
तेंदुआ मास्टर प्लान में सुधार की चेतावनी देने आया था…
भोपाल मास्टर प्लान 2047 का ड्राफ्ट जारी होने के बाद से पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों द्वारा बाघों और वन्यजीवों के मूवमेंट वाले प्राकृतिक क्षेत्रों से सड़कें निकाले जाने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया जा रहा है। विशेषज्ञों का दावा है कि नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में बाघों के मुख्य मूवमेंट एरिया जैसे कालियासोत, केरवा, चौकड़ी और मेंडोरी के वन क्षेत्रों से 18, 24 और 60 मीटर चौड़ी सड़कें निकालने का प्रावधान किया गया है। पर्यावरणविदों का मानना है कि इन घने और संरक्षित वन क्षेत्रों में भारी वाहनों और सड़कों के जाल से वन्यजीवों का प्राकृतिक कॉरिडोर बाधित होगा। इससे शहर के नजदीकी इलाकों में ‘मानव-बाघ संघर्ष’ का खतरा काफी बढ़ सकता है। एक तरफ मास्टर प्लान में हरित क्षेत्र को 16% से बढ़ाकर 27% करने और बाघ भ्रमण क्षेत्रों के संरक्षण की बात कही गई है, वहीं दूसरी तरफ उन्हीं क्षेत्रों से सड़कें निकालने के प्रस्ताव को विशेषज्ञ एक बड़ा विरोधाभास मान रहे हैं।पर्यावरण प्रेमी और स्थानीय नागरिक इस बिंदु पर औपचारिक रूप से अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं ताकि अंतिम योजना में इन सड़कों के प्रस्ताव को बदला या हटाया जा सके।
यह तो हुई मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में प्रावधानों की बात तो दूसरी तरफ पहली बार शहर तक तेंदुआ के पहुंचने की खबर काफी चर्चा में है। राजधानी भोपाल के शहरी इलाके में पहली बार तेंदुए की मौजूदगी से कटारा हिल्स क्षेत्र में दहशत का माहौल है। वार्ड नंबर 55 के लाहरपुर स्थित इकोलॉजिकल पार्क के आसपास जंगल में तेंदुए का मूवमेंट सामने आने के बाद वन विभाग की टीमें 20-25 किमी के दायरे में सर्चिंग कर रही हैं। रात में उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 10 से 12 स्थानों पर ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। लोगों की सुरक्षा को देखते हुए इकोलॉजिकल पार्क में मॉर्निंग और इवनिंग वॉक पर रोक लगा दी गई है। आसपास के रहवासी क्षेत्रों में भी अलर्ट जारी किया गया है। वन विभाग की टीमें ग्रामीणों के साथ अलग-अलग हिस्सों में सर्चिंग कर रही हैं। गांवों में मुनादी कराकर लोगों को रात के समय विशेष सावधानी बरतने और तेंदुआ दिखाई देने पर उसके करीब नहीं जाने की हिदायत दी जा रही है। तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि पिछले ही दिनों शहर में टाइगर के होने की सूचना मिली थी। और यह कोई पहली बार नहीं है। यह माना जाता है कि भोपाल के आस-पास के वन्य क्षेत्र में मानव आबादी के अतिक्रमण ने बाघों के क्षेत्र को बाधित कर दिया है। ऐसी स्थिति में दर्जनों बार टाइगर शहरी क्षेत्र में भ्रमण करता नजर आया है। और हाल ही में तेंदुए की शहर में एंट्री। क्या यही बताने के लिए हुई है कि मास्टर प्लान का अभी केवल ड्राफ्ट तैयार हुआ है। और अगर इस ड्राफ्ट में सड़कें बनाकर टाइगर और वन्यजीवों के क्षेत्र में स्थायी आधिपत्य जमाने की कोशिश की गई तो भविष्य के लिए यह ठीक नहीं रहेगा। कभी निर्दोष मानव अपनी जान गंवाएंगे तो कभी निर्दोष टाइगर और तेंदुए बेवजह ही मारे जाएंगे। शायद तेंदुआ शहर में आकर मास्टर प्लान के ड्राफ्ट के इस पहलू पर ध्यान आकर्षित कराने ही आया होगा।
तेंदुए के मूवमेंट की जानकारी के बाद दो दिनों से लोगों में डर बना हुआ है। लोग रात में घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। गौरतलब है कि शहर से सटे केरवा,कलियासोत, मेंडोरा,13 शटर और दानिश पहाड़ी क्षेत्र में पहले से बाघ-बाघिन की गतिविधियां सामने आती रही हैं। यहां बाघिन के साथ शावकों को भी देखा जा चुका है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार इन क्षेत्रों में वन विभाग ट्रैप कैमरों के जरिए वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखता है और कैमरों से मिले मूवमेंट के आधार पर गश्ती दल निगरानी करता है। और खासतौर पर इसीलिए भोपाल मास्टर प्लान में बाघों (टाइगर) और अन्य वन्यजीवों के मूवमेंट वाले प्राकृतिक क्षेत्रों से सड़कें निकाले जाने के प्रस्ताव का विरोध किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पहले 21 साल बाद सुगम बस के रूप में सरकारी बस सेवा प्रारम्भ हुई। अब 21 साल बाद भोपाल के मास्टर प्लान का ड्रॉफ्ट जारी किया गया। यह मास्टर प्लान भोपाल को वर्ष 2047 में विकसित और हरित बनाने में मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों से मास्टर प्लान के प्रारूप पर अपने दावे-आपत्ति और सुझाव देने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की बात को गंभीरता से लेकर सभी सजग भोपालवासियों को मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर अपनी आपत्ति और सुझाव समय सीमा में दर्ज कराना चाहिए। ताकि तेंदुआ और टाइगर के साम्राज्य में दखल देने वाले प्रावधानों से बचा जा सके और तेंदुए की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए मास्टर प्लान के अंतिम प्रारूप में आवश्यक बदलाव किया जा सके। वास्तव में तेंदुआ मास्टर प्लान में सुधार की चेतावनी देने आया था… ताकि भविष्य के टकराव को टाला जा सके।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।