इंदौर में 85 हजार परिवारों को नहीं मिल रहा पर्याप्त पानी: 52 हजार घरों तक नहीं पहुंच रहा नर्मदा जल, 33 हजार परिवार टैंकरों के भरोसे; निगम की सर्वे रिपोर्ट में खुलासा, 14 इंच कम बारिश के बाद महापौर ने मांगा 50 करोड़ का पैकेज

इंदौर में इस बार मानसून की बेरुखी से गर्मी आने के पहले ही जलसंकट की आशंका गहराने लगी है। शहर के करीब 85 हजार परिवारों की पानी की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। 52,262 घरों तक अलग-अलग कारणों से नर्मदा जल नहीं पहुंच रहा है। वहीं, 33,037 परिवार पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर हैं

इंदौर में इस बार सामान्य से 14 इंच बारिश कम हुई है, इसके चलते अभी से जलसंकट गहरा रहा है।

ये खुलासा इंदौर नगर निगम के सर्वे में हुआ है। इसकी रिपोर्ट 14 अक्टूबर को निगम के आला अधिकारियों को सौंपी गई। भास्कर ने अपने सूत्रों से इसे हासिल किया है।

सर्वे रिपोर्ट पर एक नजर

इंदौर नगर निगम ने वार्ड 36 को खतरनाक श्रेणी में रखा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वार्ड नंबर 37 में सबसे ज्यादा टैंकर से पानी दिया जा रहा है।

वार्ड नंबर 36 के मायाखेड़ी में अभी से टैंकरों से पानी सप्लाई

निगम के सर्वे में वार्डवार आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि वार्ड 36 के मायाखेड़ी, अरंडिया, निपानिया और पिपलियाकुमार जैसे इलाकों में सबसे गंभीर जलसंकट है। यहां करीब 12 हजार परिवारों के पास नर्मदा कनेक्शन नहीं है। मायाखेड़ी और निपानिया में अभी से टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था शुरू कर दी गई है।

वार्ड नंबर 16 में साढ़े 7 हजार परिवारों के पास नर्मदा कनेक्शन नहीं

इंदौर के वार्ड नंबर 16 में भी करीब 7,500 परिवार नर्मदा कनेक्शन से वंचित हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि शहर में जलापूर्ति की चुनौती गर्मी बढ़ने के बाद नहीं, बल्कि अभी से शुरू हो गई है।

गुरुवार को हुई बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पानी सप्लाई के लिए पर्याप्त हाइड्रेंट बनाकर टैंकर भरने की व्यवस्था करने को कहा है। उन्होंने बताया कि नए टैंकर खरीदने की मांग मध्य प्रदेश सरकार को भेजी गई है।

कम सप्लाई होने के कारण यहां टैंकरों की जरूरत

सर्वे का दूसरा अहम पहलू उन परिवारों से जुड़ा है, जहां नर्मदा कनेक्शन या जलापूर्ति व्यवस्था होने के बावजूद पानी कम पड़ने पर टैंकरों की जरूरत होती है। निगम के मुताबिक, ऐसे परिवारों की कुल संख्या 33,037 है।

वार्ड नंबर 37 में 2000 परिवार, 45 में 1800, 51 में 1300 और वार्ड नंबर 28 में 1200 परिवार टैंकरों पर निर्भर हैं। वार्ड नंबर 63 में भी ऐसे 250 परिवार चिह्नित किए गए हैं।

इन आंकड़ों से साफ है कि जलसंकट की चुनौती सिर्फ उन क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, जहां नर्मदा का नेटवर्क नहीं पहुंचा है। जिन इलाकों में पानी की सप्लाई होती है, वहां भी जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिलने पर वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ती है।

इंदौर के कई इलाकों में लोग सुबह से ही पानी की व्यवस्था करने में जुट जाते हैं।

14 इंच कम बारिश, पानी बचाने के उपायों पर बैठक

इंदौर में सामान्य तौर पर होने वाली करीब 37 इंच बारिश के मुकाबले इस बार 23 इंच पानी ही बरसा है। इसके मद्देनजर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपए के पैकेज की मांग की है।

इंदौर में जलसंकट से निपटने के उपायों पर चर्चा के लिए गुरुवार सुबह नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, इंदौर नगर निगम समेत संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की।

परिवारों तक नियमित नर्मदा सप्लाई कब पहुंचेगी

इंदौर नगर निगम के सर्वे ने उन इलाकों की स्थिति उजागर की है, जहां हजारों परिवारों को नियमित नर्मदा जलापूर्ति उपलब्ध नहीं है या कम सप्लाई के कारण टैंकरों का सहारा लेना पड़ता है।

अब सवाल यह है कि इन क्षेत्रों में स्थायी जलापूर्ति के लिए निगम की क्या योजना है, नर्मदा नेटवर्क से वंचित परिवारों को कब तक जोड़ा जाएगा और गर्मी में टैंकरों की व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होगी

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