
कोरोना टीकाकरण में एक-दो ऐसे मामले भी सामने आए जिसमें एक व्यक्ति को पहली खुराक दूसरे टीके की और दूसरी खुराक किसी और टीके के लगे। अलग-अलग टीके लगने के बाद से यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस तरह से टीका लगाना सही है या नहीं। अब खुद सरकार ने बताया है कि क्या ऐसा किया जाना सही है या नहीं।
नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल ने कहा कि एक व्यक्ति को पहली खुराक दूसरे टीके की और दूसरी खुराक किसी और टीके लगाना वैज्ञानिक और सैद्धांतिक रूप से यह संभव है लेकिन, यह तय करने में समय लगेगा कि क्या इसकी सिफारिश की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस बारे में ठोस प्रमाण नहीं है आने वाले समय में ही यह पता चल सकेगा। दरअसल, यूके के एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि विभिन्न प्रकार के टीकों की खुराक को मिलाना सुरक्षित है, लेकिन इसके कई दुष्प्रभाव होंगे, अध्ययन से पता चला है।
वीके पॉल ने कहा कि यह मुंमकीन है। लेकिन अध्ययन की आवश्यकता है। निश्चित रूप से यह नहीं कहा जा सकता है कि खुराक के मिश्रण का अभ्यास किया जा सकता है। कोई मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। अब समय ही बताएगा कि भविष्य में ऐसा किया जाएगा या नहीं। यह अंतरराष्ट्रीय अध्ययन, विश्व स्वास्थ्य संगठन के निष्कर्षों आदि पर निर्भर करेगा। हमारे विशेषज्ञ भी लगातार अध्ययन कर रहे हैं।
देश में लग रही हैं दो वैक्सीन:-कोविशील्ड और कोवैक्सिन वो दो वैक्सीन हैं, जिन्हें लोगों को देश में लगाया जा रहा है. दोनों ही वैक्सीन की दो डोज लोगों को लगाई जा रही हैं. इन वैक्सीन की दूसरी डोज को बूस्टर डोज भी कहा जाता है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी कई एडवायजरी में बार-बार यह चेतावनी दी है कि किसी वैक्सीन की दूसरी डोज के तौर पर वही वैक्सीन लगवाएं, जिसकी पहली डोज लगी हो.
जिस स्टडी में यह कहा गया कि दोनों वैक्सीन को मिलाकर लगवाया जाना भी सुरक्षित है, उसे 2600 लोगों पर किया गया था. और इस दौरान दो अलग-अलग कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल किया गया था. एक प्रयोग में लोगों को एक डोज ऑक्सफोर्ड वैक्सीन का और दूसरा डोज फाइजर वैक्सीन का दिया गया था. दूसरे प्रयोग में लोगों को एक डोज मॉडेर्ना का और दूसरा डोज नोवावैक्स का आजमाया गया था.इस ट्रायल का मकसद यह जानना था कि दो अलग-अलग वैक्सीन का लगना कोविड पर कारगर है या नहीं. इस दौरान लोगों की प्रतिरोधक क्षमता का टेस्ट किया गया और पाया गया कि वैक्सीन के बुरे प्रभाव ज्यादा देर नहीं रहे.