
“सौ में से अस्सी बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान”…
गमन फिल्म से फिल्मी दुनिया में पारी शुरू करने वाले नाना पाटेकर 8 अक्टूबर 2026 को परिंदा बनकर दूसरी दुनिया की तरफ उड़ गए। 75 साल 9 महीने और 7 दिन की उम्र में, नाना ने इस दुनिया से गमन कर दिया। ऐसे कुछ ही कलाकार होते हैं जो अभिनय को नहीं बल्कि अंतर्मन से हकीकत को जीते हैं और अपने अभिनय में भी हकीकत ही सबके सामने परोसते हैं। नाना पाटेकर इसके लिए खासतौर पर याद किए जाते रहे हैं और याद किए जाते रहेंगे। नाना के करियर की शुरूआत फिल्म ‘गमन’ से हुई थी लेकिन इंडस्ट्री में उन्हें फिल्म ‘परिंदा’ से नोटिस किया गया जिसमें उन्होंने खलनायक की भूमिका अदा की थी। इस फिल्म में उनके अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार भी दिया गया। इसके बाद उन्होंने कई अच्छी फिल्मों में काम किया और अपने अभिनय का लोहा मनवाया। क्रांतिवीर, खामोशी, यशवंत, अब तक छप्पन, अपहरण, वेलकम, राजनीति उनकी प्रमुख फिल्मों में से एक हैं।
जैसा कलाकार होता है उसी के मुताबिक डायलॉग्स लिखे जाते हैं। और वह डायलॉग्स कहीं ना कहीं व्यवस्था पर कुठाराघात करते हैं। और यही डायलॉग्स दर्शकों की जुबां पर हमेशा हमेशा के लिए ठहर जाते हैं। नाना पाटेकर के लिए भी यही बात लागू होती है। उनके डायलॉग्स और उनका अभिनय बस उनका ही था। उनके अलावा कोई दूसरा उनकी जगह नहीं ले सकता था। फिल्म क्रांतिवीर (1994) में नाना का डायलॉग “आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने!” अब भी यही अहसास कराता है कि नाना यहीं कहीं है और फिर यह डायलॉग बोलकर अपनी मौत को झुठला देंगे। इसी फिल्म का उनका एक और डायलॉग “कुत्ते की तरह जीने की आदत पड़ गई है सबको! ना इज्जत की फिक्र, ना गैरत की… बस दो वक्त की रोटी मिल जाए, और कोई पूछे नहीं – यही काफी है!” वास्तव में नाना के मुँह से यह डायलॉग वर्तमान समय की हकीकत को बयां करता है। फिल्म: यशवंत (1997) के डायलॉग ने तो पूरी दुनिया में धूम मचा दी थी। “एक मच्छर साला आदमी को हिजड़ा बना देता है।” यह डायलॉग कल भी सबकी जुबां पर था और आज भी सबकी जुबां पर है। और इसी फिल्म का एक और डायलॉग है “सौ में से अस्सी बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान।” यह डायलॉग, क्या आज भी हमारे कानों में यह कहता नजर नहीं आता कि कल भी यह बात सौ टका सही थी और आज भी सौ टका सही है। विडम्बना यह है कि फिल्म को हम मनोरंजन के रूप में लेकर हकीकत से भी मुंह मोड़ते नजर आते हैं। अपहरण (2005) फिल्म का यह डायलॉग सर्वकालिक है कि
“राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता।” और राजनीति (2010) फिल्म का डायलॉग भी हकीकत बयां करता है कि “राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी स्थायी नहीं होती।”
“बेहतर है तू अपना इरादा बदल दे, नहीं तो मैं तेरा नक्शा बदल दूंगा” फिल्म ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’ का यह डायलॉग नाना पाटेकर के दमदार अंदाज की झलक देता है।
‘नफरत की एक गोली प्यार के सौ गोलियों से ज्यादा खतरनाक होती है’।
यह दमदार संवाद साल 1994 में आई सुपरहिट बॉलीवुड फिल्म ‘क्रांतिवीर’ का है। इस फिल्म में मुख्य भूमिका अभिनेता नाना पाटेकर ने निभाई थी और यह डायलॉग समाज में बढ़ती नफरत और हिंसा पर कड़ा प्रहार करता है। फिल्म में नाना पाटेकर द्वारा निभाए गए किरदार ‘प्रताप नारायण तिलक’ के कई संवाद आज भी लोगों की जुबान पर हैं, जो अन्याय और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाते हैं। “ये मुसलमान का खून, ये हिंदू का खून… बता, इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा, बता!”
अपना तो उसूल है, पहले लात, फिर बात, उसके बाद मुलाक़ात। तिरंगा फिल्म के इस डायलॉग ने तो मानो पूरे देश में धूम मचा दी थी। यह बात गौरवान्वित करती है कि पाटेकर, इरफ़ान खान के साथ एकमात्र ऐसे अभिनेता हैं, जिन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता और सर्वश्रेष्ठ खलनायक की श्रेणियों में फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीते हैं।
नाना पाटेकर को जितना याद किया जाए उतना कम है। विश्वनाथ “नाना” पाटेकर (जन्म: 1 जनवरी 1951; मृत्यु: 8 अक्टूबर 2026) हिन्दी एवं मराठी फ़िल्मों के एक अभिनेता थे। वे लेखक और फिल्म निर्माता भी थे। नाना हिन्दी फिल्मों के मशहूर अभिनेता माने जाते हैं। उनके अभिनय के सभी कायल हैं और यही कारण है कि उन्हें आज तक कई बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें पद्मश्री सम्मान भी मिल चुका है। वे इंडस्ट्री में अपने डॉयलाग को बोलने की स्टाइल को लेकर काफी मशहूर थे। उनके अभिनय के दीवाने आपको हर आयु वर्ग में मिल जाएंगे।
नाना का जन्म मुरूड-जंजीरा, रायगढ़, महाराष्ट्र में हुआ था। उनके पिता का नाम दिनकर पाटेकर और मां का नाम संजनाबाई पाटेकर है। नाना की पढ़ाई सर जे जे इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाईड आर्ट, मुंबई से हुई थी। नाना पाटेकर का विवाह 1978 में नीलाकांती पाटेकर से हुआ था। दोनों लंबे समय से अलग रह रहे थे, हालांकि उनका कानूनी तलाक नहीं हुआ था। दंपति के दो बेटे थे—दुर्वासा पाटेकर और मल्हार पाटेकर; दुर्वासा का बचपन में निधन हो गया था। मल्हार पाटेकर फिल्म निर्माण और निर्देशन से जुड़े रहे हैं और उन्होंने ‘ द अटैक्स ऑफ 26/11’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया था।
नाना पाटेकर को 8 अक्टूबर 2026 गोवा स्थित उनके घर पर हृदयाघात हुआ। उन्हें बचाने के लिए करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका और 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
अच्छा है नाना आपकी चाहत हर तरफ है। आप जब यहाँ रंगमंच पर धूम मचा रहे थे तब फिल्मी दुनिया को आपकी दरकार थी। और जब फिल्मी दुनिया में तहलका मचा रहे थे तब दूसरी दुनिया आपका इंतजार बेसब्री से कर रही थी। और अब जब आप दूसरी दुनिया के हिस्से में हैं तब फिर इस दुनिया के लोगों ने आपका इंतज़ार करना शुरू कर दिया है। अब इस देह संग तो आपके दीदार नहीं हो सकेंगे लेकिन दूसरी देह के संग इस दुनिया में जल्दी लौटकर आना नाना…फिल्म प्रहार (1991) का यह डायलॉग एक बार फिर से बोलना कि
“हम जो काम करते हैं, वह सिर्फ फर्ज़ नहीं… एक देशवासी का धर्म है!” और
धर्म का यही मर्म सबकी समझ को विस्तार देता रहे…। इस जैसे सैकड़ों डायलॉग्स के जरिए भारत की करोड़ों आबादी को सही-सही पाठ नाना, तुम पढ़ा कर गए हो लेकिन सच यही है कि सिस्टम तो सिस्टम से ही चलता रहा, चल रहा है और चलता रहेगा। तुम्हारा ही ‘अब तक छप्पन’ फिल्म का यह डायलॉग कि हम सब सिस्टम का हिस्सा हैं, सिस्टम तय करता है, अपुन फॉलो करता है”। और इसीलिए तुम्हारी कही यह बात भी सही है कि “सौ में से अस्सी बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान”…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।