
‘ताप’ से निजात दे तालाबों के शहर को ठंडक देगा ‘मास्टर प्लान’…
भरी बरसात में तालाबों का शहर भोपाल तप रहा था। वजह यही थी कि सुप्रीम कोर्ट ने रहवासी क्षेत्रों में कॉमर्शियल गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। और नगर निगम को कार्रवाई करने पर मजबूर कर दिया था। दुकानों को सील कर दिया गया है और व्यावसायिक गतिविधियां ठप पड़ने से व्यापारी तनाव में हैं। चाहते हुए भी सरकार उन्हें बस इतनी सी राहत मुहैया करा पा रही है कि नोटिस लगने के बाद भी कुछ जगह अवैध रूप से व्यापार चल रहा है। लेकिन यह भी चुनिंदा लोगों को राहत मिली है। बाकी हजारों व्यापारिक संस्थान ठप पड़े हैं। और बार-बार यही वजह सामने आ रही थी कि पिछले बीस साल में मास्टर प्लान का कुछ अता-पता ही नहीं है। वरना गुजरात की तरह मध्यप्रदेश में भी व्यापारियों को ऐसी समस्या से जूझना नहीं पड़ता। और अंततः सरकार को मास्टर प्लान के रास्ते ही समाधान की राह पर जाना पड़ा। भोपाल के मास्टर प्लान की अधिसूचना पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर 25 सितंबर 2026 को जारी कर दी गई है। और लग रहा है कि इस बार सरकार 2047 में इसी मास्टर प्लान के जरिए आत्मनिर्भर भोपाल और विकसित मध्यप्रदेश बनाकर ही रहेगी।
राजधानी भोपाल के सुनियोजित और संतुलित विकास के लिए भोपाल विकास योजना 2047 मास्टर प्लान का प्रारूप तैयार है। योजना में करीब 1,016.90 वर्ग किलोमीटर के निवेश क्षेत्र को शामिल किया गया है, जिसमें 254 गांव सम्मिलित हैं। यह योजना लगभग 45 लाख की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। प्रस्तावित योजना में कुल 61,017.02 हेक्टेयर क्षेत्र को विकास योग्य क्षेत्र के रूप में निर्धारित किया गया है।
शहर की प्राकृतिक संवेदनशीलता को प्रमुख आधार बनाया गया है। योजना में भोजताल (बड़ी झील) और उसके जलग्रहण क्षेत्र, पहाड़ियों, वन क्षेत्रों, तालाबों और जलाशयों तथा बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण के प्रावधान किए गए हैं।
योजना को चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित किया गया है—प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण, आधुनिक एवं नागरिक हितैषी नियोजन, सुधारोन्मुख एवं परिवर्तनकारी नियोजन तथा आत्मनिर्भर और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाला विकास। भोपाल में निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए करीब 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है। यह कॉरिडोर एजुकेशन नॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एकाई) सिटी, एयरपोर्ट, प्रस्तावित सीएमयू, लॉजिस्टिक भंडारण एवं थोक परिसर सहित विभिन्न उपनगरों को जोड़ने का प्रस्ताव रखता है।
ग्रोथ कॉरिडोर में मिश्रित भू-उपयोग के साथ उच्च घनत्व वाले विकास की परिकल्पना की गई है। इसमें होटल एवं हॉस्पिटैलिटी, स्वास्थ्य सेवाएं, व्यापार, आईटी सेक्टर, एआई एवं डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, थोक व्यापार, हाइपर मार्केट, मॉल-मल्टीप्लेक्स, कॉरपोरेट ऑफिस और आवास जैसी गतिविधियों को विकसित किया जा सकेगा।बायपास के दोनों ओर 50-50 मीटर हरित क्षेत्र, ग्रीन एरिया बढ़ाकर 27 प्रतिशत करना, भानपुर खंती के पुनर्विकास के लिए यहां गोल्फ कोर्स का प्रस्ताव और कॉलोनी स्तर पर खुले क्षेत्र को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। आवासीय विकास के साथ अफोर्डेबल और रेंटल हाउसिंग पर जोर दिया गया है। डिजिटल ट्विन सिटी और स्मार्ट सुरक्षा व्यवस्था का प्रावधान है। एकाई से शिक्षा और एआई आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की बात है।
कुल मिलाकर लंबे समय से प्रतीक्षित भोपाल के मास्टर प्लान को उदार और लचीलेपन के साथ तैयार किया गया है जिसमें यही संदेश मिल रहा है कि मास्टर प्लान लागू होने के बाद भोपाल क्षेत्र में सभी व्यवस्थाएं आदर्श रूप में आकार लेंगी। 8 उपनगरों में सभी आत्मनिर्भर आर्थिक संसाधनों से संपन्न होंगे। निवेश की बहुत खूबसूरत तस्वीर सामने होगी। सड़कें, यातायात व्यवस्था, विद्युत व्यवस्था, 18 तालाबों की सभी व्यवस्थाएं मानो आदर्श रूप ले लेंगी। मास्टर प्लान लागू होने के बाद क्या बदलाव आता है, वह बाद की बात है। लेकिन फिलहाल तो यह अच्छा ही है कि ‘मास्टर प्लान’ सुप्रीम कोर्ट के ‘ताप’ से निजात दे तालाबों के शहर को ठंडक दे ही देगा…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।