चाइनीज मोबाईल कंपनी वीवो बीसीसीआइ के साथ अपना करार तोड़ सकता है। वीवो IPL का प्रायोजक है और अभी उसका तीन साल का करार बाकी है। दरअसल वीवो का इंडियन प्रीमियर लीग के साथ जुड़े होने का हर तरफ विरोध किया जा रहा है। भारतीय क्रिकेट फैंस से लेकर अन्य कई नामी हस्तियों व कई संगठनों ने भी इसके खिलाफ अपनी आवाज उठाई है।

अपने खिलाफ लगातार उठ रही आवाज और विरोध-प्रदर्शन की वजह से वीवो ने भी बोर्ड के साथ अपना करार तोड़ने का फैसला किया है और इस पर जल्द ही फैसला किया जाएगा। हालांकि आइपीएल गवर्निंग काउंसिल की बैठक में ये फैसला किया गया था कि वीवो आइपीएल का प्रायोजक बना रहेगा। सूत्रों के मुताबिक वीवो इस सीजन से बाहर हो सकता है, लेकिन ये भी कहा जा रहा है कि 2021 से लेकर 2023 तक एक बार फिर से वे इस लीग का हिस्सा बन जाएगा। जून में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेना के बीच हुई भिंड़त के बाद चीनी प्रायोजन बड़ा मुद्दा बन गया था। भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने इसके बाद करार की समीक्षा का वादा किया था.
आरएसएस से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच ने भी इस बारे में अपनी राय दी है और चीनी कंपनी के साथ करार तोड़ने के लिए बीसीसीआई को कहा है. स्वदेशी जागरण मंच के सह-संयोजक अश्वनी महाजन ने एक बयान में कहा कि आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ने देश की भावना और आम लोगों के संकल्प के खिलाफ नए आईपीएल सीजन के लिए एक चीनी कंपनी के साथ करार किया है. हम यह मांग करते हैं कि आईपीएल गवर्निंग काउंसिल चीनी कंपनी के साथ करार करने के फैसले पर पुनर्विचार करें. अगर आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ने चीनी कंपनी के साथ अपने करार को नहीं तोड़ा तो हम देश की जनता से यह निवेदन करेंगे कि वह आईपीएल का बहिष्कार करें. जहां तक सरकार के हस्तक्षेप की बात है वह किया जाए. यह समझना जरूरी है कि देश से बढ़कर क्रिकेट भी नहीं है.