
विधानसभा चुनाव आते ही सभी पार्टियों ने अपने-अपने चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिए हैं. सभी ने मतदाताओं के सामने वादों की झड़ी लगा दी है. बड़ी पार्टियों के बीच कुछ स्वतंत्र उम्मीदवार भी हैं जो अपने क्षेत्र के लोगों के सामने बड़े-बड़े वादे करते दिखाई दे रहे हैं.तमिलनाडु में एक उम्मीदवार ने चुनाव जीतने के लिए वोटरों से लंबे-चौड़े वादे किए है. इस प्रत्याशी ने चुनाव जीतने की स्थिति में एक मिनी हेलीकॉप्टर, हर घर में सालभर में एक करोड़ रुपये की राशि, शादी के लिए सोने की ज्वैलरी और तीन मंजिला घर बनाने का वादा किया है. यही नहीं, चांद की यात्रा भी टी.सर्वनन के चुनावी वादों में शामिल हैं. सर्वनन निर्दलीय उम्मीदवार हैं और मदुराई दक्षिण विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां 6 अप्रैल को वोटिंग होगी. उनका घोषणा पत्र और चुनावी वादे इस समय हर कहीं चर्चा का विषय बने हुए हैं. मदुराई दक्षिण विधानसभा सीट से सर्वनन के अलावा 13 और उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं.
पत्रकारिता से सियासत में ‘उतरे’ 33 साल के सर्वनन कहते हैं, ‘इसके पीछे मेरा उद्देश्य लोगों के बीच राजनीतिक पार्टियों के मुफ्त चीजें देने के वादों को लेकर जागरूक करना है. मैं चाहता हूं कि वे अच्छे उम्मीदवार को चुनें जो साधारण और विनम्र हों.’ दूसरे शब्दों में कहें तो नेताओं की ओर से किए जाने वाले लंबे-चौड़े वादों को ”हाईलाइट” करने के लिए सर्वनन अपने वोटरों को ऐसे वादे कर रहे हैं. उनका चुनाव चिह्न डस्टबिन है और संदेश है-यदि आप ऐसे झूठे वादों पर भरोसा कर रहे है जो कभी पूरे नहीं होने वाले है तो मतलब साफ है कि आप अपने वोट डस्टबिन में फेंक रहे हैं.सर्वनन महिलाओं पर से काम का बोझ कम करने के लिए रोबोट का वादा कर रहे हैं. यही नहीं, वे हर परिवार के लिए नाव, अपने विधानसभा क्षेत्र को ठंडा करने के लिए 300 फुट ऊंचा बर्फ का कृत्रिम पहाड़, एक स्पेस रिसर्च सेंटर और रॉकेट लांच पैड का भी वादा कर रहे हैं.
गरीब परिवार के सर्वनन अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ रहते हैं. सर्वनन की अभी शादी नहीं हुई है. वे कहते हैं कि नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए उन्होंने 20 हजार रुपये की राशि ब्याज पर उधार ली है. सर्वनन कहते हैं कि राजनीतिक पार्टियों ने राजनीति को धन कमाने का धंधा बना दिया है और लोगों के कल्याण की वे उपेक्षा कर रहे हैं. वे कहते हैं कि सत्ता में रहते हुए वे रोजगान उपलब्ध कराने, साफ हवा, नदियों को जोड़ने और खेती को बढ़ावा देने के लिए काम नहीं करते. चुनाव के दौरान वे लोगों से लुभावने वादे करते हैं और धनबल पर जीत हासिल करने की कोशिश करते हैं. इन लोगों ने राजनीति को दूषित कर दिया है.