
‘शाही संदेश’ देगी ‘महाकाल’ की नगरी की ‘शाही मस्जिद’…
मध्य प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव ने सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए महाकाल की नगरी में हो रहे विकास के कंधे से कंधा मिलाकर खुद अपने पैतृक निवास पर गेती चलाकर तोड़ने की शुरुआत की थी। उन्होंने भावुक होते हुए संदेश दिया था कि जब बात विकास की है तो उज्जैन में सभी नागरिक और विकास मार्ग में पड़ने वाले सभी धार्मिक स्थल मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा स्वेच्छा से अपने निर्माण को तोड़कर विकास की मुख्यधारा में अपना सहयोग दे रहे हैं। ऐसे में उज्जैन स्थित 650 साल पुरानी शाही मस्जिद भी अब अग्नि परीक्षा के दौर से गुजर रही है। तमाम कोशिशों के बाद भी यह तय हो गया है कि शाही मस्जिद का थोड़ा हिस्सा तोड़ना ही पड़ेगा। अफवाहों के बीच महाकाल की नगरी में सोमवार 28 सितंबर 2026 को दिन का पारा हाई रहा। झड़प के दौरान पथराव और मारपीट की स्थिति बन गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे।
उज्जैन के कलेक्टर रौशन सिंह ने कहा, “सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए मास्टर प्लान के मुताबिक़ सड़कों के चौड़ीकरण और दूसरे निर्माण कार्य चल रहे हैं। सभी धर्म और समुदाय के लोग अपनी इच्छा से इसमें सहयोग कर रहे हैं।”
“कई लोग सड़क की जद में आ रहे अपने मकान या धार्मिक स्थल खुद हटा रहे हैं। छतरी चौक में सड़क की जद में आ रहा शाही मस्जिद का हिस्सा भी मुस्लिम समाज के लोग स्वयं हटा रहे हैं। मैं सभी से अपील करता हूं कि किसी भी अफ़वाह में न आएं और शांति व्यवस्था बनाए रखने में शासन का सहयोग करें।”
उज्जैन के शहर क़ाज़ी खलीक उर रहमान ने बताया, “मस्जिद कमेटी और जिला प्रशासन के बीच 27 सितंबर 2026 रात हुई बातचीत के बाद कमेटी ने उस हिस्से को खुद हटाने का फैसला किया है। कुछ लोग अफ़वाहों की वजह से गुस्से में हैं। इस वजह से थोड़ी झड़प भी हुई, लेकिन अभी स्थिति सामान्य है।”
कानून-व्यवस्था बनाए ऑऑको भी मौके पर तैनात किया गया है। वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर ओमौजूद हैं।
मस्जिद का जो हिस्सा हटाया जाना है, वह उस सड़क के प्रस्तावित अलाइनमेंट में आ रहा है जिसे उज्जैन नगर निगम 15 मीटर तक चौड़ा करना चाहता है।
प्रशासन इसे सिंहस्थ के दौरान बढ़ने वाले यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए ज़रूरी बता रहा है।
28 सितंबर सुबह तनाव के बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया। मस्जिद कमेटी की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अज़हर वारसी ने बताया कि इससे पहले 9 सितंबर को सिंगल बेंच ने याचिका पर आदेश जारी किया था।
उन्होंने बताया, “उस आदेश में मास्टर प्लान के अनुरूप कार्रवाई और उसके पालन की बात कही गई थी। इसके बाद कमेटी की ओर से डिवीजन बेंच में रिट अपील दायर की गई।” सुनवाई के दौरान वैकल्पिक मार्ग तलाशने का सुझाव भी अदालत के सामने रखा गया।
वारसी के अनुसार, “प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच हुई चर्चा में मस्जिद के करीब तीन फीट हिस्से को यथावत रखने का मुद्दा भी उठाया गया था। वहीं नगर निगम ने अपने शपथ पत्र में कहा था कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान लिए जाने वाले हिस्से के बदले नियमानुसार एफ़एआर और टीडीआर का लाभ दिया जाएगा।” डिवीजन बेंच ने निगम को उसके शपथ पत्र में दी गई शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट के आदेश के बाद उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई आगे जारी है। नगर निगम का कहना है कि सिंहस्थ 2028 के दौरान उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आएंगे इसलिए सड़कें चौड़ी की जा रही हैं। उज्जैन नगर निगम के मुताबिक, सड़क चौड़ीकरण का काम उज्जैन विकास योजना 2035 के तहत किया जा रहा है। और शाही मस्जिद भी सड़क के उसी हिस्से में मौजूद है, जिसे 15 मीटर तक चौड़ा करने की योजना है। मस्जिद का एक हिस्सा इस प्रस्तावित सड़क की जद में आ रहा है।
क़ाज़ी खलीक उर रहमान ने कहा कि मुस्लिम समुदाय सिंहस्थ का विरोध नहीं करता। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “सिंहस्थ पहले भी हुआ था आगे भी होगा। मुस्लिम समुदाय हमेशा उसका पक्षधर रहा है। हम बस ये कह रहे हैं कि वैकल्पिक व्यवस्था तलाशी जाए और किसी भी धार्मिक स्थल को न तोड़ा जाए। क्योंकि इनमें से कई तो हिस्टोरिकल मॉन्यूमेंट्स हैं। अब शाही मस्जिद को ही ले लीजिए, यह लगभग 650 साल पुरानी है।” तो मस्जिद कमेटी के सदस्य फहीम सिकंदर ने बताया कि शहर काजी और कमेटी के पदाधिकारियों की प्रशासन से बातचीत के बाद शांतिपूर्वक काम शुरू करने पर सहमति बनी। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज सड़क चौड़ीकरण का सम्मान करता है और प्रभावित हिस्से को स्वेच्छा से हटाने में सहयोग कर रहा है। मस्जिद कमेटी की कोशिश थी कि धार्मिक स्थल को यथासंभव सुरक्षित रखा जाए, लेकिन आपसी सहमति नहीं बनने के बाद चौड़ीकरण की जद में आ रहे हिस्से को हटाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि काम पूरा होने में सात-आठ दिन लग सकते हैं। आवश्यकता के अनुसार मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा।
अब चाहे मन से स्वीकार हो या फिर प्रशासन का दबाव हो, लेकिन यह तय हो गया है कि विकास के लिए मस्जिद भी सहयोग करेगी और दूसरे धार्मिक स्थल भी पूरा सहयोग करेंगे। यह महाकाल का उज्जैन है तो सूबे के मुखिया डॉ. मोहन यादव का उज्जैन है। यह महाराजा विक्रमादित्य का उज्जैन है तो महाकवि कालिदास का उज्जैन है। निश्चित तौर से यहाँ न मंदिर निराश करेंगे और न ही शाही मस्जिद। ‘महाकाल’ की नगरी की ‘शाही मस्जिद’ भी ‘शाही सन्देश’ देने को तैयार है…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।