मुंबई की मशहूर Karachi Bakery ने कारोबार समेटा, MNS का दावा-हमने बंद कराया

मुंबई की मशहूर कराची बेकरी ने हमेशा के लिए अपना शटर गिरा लिया है। पिछले दिनों बांद्रा की यह प्रतिष्ठित दुकान अपने नाम की वजह से विवादों में आ गई थी।लेकिन, अब इसने कहा है कि दुकान बंद करने का उस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि कारोबार ठीक से नहीं चलने के चलते ऐसा किया जा रहा है।

भले ही MNS ने बेकरी के बंद होने का क्रेडिट खुद को दिया है, लेकिन बेकरी के मालिकों ने इससे इनकार कर दिया और कहा कि इस कदम का फैसला पुराने लीज एग्रीमेंट के खत्म होने के बाद लिया गया, न कि नाम बदलने के विवाद के कारण इसे बंद किया गया।

बेकरी के मैनेजर रामेश्वर वाघमारे ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “हमने पुराने लीज एग्रीमेंट के खत्म होने के बाद दुकान बंद कर दी। साथ ही लॉकडाउन ने भी बिजनेस पर काफी प्रभाव डाला था।” हालांकि, बुधवार को MNS के उपाध्यक्ष हाजी सैफ शेख ने ट्वीट किया, “अपने नाम के कारण बड़े पैमाने पर विरोध झेलने के बाद, कराची बेकरी को आखिरकार मुंबई में अपनी एकमात्र दुकान को बंद करना ही पड़ा।”

वाघमारे ने कहा, “नाम को बदलने के लिए कोई कारण नहीं था। बेकरी सभी वेलिड लाइसेंस और एग्रीमेंट के साथ एक वेलिड बिजनेस कर रही थी। हमारा ये फैसला व्यावसायिक कारकों पर आधारित है। अगर कोई दूसरा इसका क्रेडिट लेना चाहता है, तो लेने दीजिए।” वाघमारे के साथ ही दूसरे कर्मचारी भी अब बेरोजगार हो गए हैं।

इस बीच, शेख ने अखबार से कहा, “मैंने कराची बेकरी को कारोबार बंद करने के लिए नहीं कहा, लेकिन सीमा पर हमारे जवान मारे जा रहे हैं। हर दिन पाकिस्तान के साथ झड़पों की खबरें आती थीं। इसलिए मैंने नाम बदलने के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया था। मैंने कहा कि इसे Karachee कर दें। उन्होंने जवाब में कहा कि नाम उनके पैतृक शहर के लिए उनके पुराने संबंधों को दर्शाता है। आज मैं खुश हूं।”

देश भर में कई ब्रांच वाले ऐतिहासिक कंफेक्शनरी का मालिकाना हक सिंधी हिंदू रामनानी परिवार के पास है, जो विभाजन के बाद भारत चले आए थे। वाघमारे ने कहा कि ये ही हैं, जो ये तय करेंगे कि नई जगह किराए पर ली जाए या मुंबई में ब्रांड को बंद कर दिया जाए। कराची बेकरी पाकिस्तान के कराची के एक सिंधी हिंदू प्रवासी परिवार, रामनियों द्वारा संचालित हैदराबाद स्थित श्रृंखला का हिस्सा है।

वहीं पिछले साल नवंबर में शेख ने बेकरी मालिक को एक कानूनी नोटिस भेजा था, जिसमें कहा गया था कि कराची शब्द आम भारतीयों और भारतीय सेना की भावनाओं को आहत करता है, क्योंकि ये एक पाकिस्तानी शहर है।

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