
फीस के लिए प्रतिभशाली छात्रा का ज़ुर्म और रहमदिल ‘जासूस’
अजय पौराणिक !
इंदौर।
गरीब परिवार की एक होनहार नाबालिग छात्रा जब स्कूल की फीस भरने के पैसे न जुटा सकी तो उसने मोबाइल फोन चोरी करके यह सोचकर गिरवी रख दिया कि पैसों का इंतजाम होने पर मोबाइल फोन मालिक को फिर लौटा देगी। उसकी परिस्थिति से द्रवित डिटेक्टिव एजेंसी के परिवार ने उसे माफ कर दिया।
मन को छू लेने वाला और लॉक डाउन से गरीबों की बिगड़ी हालत को बयां करता यह किस्सा सुदामा नगर के धीरज दुबे के यहाँ हुआ।
गुरुवार दोपहर को दुबे का महंगा मोबाइल फोन घर से चोरी हो गया। डिटेक्टिव एजेंसी चलाने वाले दुबे को काफी खोज के बाद भी फोन नहीं मिला जबकि उनका घर 24 घण्टे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रहता है।
चोरी के दौरान किसी के भी घर में नहीं आने-जाने की पुष्टि ने पसोपेश और बढ़ा दी।
घरेलू कामकाज करने वाली नाबालिग बच्ची को दुबे परिवार के सदस्य घर के बच्चों की तरह ही मानते हैं और जानते हैं कि वह प्रतिभशाली है जिसे 11वीं की परीक्षा में 71 प्रतिशत अंक मिले थे। इसलिये उसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं कि वह चोरी कर सकती है।
शुक्रवार को दुबे द्वारकापुरी थाने रिपोर्ट लिखाने पहुंचे जहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि उनकी शिकायत थाना प्रभारी के आने पर लिखी जाएगी।
आखिर उन्होंने पुलिस सिटीजन कॉप सेवा पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई।
तभी वह नाबालिग काम करने घर आई। न चाहते हुए भी दुबे ने उससे भी मोबाइल के बारे में पूछा जिसपर वह थोड़ी असहज हो गई।
पेशे से डिटेक्टिव दुबे ने बच्ची को समझाइश दी और विश्वास में लेकर आश्वस्त किया कि अगर उससे पैसे की तंगी के चलते गलती हुई है तो वे उसकी शिकायत नहीं बल्कि मदद करेंगे।
अपने किये से असहज व अपराध बोध से परेशान प्रतिभशाली छात्रा ने सच्चाई बयां की और कहा कि उसने सिर्फ स्कूल फीस भरने जितनी राशि के बदले फोन गिरवी रखा था जो पैसे आने पर वह वापस लाकर चुपचाप घर रख देती। इतना बताकर वह रोने लगी। उसकी दास्तां सुनकर दुबे परिवार के सदस्यों की भी आँखे नम हो गई। छात्रा के भविष्य को देखते हुए न सिर्फ उसे माफ कर दिया बल्कि फोन गिरवी रखकर ढाई हजार रुपए देने वाले युवक के पैसे भी लौटा दिये।
गौरतलब है दुबे वरिष्ठ पत्रकार ऑक्टोपस इंटेलिजेंस के डायरेक्टर हैं व राजनीति व समाज सेवा से भी जुड़े हैं।