
कोसमी के महाभारत में शिव- कार्तिकेय और मध्य प्रदेश सरकार के मुखिया मोहन …
कोसमी में 12 आदिवासी परिवारों के घर उजड़ने के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में नीति-अनीति जैसे शब्द जीवंत हो उठे हैं। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में 17 साल की लंबी पारी खेलने वाले शिवराज सिंह चौहान यह बात बखूबी जानते हैं कि अगर वह
अफसरों को हृदयहीन, संवेदनहीन जैसे शब्दों से कोस रहे हैं तो वह कहीं न कहीं सरकार पर ही निशाना साध रहे हैं। और यदि सरकार संवेदनहीन है तो सरकार के मुखिया पर भी इससे पल्ला नहीं झाड़ सकते। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयान के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मामले की जांच कराने और जांच के बाद दूध का दूध पानी का पानी होने की बात कही थी। लेकिन शिवराज फिर भी नहीं माने, और जब वह दिल्ली गए तो कोसमी में उनकी जगह पर उनके पुत्र और राजनैतिक विरासत को आगे ले जाने को तैयार कार्तिकेय सिंह ने धरने को नेतृत्व प्रदान कर दिया। अब कोसमी के इस महाभारत में शिव-कार्तिकेय और मोहन आमने-सामने खड़े नजर आ रहे हैं। बुधनी विधायक रमाकांत भार्गव भी आदिवासियों के इस मुद्दे पर कोसमी के रण में शिवराज के साथ खड़े रहे। इस पूरे संग्राम का एक संयोग या एक पहलू और भी है कि जब कोसमी में शिवराज धरने पर बैठे थे तब मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर केंद्रीय अमित शाह से मुलाकात कर रहे थे। और ऐसे ही घटनाक्रमों को जोड़कर यह कयास लगाए जाते हैं कि आखिर मध्य प्रदेश की राजनीति में क्या उलटफेर का मौसम आने को है। हालांकि, ऐसे कयास हमेशा ही सच की कसौटी पर बेरंग ही नजर आते रहे है। तो सबसे बड़ी बात यही है कि आखिरकार कोसमी के रण से क्या विजय-पराजय की निर्णायक लड़ाई भी होकर रहेगी।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कोसमी का मामला सामने आने पर कहा था कि उनकी सरकार संवेदनशील है और वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान की शिकायत पर उन्होंने जांच करने के लिए बोला है। इसके बाद सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। लेकिन मामला तब और गंभीर हो गया जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बाद अब उनके बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान भी खुलकर मैदान में उतर आए। पीड़ित आदिवासी परिवारों के समर्थन में धरने पर बैठे कार्तिकेय ने प्रशासन और अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि गरीबों के अधिकारों के बीच कोई अधिकारी आएगा, तो उसे उनका सामना करना पड़ेगा। धरना स्थल पर मौजूद आदिवासियों के बीच बैठे कार्तिकेय सिंह चौहान ने बेहद आक्रामक और भावनात्मक अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ”अगर ये अधिकारी आप सबके रास्ते में आएंगे, तो सबसे पहले इन्हें हमारा सामना करना पड़ेगा। और यह मैं किसी राजनीतिक परिवार का सदस्य होने के नाते नहीं, बल्कि वो कार्तिकेय होने के नाते कर रहा हूं जो आपका विश्वास प्राप्त करने 2023 में आया था। और मुझे कसम है उस विश्वास की, आपके अधिकारों को आपको दिला कर रहूंगा।”
कार्तिकेय ने आगे कहा कि माताओं और बहनों ने यह विषय रखा कि बरसों पुराने गांव के कुएं को मिट्टी डालकर बंद कर दिया गया है, जो कि मानवाधिकारों के खिलाफ है। ऐलान किया कि पोकलेन मशीन बुलाकर उस कुएं को फिर से चालू किया जाएगा और जब तक पानी की स्थायी व्यवस्था नहीं होती, तब तक टैंकरों से पानी पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने यह भी प्रण लिया कि जिस आदिवासी बच्चे के सिर से छत छीनी गई है, उसका जन्मदिन वहीं मनाया जाएगा और जब तक उनके पक्के मकान दोबारा नहीं बन जाते, वे चैन से नहीं बैठेंगे।
तो मूल बात यही है कि कोसमी के रण से मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी की पूरी तस्वीर सामने आई है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने
मुख्य सचिव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष से बात की, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को सीधे फ़ोन लगाकर अपनी नाराजगी जताने की जहमत नहीं उठाई। और उनके बाद कोसमी में कार्तिकेय द्वारा मोर्चा संभालने से यह संकेत भी जा रहा है कि बुधनी में आगे पीछे उनके उत्तराधिकारी के रूप में कार्तिकेय ही अपनी राजनैतिक पारी की शुरुआत करेंगे। तो संकेत सीधा सीधा जा रहा है कि मोहन और शिवराज एक पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता नजर आने की जगह नदी के दो तीर नजर आ रहे हैं। दोनों का वास्ता एक ही नदी से है, लेकिन वह आपस में कभी मिल नहीं सकते। कोसमी के महाभारत में शिव- कार्तिकेय और मोहन आमने सामने खड़े दिख रहे हैं जो कहीं न कहीं भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं को रास नहीं आ रहा होगा। …

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।