
न तुम जीते न हम हारे…
कॉकरोच जनता पार्टी को दिल्ली में जंतर मंतर के साथ ही कहीं भी प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गयी है। अभिजीत दीपके सहित अन्य नेताओं को रिहा तो किया गया है, लेकिन शांति भंग न करने की सख्त समझाइश के बाद। दिल्ली के दिल में तो सीजेपी के लिए जगह है लेकिन दिल्ली की सड़कें और मैदान कॉकरोच को कतई भी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं। वैसे भी देखा जाए तो सीजेपी उस दिशा में आगे बढ़ गई है जहां संतुष्टि का भाव मोदी सरकार की विदाई से कम में नजर नहीं आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भले ही सीजेपी को राहत देते हुए केंद्र सरकार को ही कटघरे में खड़ा किया है। लेकिन बात जब कानून व्यवस्था की हो तब सुप्रीम कोर्ट भी दिल्ली और मोदी सरकार पर एक सीमा तक ही शिकंजा कस सकता है। ऐसे में पूरा मामला ही न तुम जीते न हम हारे… की तर्ज पर आगे बढ़ता नजर आ रहा है।
पुलिस से रिहाई मिलने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि विरोध करने पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने ऐसा कोई बॉन्ड या अंडरटेकिंग साइन नहीं किया है जो उन्हें सड़कों पर उतरने से रोकता हो। यह बयान सीजेपी के उन आरोपों के बीच आया है जिनमें कहा गया है कि दिल्ली में हालिया आंदोलन के दौरान अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों पर पाबंदियां लगाईं और पार्टी नेताओं को हिरासत में लिया। दीपके ने कहा ये पाबंदियां पार्टी को अपना विरोध जारी रखने से नहीं रोक पाएंगी। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘हमने ऐसा कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है जिसमें लिखा हो कि हम विरोध नहीं करेंगे। हम फिर से सड़कों पर उतरेंगें।’ कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को एक अदालत ने 11 अक्टूबर 2026 को रिहा कर दिया। उन्हें इस शर्त पर रिहा किया गया कि वे एक साल तक कोई ऐसा काम नहीं करेंगे जिसे शांति भंग करना माना जाए।
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि सीजेपी के प्रदर्शन की अनुमति इसलिए नहीं दी गई क्योंकि उन्होंने पिछली बार प्रदर्शन के लिए जो शर्ते दी गई थीं उन्होंने उसका पालन नहीं किया। दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान डीसीपी पीआरओ नेहा यादव ने विरोध प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी गई इसकी वजहें बताई। इसके साथ ही सीजेपी के संयोजक अभिजीत दीपके की दादी के निधन पर दिल्वली पुलिस की गलत छवि पेश करने की कोशिशों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा ‘सीजेपी के पूर्व आचरण के अनुसार उन्होंने पूर्व में दी गई अंडरटेकिंग को फॉलो नहीं किया था। जब इन्हें पिछली बार परमिशन दी गई थी तो इन्होंने कानून को फॉलो नहीं किया। इनके द्वारा जुटाई गई भीड़ द्वारा भारी पथराव, आगजनी और हिंसा की गई। ऐसे में मौजूदा हालातों और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जंतर-मंतर पर प्रस्तावित धरना प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई।’
डीसीपी पीआरओ ने आगे कहा कि ‘दिल्ली की सुरक्षा और नागरिकों के जान की बचाव के लिए कई इलाकों में भारतीय नागरिक न्याय संहिता (बीएनएसएस) लगाई गई। इसके तहत किसी भी तरह के जमावड़े और प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी इसलिए अभिजीत दीपके और उनके दो साथियों को 10 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था।’
अभिजीत दीपके के दादी के निधन पर पुलिस अधिकारी नेहा यादव ने बताया कि 10 को हिरासत में लिए जाने के बाद मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्हें मानवीय आधार पर हर संभव मदद पेश की गई थी। उन्होंने कहा कि सीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेस में इस तथ्य को गलत तरीके से पेश किया गया जबकि दीपके से फ्लाइट, फोन कॉल या किसी भी अन्य संभव मदद के लिए उनसे पुलिसकर्मियों द्वारा पूछा गया था। पुलिसकर्मियों ने उनसे यह भी पूछा था कि क्या वे अपने माता-पिता से बात करना चाहते हैं तो उन्होंने मना कर दिया था।’
हालांकि राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाके में एक बार फिर तनावपूर्ण हालात बन गए हैं। 11 अक्टूबर को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस में जुटे, जिसके बाद कई जगहों पर उनकी पुलिस के साथ तीखी झड़प हुई है। पार्टी के अंजिक्य शिंदे ने कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रहेगा। कुल मिलाकर मामला इतना ही है कि सीजेपी खुद को विपक्ष की तरह परोसकर सत्तापक्ष को बेदखल करने की योजना पर काम कर रहा है। अब मोदी की तानाशाही का विरोध करने की सीजेपी की रणनीति बन चुकी है। यानि तस्वीर साफ है कि सीजेपी को भी हार पसंद नहीं है और मोदी सरकार भी हार पसंद नहीं करती। ऐसे में मामला फिलहाल मोदी सरकार और सीजेपी के बीच न तुम जीते ना हम हारे की तर्ज पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।