
राजनैतिक मायनों से सराबोर है, नौ साल बाद शुरू हो रही दिग्विजय की यात्रा…
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले वर्ष 2017 में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने नर्मदा यात्रा की शुरुआत की थी। करीब 6 महीने चली इस यात्रा में दिग्विजय ने नर्मदा किनारे की करीब सौ विधानसभा सीटों पर राजनीतिक समीकरणों की पूरी तहकीकात की थी। और 2018 में मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सरकार बनाने में सफलता भी हासिल की थी। और अब दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर 2026 (विजयादशमी) से ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ की शुरुआत करने जा रहे हैं। महाकाल से अयोध्या तक होने जा रही इस यात्रा को भी राजनैतिक मायनों से सराबोर माना जा सकता है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले होने वाली यात्रा कहीं न कहीं सत्य और सनातन के नाम पर भारतीय जनता पार्टी और एनडीए को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। दिग्विजय की इस यात्रा को इस बात से जोड़कर भले ही नहीं देखा जा सकता हो कि विधानसभा सीटों को लेकर कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में कितनी सफलता मिल पाती है। लेकिन यह माना जा सकता है कि कहीं न कहीं दिग्विजय की यह यात्रा उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की मजबूत जमीन को उर्वरता अवश्य प्रदान करेगी।
दिग्विजय की यह यात्रा उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर (शिव धाम) से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के रास्ते अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर (राम धाम) तक जाएगी। यह पदयात्रा लगभग 950 किलोमीटर की होगी, जिसमें रोजाना करीब 15 से 20 किलोमीटर पैदल चलने की योजना है। मंदिरों के दान और चढ़ावे के इस्तेमाल में पारदर्शिता व जवाबदेही की मांग उठाना, धर्म के नाम पर हो रहे कथित व्यवसाय और व्यवस्था की कमियों के खिलाफ जनजागरण करना और वोट चोरी और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाना यात्रा के उद्देश्यों में शामिल है। और इस यात्रा को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती सहित कई साधु-संतों का समर्थन प्राप्त हुआ है। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच मतभिन्नता और सनातन को लेकर पारस्परिक खिन्नता का भाव सबके सामने है। और दिग्विजय के गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के उत्तराधिकारी अविमुक्तेश्वरानंद योगी सरकार पर तीखा प्रहार करने के मामले में विशेष ख्याति प्राप्त कर चुके हैं। ऐसे में दिग्विजय की यह यात्रा और अविमुक्तेश्वरानंद का यात्रा को समर्थन सीधा संदेश दे रहा है कि सनातन के नाम पर योगी सरकार को घेरने में यह यात्रा महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेगी। इसीलिए इस यात्रा को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं जारी हैं। जहां एक तरफ समर्थक इसे धार्मिक और सामाजिक सरोकार की यात्रा बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित करार दे रहे हैं।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सत्य, सनातन स्वाभिमान यात्रा से पहले उज्जैन में संतों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है। महाकाल की नगरी से अयोध्या तक शुरू होने वाली इस यात्रा में शामिल होने के लिए देशभर से संत उज्जैन पहुंच रहे हैं।
महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा इन संतों का नेतृत्व करते नजर आएंगे। कंप्यूटर बाबा वह संत हैं जिन्होंने कांग्रेस की सरकार बनवाने के लिए 2018 विधानसभा चुनाव से पहले भी कांग्रेस के लिए संतों का खासा समर्थन जुटाया था। और उनके नेतृत्व में ही दिग्विजय की इस यात्रा में हजारों की संख्या में संतों के शामिल होने की बात कही जा रही है। इस दौरान संत ‘चंदा चोरों, अयोध्या छोड़ो’ के नारे भी लगाते नजर आएंगे। दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर उज्जैन पहुंचे संतों का वीडियो साझा किया है। सुबह दस बजे हजारों संत पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के साथ पार्थिव शिवलिंग निर्माण करेंगे और अनुष्ठान में शामिल होंगे। इसके बाद अधर्म पर धर्म की विजय की भावना से यात्रा का शुभारंभ होगा। दिग्विजय सिंह की इस यात्रा का उद्देश्य मंदिरों में चढ़ावे की पारदर्शिता, कथित चंदा चोरी और वोट चोरी के मुद्दों पर जवाबदेही की मांग उठाना है। यात्रा के जरिए धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में पारदर्शिता और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाने की बात कही गई है।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मां नर्मदा की परिक्रमा पदयात्रा 30 सितंबर 2017 को नरसिंहपुर जिले के बरमान घाट से शुरू की थी। यह यात्रा कुल 192 दिन चली। उन्होंने पत्नी अमृता राय और समर्थकों के साथ करीब 3,300 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी की थी। यह यात्रा 9 अप्रैल 2018 को नरसिंहपुर के बरमान घाट पर ही समाप्त हुई थी। इस परिक्रमा के दौरान वे मध्य प्रदेश की लगभग 110 सीटों से होकर गुजरे थे। इसे एक धार्मिक और आध्यात्मिक संकल्प बताया गया, लेकिन राजनीतिक जानकारों ने इसे मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी को फिर से मजबूत करने और नई जमीन तैयार करने वाली यात्रा माना था। अवैध रेत खनन और नर्मदा संरक्षण का मुद्दा भी उन्होंने इस दौरान उठाया था।
तो वर्तमान समय में राजनैतिक रूप से समृद्ध होने के लिए कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में अपनी मजबूत जमीन को वापस पाने की बड़ी दरकार है। महाकाल से लेकर अयोध्या तक की यात्रा में दिग्विजय, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों राज्य की विधानसभा सीटों पर कांग्रेस की मजबूती के लिए भरसक कोशिश करेंगे। और वह समीकरण भी तलाशेंगे जिनके सहारे कांग्रेस की समृद्धि में सफलता पाई जा सके। हालांकि सत्य, सनातन और स्वाभिमान को समर्पित दिग्विजय की यह यात्रा कांग्रेस की उत्तर प्रदेश में सत्ता में वापसी को अर्पित रहेगी। राजनैतिक मायनों से सराबोर, नौ साल बाद दिग्विजय की यात्रा अपने उद्देश्यों में कितनी सफल हो पाती है यह उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के परिणामों से साफ-साफ पता चल जाएगा…।

कौशल किशोर चतुर्वेदी
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।