श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार को दर्शन के लिए पहुंचे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज के साथ जल द्वार के पास चेकिंग के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने अभद्रता की थी। इस मामले में शिकायत के बावजूद मंदिर समिति ने संबंधित कर्मचारी पर कोई कार्रवाई नहीं की।
इससे नाराज रवींद्र पुरी महाराज ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह को पत्र लिखकर मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग की है।
शुक्रवार शाम को रवींद्र पुरी महाराज दिल्ली के लिए रवाना हुए। बताया जा रहा है कि वे वहां भी इस मामले में अपनी शिकायत दर्ज कराएंगे।
सुरक्षाकर्मी को ड्यूटी से हटाया, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से नाराज
गुरुवार को हुई घटना के बाद रवींद्र पुरी महाराज ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्र सरकार तक शिकायत पहुंचाने की बात कही थी। इसके बाद अभद्रता के आरोपों से घिरे जल द्वार निरीक्षक जगदीश गोड को वहां की ड्यूटी से हटा दिया गया और उनकी जगह निरीक्षक राजू मालवीय को तैनात किया गया।
हालांकि, रवींद्र पुरी महाराज संबंधित कर्मचारी पर कड़ी कार्रवाई चाहते थे। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक की ओर से कार्रवाई नहीं किए जाने पर उन्होंने मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था पर नाराजगी जताई और प्रशासक को पद से हटाने के लिए पत्र लिख दिया।
पत्र में लिखा- प्रशासक के अधीनस्थ कर्मचारी साधु-संतों से कर रहे अपमानजनक व्यवहार
रवींद्र पुरी महाराज ने पत्र में लिखा- प्रथम कौशिक द्वारा अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के माध्यम से साधु-संतों के साथ अपमानजनक व्यवहार कराया जा रहा है।
उन्होंने आगे लिखा कि पिछले लंबे समय से उन्हें शिकायतें मिल रही हैं कि मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के अधीनस्थ कर्मचारी साधु-संतों के साथ अपमानजनक व्यवहार कर रहे हैं। इसी क्रम में 5 नवंबर 2026 को वे स्वयं भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे थे। प्रोटोकॉल के तहत जिन सहायक प्रशासक की ड्यूटी लगाई गई थी, वे भी निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं हुए।
पत्र के अनुसार, मंदिर कर्मचारियों ने यह कहते हुए उन्हें रोका कि प्रशासक के सख्त आदेश हैं कि कोई भी साधु-संत बिना चेकिंग के दर्शन नहीं करेगा। इस दौरान उनके साथ अनावश्यक रोक-टोक की गई और दर्शन व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न हुआ।
उन्होंने पत्र में कहा कि सिंहस्थ-2028 जैसे विश्वस्तरीय धार्मिक आयोजन के दौरान यदि साधु-संतों के साथ मंदिर प्रशासन का ऐसा व्यवहार जारी रहा, तो इससे सनातन धर्म की प्रतिष्ठा और धार्मिक भावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की ओर से प्रशासक प्रथम कौशिक को तत्काल पद से हटाने और उनकी जगह धार्मिक परंपराओं की समझ रखने वाले अनुभवी एवं संवेदनशील अधिकारी की नियुक्ति करने की मांग की है।

रवींद्र पुरी बोले- आगे विवाद हुआ तो मंदिर में कोहराम मचेगा
रवींद्र पुरी महाराज ने कहा- मंदिर में हमारे साथ अभद्रता की गई। हमने कहा कि ऐसे कर्मचारी को मंदिर से हटा दीजिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। सिंहस्थ में करोड़ों लोग आएंगे। संत और संन्यासी दर्शन करने आएंगे। वे इन्हें नहीं छोड़ेंगे।
हमने प्रशासक से कहा था कि आगे कोई विवाद न हो। इसी वजह से हमने पत्र लिखा है। अगर कोई विवाद हुआ तो मंदिर में कोहराम मच जाएगा। हमारे साथ हुए अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
