पेमेंट माध्यम का इस्तेमाल किया जा सकता है।
नो-UPI डे का मतलब नो-डिजिटल-पेमेंट डे नहीं है, कार्ड या दूसरे माध्यम चल सकते हैं। खैर, UPI बंद रखने वाले दुकानदार के यहां कार्ड या कोई दूसरा पेमेंट माध्यम चलेगा या नहीं, यह संबंधित दुकान पर निर्भर करेगा।
इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन का कहना है कि, अभियान UPI के खिलाफ बिल्कुल नहीं है… छोटे खुदरा दुकानदारों को ज्यादा नुकसान होगा, इसलिए हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
अगर कैश निकालना पड़े तो ATM का शुल्क भी लग सकता है…
RBI के मुताबिक, अपने बैंक के ATM से महीने में कम से कम 5 बार पैसे निकालना मुफ्त है। दूसरे बैंक के ATM पर बड़े शहरों में 3 और छोटे शहरों में 5 बार तक पैसे निकालना मुफ्त है। इसके बाद हर निकासी पर अधिकतम ₹23 और उस पर लागू टैक्स लिया जा सकता है। इसलिए अगर UPI की जगह ज्यादा कैश निकालना पड़े और मुफ्त निकासी की सीमा पार हो जाए, तो ATM का शुल्क भी देना पड़ सकता है।
सवाल 3: अगर आज UPI की जगह कैश चला तो प्रदेश में इसका क्या असर पड़ेगा?
जवाब- यह इस पर निर्भर करेगा कि UPI की कितनी खरीदारी आज कैश में बदलती है।पूरा कारोबार कैश में शिफ्ट नहीं होगा, लेकिन बड़ी रकम का कुछ हिस्सा भी उधर गया तो नकदी की मांग बढ़ सकती है।मध्य प्रदेश में हर महीने करीब ₹63,628 करोड़ का UPI लेनदेन होता है। वहीं RBI के अप्रैल 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के 170 करेंसी चेस्ट (बैंकों के नकदी केंद्र) से करीब ₹22,012 करोड़ कैश निकला था, यानी औसतन रोज करीब ₹733 करोड़। दोनों आंकड़े एक ही चीज नहीं हैं, फिर भी इससे डिजिटल और कैश सिस्टम के पैमाने का अंदाजा मिलता है। अगर NO-UPI डे में बड़ी खरीदारी का हिस्सा कैश की तरफ खिसका, तो इसका दबाव ATM और बैंक शाखाओं पर पड़ सकता है।
हालांकि यह असर हर जगह बराबर नहीं होगा। सरकार के मुताबिक करीब 96% P2M (Person-to-Merchant, यानी ग्राहक से दुकानदार को होने वाला भुगतान) UPI लेनदेन ₹2,000 से कम के हैं, इसलिए नए MDR का असर मुख्य रूप से बड़े व्यापारी भुगतानों पर पड़ेगा। यानी चाय-नाश्ते या छोटी किराना खरीदारी जैसे छोटे भुगतान इस बदलाव से सीधे प्रभावित नहीं होंगे।

सवाल 4: क्या दुकानदार ग्राहक से MDR के नाम पर अलग से पैसा मांग सकता है?
जवाब- नहीं। MDR दुकानदार की अपनी लागत है, ग्राहक से अलग से वसूलने वाला चार्ज नहीं।₹5,000 का सामान UPI से खरीदा तो ₹5,000 ही देने होंगे, बिल में अलग से ‘UPI चार्ज’ नहीं जोड़ा जा सकता।
लेकिन व्यापारियों का कहना है कि व्यवहार में यह उतना आसान नहीं। थोक किराना कारोबारी विवेक साहू के मुताबिक- कई कारोबार में मार्जिन 1% भी नहीं है- अगर दिन में 10 बड़े पेमेंट आए, तो ₹300 प्रति ट्रांजेक्शन के हिसाब से ₹3,000 तक का बोझ अकेले एक दुकान पर आ सकता है।
ऐसे में असली असर यह हो सकता है कि दुकानदार पैसा सीधे न मांगकर UPI लेना ही बंद कर दे, या सामान का दाम थोड़ा बढ़ा दे। अगर फिर भी कोई दुकानदार सीधे अतिरिक्त पैसा मांगे, तो इसकी शिकायत अपने बैंक या पेमेंट ऐप में दर्ज कराई जा सकती है।
सवाल 5: नो-UPI डे के बाद क्या बदलेगा, या यह सिर्फ एक दिन का विरोध है?
जवाब- आज का विरोध एक दिन का सांकेतिक कदम है, लेकिन इसका असर आगे भी बढ़ सकता है।जहां ज्यादातर बिल ₹2,000 से ऊपर के बनते हैं, वहां असर ज्यादा होगा। भोपाल के थोक किराना बाजार में 90% से ज्यादा और सर्राफा कारोबार में 95% से ज्यादा लेनदेन ₹2,000 से ऊपर के हैं। ऑटोमोबाइल में तो लगभग हर बुकिंग इसके दायरे में आएगी- भोपाल में हर महीने करीब 2,800 फोर-व्हीलर बिकते हैं, बुकिंग ₹25 हजार से ₹1 लाख के बीच होती है, यानी हर बुकिंग पर MDR लगना तय है।
पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, ₹2,000 से ऊपर के हर UPI पेमेंट पर MDR और GST मिलाकर करीब ₹5.90 प्रति ट्रांजेक्शन खर्च आएगा। एक पंप पर औसतन रोज ऐसे 100 ट्रांजेक्शन होते हैं, यानी महीने में करीब ₹17,400 प्रति पंप, और प्रदेश के सभी 4,700 पंपों पर यह रकम करीब ₹8.17 करोड़ महीना बैठती है। एसोसिएशन का कहना है कि, अगर MDR वापस नहीं लिया गया, तो 16 अक्टूबर से सभी पंपों पर ₹2,000 से ज्यादा का UPI पेमेंट पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।
इंदौर-भोपाल के आंकड़ों से पूरी तस्वीर समझें तो दोनों शहर मिलाकर हर महीने करीब ₹17,963 करोड़ का UPI कारोबार करते हैं। इसमें से करीब ₹3,591 करोड़ ₹2,000 से ऊपर के भुगतान का माना जाता है, जिस पर 0.4% की दर से एक मोटे अनुमान के मुताबिक करीब ₹14.4 करोड़ महीने का चार्ज बन सकता है (यह राष्ट्रीय अनुपात के आधार पर निकाला गया अनुमान है, आधिकारिक आंकड़ा नहीं)।
