इंदौर को प्राणवायु देने वाले चोरल के जंगल बचाने के लिए हाई कोर्ट ने गुरुवार को अंतरिम आदेश जारी किए हैं। सिमरोल-चोरल और बड़वाह तक रेलवे ट्रैक के लिए 2.5 लाख से अधिक छोटे-बड़े पेड़ काटने पर रोक लगा दी है। जहां पेड़ काटे जाने हैं, वहां आए दिन बाघ, तेंदुए, चीतल, सांभर, लोमड़ी, मोर, जंगली खरगोश नजर आते रहते हैं।

चोरल में अभी ऐसा घना है जंगल।
निमाड़ से आने वाली गर्म हवा रोकने में चोरल के जंगल बड़ी भूमिका निभाते हैं। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोकजे, जस्टिस विनय सराफ की डिविजन बेंच ने वन विभाग और रेलवे को नोटिस जारी किए गए हैं। 30 नवंबर को अगली सुनवाई होगी।
याचिकाकर्ता करण बैरागी की ओर से अधिवक्ता मनीष यादव ने पैरवी की। गुरुवार की सुनवाई के दौरान बताया गया कि इस बार सूखे जैसी स्थिति है। पिछले पांच सालों से इंदौर में गर्मियों में अधिकतम तापमान भी 45 डिग्री को छू रहा है। ऐसे में दो-ढाई लाख पेड़ कटने से शहर भट्टी की तरह तपने लगेगा। मालवा और निमाड़ के तापमान में कोई अंतर नहीं रह जाएगा। रेलवे ने पहले जो डिजाइन तय की थी,उसमें 40-50 हजार पेड़ ही प्रभावित हो रहे थे। केवल चढ़ाई अधिक होने, सिमरोल से बड़वाह तक जाने में 30-40 मिनट का वक्त अधिक लगने का हवाला देकर डिजाइन बदल दी गई। चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या वाकई इतने पेड़ काटे जा रहे हैं? यह चिंताजनक है।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में ये दी हैं दलीलें
- इस क्षेत्र में बाघों के 37 पगमार्क और तेंदुओं के 89 पगमार्क दर्ज किए गए हैं, जो इसकी पारिस्थितिक संवेदनशीलता बताते हैं।
- पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से क्षेत्र में भूजल स्तर में गिरावट, बारिश में कमी, जलवायु असंतुलन, तापमान बढ़ना, जैसी समस्याएं हो रही हैं।
- पर्यावरण संतुलन के लिए अहम ‘सलाई’ के पेड़ भी कम रह गए हैं। {मालवा क्षेत्र का लगभग आधा वन कवर पहले ही गायब हो चुका है।
- लगभग 58 स्थानीय पेड़ों की प्रजातियां बेहद दुर्लभ हो चुकी हैं। उनकी संख्या घटकर एक प्रतिशत से भी कम रह गई है।
प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेज पेश करने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि इंदौर और मालवा क्षेत्र में वन भूमि के डायवर्जन और बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई (विशेषकर इंदौर-खंडवा रेलवे प्रोजेक्ट और नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स) से जुड़े सभी दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश किए जाएं। वानिकी, वन्यजीव, पारिस्थितिकी, पर्यावरण विज्ञान के विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए।
जस्टिस सराफ ने अपने ही आदेश का हवाला दिया
जस्टिस विनय सराफ ने जबलपुर खंडपीठ में पेड़ों की कटाई को लेकर पूर्व में दिया आदेश चीफ जस्टिस को दिखाया। तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस सराफ की खंडपीठ ने जंगलों की कटाई पर पूरी तरह रोक लगाने के आदेश दिए थे। केवल सुरक्षा के लिहाज से छंटनी किए जाने के निर्देश दिए थे। इसी तरह का आदेश चोरल के मामले में भी जारी किया गया।