इंदौर में 150 करोड़ की जमीन की 9 करोड़ में रजिस्ट्री का आरोप, करोड़पति हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान बने गवाह; ICU में भर्ती कस्तूरी बाई से धोखे से पावर ऑफ अटॉर्नी कराने का दावा, पत्नी का कंपनी से कनेक्शन भी आया सामने

लोकायुक्त की जांच में 64 करोड़ रुपए से अधिक की 48 संपत्तियों के सामने आने के बाद इंदौर पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल (ड्राइवर) फिरोज खान चर्चा में है।उनका नाम अब इंदौर-उज्जैन हाईवे पर मगरखेड़ा गांव की 45 बीघा जमीन की रजिस्ट्री में भी दर्ज है। रजिस्ट्री के दस्तावेजों में फिरोज खान गवाह हैं।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि 83 साल की कस्तूरी बाई के ICU में भर्ती रहने के दौरान धोखे से रजिस्ट्री कराई गई। रजिस्ट्री के चार दिन बाद ही वृद्धा की मौत हो गई। परिवार ने नामांतरण निरस्त कराने के बाद अब रजिस्ट्री को शून्य घोषित कराने के लिए अदालत में याचिका दायर की है।

स्थानीय जानकारों और परिवार के मुताबिक, जमीन का बाजार मूल्य करीब 150 करोड़ रुपए है, जबकि रजिस्ट्री में बिक्री मूल्य 9 करोड़ रुपए दर्ज है।

क्या है 45 बीघा जमीन का पूरा मामला?

27 अगस्त को रजिस्ट्री, 2 सितंबर को वृद्धा की मौत

इंदौर-उज्जैन रोड स्थित मगरखेड़ा गांव में 45 बीघा जमीन कस्तूरी बाई के नाम दर्ज थी। उनके पोते दीपक शर्मा के मुताबिक, यह उनकी पुश्तैनी संपत्ति है। दीपक का आरोप है कि कस्तूरी बाई की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रतलाम से इंदौर मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया।

परिवार के मुताबिक, फिरोज खान, उनके भाई जावेद खान और रविकांत पंवार उन्हें अस्पताल ले गए थे। परिजन का दावा है कि ICU में दस्तावेज ले जाने का विरोध करने पर विवाद भी हुआ। पावर ऑफ अटॉर्नी के बाद जमीन की रजिस्ट्री हुई। चार दिन बाद अस्पताल में ही कस्तूरी बाई का निधन हो गया।

रजिस्ट्री में 9 करोड़ मूल्य, बाजार कीमत 150 करोड़ होने का दावा

इंदौर-1 उप पंजीयक कार्यालय के दस्तावेजों के मुताबिक, 27 अगस्त 2024 को मगरखेड़ा की 45 बीघा जमीन ‘श्याम इंफ्रा’ के सुमित जिंदल के नाम रजिस्टर्ड हुई। विक्रेता की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी धारक रविकांत पंवार ने हस्ताक्षर किए।

दस्तावेजों में जमीन का सरकारी मूल्यांकन 8.97 करोड़ और बिक्री मूल्य 9 करोड़ रुपए दर्ज है। पीड़ित परिवार और स्थानीय जानकारों का दावा है कि जमीन की मौजूदा बाजार कीमत करीब 150 करोड़ रुपए है।

जमीन की बाजार कीमत कलेक्टर रेट से 4-5 गुना ज्यादा

कस्तूरी बाई के पास 11.403 हेक्टेयर यानी करीब 45 बीघा जमीन है। 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन के मुताबिक, मगरखेड़ा गांव में जमीन की कीमत 4 करोड़ रुपए प्रति हेक्टेयर है। इस हिसाब से 11.403 हेक्टेयर जमीन की कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार कीमत करीब 45 करोड़ 61 लाख रुपए होती है।स्थानीय लोगों और प्रॉपर्टी डीलरों के मुताबिक,

इंदौर-उज्जैन रोड पर स्थित मगरखेड़ा गांव की 45 बीघा जमीन। इसे लेकर विवाद है।

रजिस्ट्री में फिरोज खान गवाह, पत्नी का कंपनी से संबंध

रजिस्ट्री के पेज 12 और 25 पर फिरोज खान का नाम, पता, फोटो और हस्ताक्षर गवाह के रूप में दर्ज हैं। यानी इस सौदे में उनकी मौजूदगी रजिस्ट्री के दस्तावेजों से भी सामने आती है।

पावर ऑफ अटॉर्नी धारक रविकांत पंवार के बेटे युवराज पंवार ‘स्पार्कवेव रियलिटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ में डायरेक्टर हैं। स्पार्कवेव वह कंपनी है, जिसका नाम लोकायुक्त की कार्रवाई में दस जमीनों की खरीद फरोख्त में सामने आया है।

इसी कंपनी में फिरोज खान की पत्नी हिना खान भी डायरेक्टर है। इन कारोबारी संबंधों के कारण जमीन के सौदे में फिरोज खान की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

जमीन की रजिस्ट्री में फिरोज खान गवाह बने। जो कानूनी रूप से गलत है।

सिविल कोर्ट के यथास्थिति आदेश के बाद नामांतरण, SDM ने किया निरस्त

जमीन के सौदे की जानकारी मिलने पर पीड़ित परिवार ने राजस्व अदालत में अपील की। इसके बाद SDM कोर्ट ने नामांतरण निरस्त कर दिया। आदेश के मुताबिक, नामांतरण की प्रक्रिया में कई गंभीर कमियां पाई गईं।

सिविल कोर्ट के आदेश के बावजूद नामांतरणः इंदौर के प्रधान जिला न्यायाधीश की अदालत ने प्रकरण क्रमांक 1197/2024 में 25 अक्टूबर 2024 को जमीन की यथास्थिति बनाए रखने और बिक्री नहीं करने का अंतरिम आदेश दिया था। इसके बाद 17 फरवरी 2025 को नामांतरण किया गया। SDM के आदेश के मुताबिक, यह प्रक्रिया गंभीर त्रुटि थी।

कंपनी के दस्तावेज अधूरे: सुनवाई के दौरान खरीदार

और संबंधित फर्म के पंजीकरण प्रमाणपत्र तथा भागीदारों की डिटेल साफ तौर से पेश नहीं की गई।

पक्षकारों को पूरा मौका नहीं मिला: SDM कोर्ट केमुताबिक, प्रभावितों को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिए बगैर नामांतरण का आदेश जारी किया

एसडीएम कोर्ट का जमीन का नामांतरण निरस्त करने का आदेश।

नामांतरण निरस्त, अब रजिस्ट्री की वैधता पर फैसला बाकी

नामांतरण निरस्त होने से परिवार को राहत मिली है, लेकिन जमीन की रजिस्ट्री को लेकर कानूनी विवाद जारी है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, नामांतरण राजस्व रिकॉर्ड में जमीन के संबंध में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया है।

इसे निरस्त करने से रजिस्ट्री अपने आप अमान्य नहीं होती। इसी वजह से शर्मा परिवार ने सिविल कोर्ट में रजिस्ट्री को शून्य घोषित करने की मांग की है। अदालत को पावर ऑफ अटॉर्नी की वैधता और उससे जुड़े दस्तावेजों पर विचार करना होगा।

आरोप है कि जब कस्तूरीबाई अस्पताल में भर्ती थी तभी जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। ये उसी वक्त लिया गया वीडियो है।

लोकायुक्त जांच में अब जमीन के सौदे का पहलू भी अहम

लोकायुक्त पुलिस पहले से फिरोज खान से जुड़ी 70 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की 48 अचल संपत्तियों की जांच कर रही है। अब मगरखेड़ा की जमीन के सौदे से जुड़े दस्तावेज भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

लोकायुक्त डीएसपी सुनील तालान का कहना है कि मगरखेड़ा में जमीन के बारे में पता चला है। संबंधित विभागों से जानकारी निकलवाई जा रही है कि फिरोज खान व उससे जुड़ी कंपनियों का इस जमीन में क्या भूमिका है? जानकारी आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

14 अक्टूबर को लोकायुक्त की टीम ने फिरोज खान के इंदौर-देवास समेत 15 ठिकानों पर कार्रवाई की थी।

‘कस्तूरीबाई का लीगल एडवाइजर था’

पावर ऑफ अटॉर्नी कराने वाले रविकांत पंवार से विवाद के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, मैं कस्तूरीबाई का लीगल एडवाइजर था। यह सही है कि फिरोज खान पावर ऑफ अटॉर्नी में गवाह हैं, जबकि कानूनी रूप से उन्हें गवाह नहीं होना चाहिए था।

लीगल एडवाइजर की हैसियत से पावर ऑफ अटॉर्नी कराई गई। इसके बाद जमीन की रजिस्ट्री श्याम इंफ्रा के नाम की गई। पंवार के मुताबिक, कस्तूरीबाई नहीं चाहती थीं कि उनकी जमीन परिवार के नाम हो। उनका आरोप था कि परिजनों ने उनके साथ मारपीट की थी, इसलिए वे अपनी संपत्ति उन्हें नहीं देना चाहती थीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *