सिंहस्थ से पहले उज्जैन में 250 करोड़ की बिजली लाइन शिफ्टिंग में घोटाला, पुराने पोल पर सिल्वर पेंट; 2 बर्खास्त, AE समेत 4 पर कार्रवाई, सस्पेंड अफसर की अगले दिन ड्यूटी पर भी सवाल

सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में बिजली लाइन शिफ्टिंग में हुए बड़े घोटाले के खुलासे से बिजली कंपनी में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी ने दो कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया, एक सहायक इंजीनियर और एक लाइनमैन को सस्पेंड कर दिया और दो कर्मचारियों का तबादला कर दिया। हालांकि, विभाग की इस कार्रवाई पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं

24 घंटे में कागजी ट्रांसफर और उज्जैन में अहम ड्यूटी

पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी, इंदौर ने 24 सितंबर को आदेश जारी कर छत्री चौक जोन के सहायक इंजीनियर (AE) रविकांत मालवीय को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया था। निलंबन अवधि के लिए उनका मुख्यालय खंडवा तय किया गया था।

चौंकाने वाली बात यह है कि आदेश के अगले ही दिन, यानी 25 सितंबर को जारी उज्जैन गणेश विसर्जन ड्यूटी लिस्ट में सस्पेंड अधिकारी का नाम शामिल था। उन्हें कंठाल से गोपाल मंदिर तक बिजली व्यवस्था संभालने जैसी अहम जिम्मेदारी दी गई।

कागजों में खंडवा भेजे गए अधिकारी का अगले ही दिन उज्जैन में ड्यूटी करना विभागीय आदेशों के पालन पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

सवाल यह है कि जब अधिकारी को सस्पेंड कर खंडवा अटैच किया जा चुका था तो 24 घंटे के भीतर उसे उज्जैन में अहम ड्यूटी किसके आदेश पर दी गई?

क्या संबंधित अधिकारियों को सस्पेंशन और अटैचमेंट की जानकारी नहीं थी या फिर अहम ड्यूटी के लिए नियमों को दरकिनार कर दिया गया?

 सवाल पर एसई बोले- पुराना आदेश निकल गया होगा

जब इस मामले में उज्जैन के अधीक्षण यंत्री (SE) विनोद मालवीय से सवाल किया गया कि सस्पेंड अधिकारी की अगले ही दिन ड्यूटी कैसे लग गई तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा- आदेश आने में समय लगता है। इसलिए उज्जैन ऑफिस से शायद पुराना आदेश ही जारी हो गया होगा।

हालांकि, 24 तारीख को जारी निलंबन आदेश के बावजूद 25 तारीख की ड्यूटी लिस्ट में नाम बने रहना विभाग की कार्यप्रणाली और तालमेल की कमी को उजागर करता है।

आरोपी की पत्नी का लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश

घोटाले में शामिल बर्खास्त कर्मचारी अरविंद कुशवाह को लेकर भी बड़ा खुलासा हुआ है। अरविंद की पत्नी के नाम पर ‘ए-क्लास’ बिजली ठेकेदार का लाइसेंस पंजीकृत था। विभाग ने अब इस लाइसेंस को रद्द करने और उनकी फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश की है।

चीफ जनरल मैनेजर प्रकाश सिंह चौहान के अनुसार, इस घोटाले में विभाग के कुछ और लोगों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है।

मामले में EE स्तर पर जांच शुरू

दैनिक भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद उज्जैन के एसई विनोद मालवीय ने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए कार्यपालन यंत्री (EE) स्तर के अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। कंपनी का कहना है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

28 सितंबर को पब्लिश पार्ट-1 पढे़…

सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में घोटाला…250 करोड़ का खेल:पुराने खंभों पर चांदी का रंग, 40 ट्रांसफॉर्मर गायब; अफसरों ने ठेकेदार बनकर की गड़बड़ी

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए 5 हजार करोड़ रुपए के विकास कार्य हो रहे हैं। इसमें बिजली लाइन शिफ्टिंग के लिए 250 करोड़ रुपए मंजूर हैं। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की निगरानी में 75 लाइनों की शिफ्टिंग चल रही है।

दैनिक भास्कर ने इनमें से 3 लाइनों की पड़ताल की तो गड़बड़ी सामने आई। जहां नए पोल लगाए जाने थे, वहां सिर्फ 20% नए पोल लगाए गए। 80% पुराने पोल को सिल्वर पेंट कर दोबारा इस्तेमाल किया गया

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