कोरोना के डेल्टा वेरिएंट को लेकर जॉनसन एंड जॉनसन ने किया ये दावा

कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट ने एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इसी वेरिएंट के डर से कई देशों में कोरोना प्रतिबंध लौट आए हैं। कई रिपोर्टों में दावा किया गया कि यह वेरिएंट इतना खतरनाक है कि इस पर वैक्सीन भी असर नहीं करती है। इसीलिए इसका डर पूरी दुनिया में फैल गया लेकिन अब इन सब के बीच राहत की खबर यह है कि जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने दावा किया है कि कंपनी द्वारा निर्मित सिंगल-डोज कोविड -19 रोधी टीका  वायरस के डेल्टा  वेरिएंट के खिलाफ असरदार है.

सिंगल डोज वाला टीका गंभीर या बहुत गंभीर बीमारी के खिलाफ 85% असरदार पाया गया. कंपनी का दावा है कि इसने लोगों को अस्पताल में भर्ती होने और मौत से बचाया. टीका लगाने वाले 8 लोगों के ब्लड सैंपल्स से यह बात सामने आई है कि वैक्सीन डेल्टा समेत सभी तरह के वेरिएंट्स के खिलाफ असरदार है. J&J के चीफ साइंटिफिक ऑफिसर पॉल स्टॉफल्स ने कहा, ‘आज जिस स्टडी का ऐलान हुआ है, उसके मुताबिक जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन, दुनिया भर के लोगों की जान बचाने में मददगार है.’

दावा किया गया कि वैक्सीन की पहली डोज के 29 दिनों के भीतर डेल्टा वेरिएंट को बेअसर कर दिया. कंपनी ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील सहित वैश्विक स्तर पर वैक्सीन का असर एक जैसा था. स्टडी के दौरान इन क्षेत्रों में बीटा और जीटा वैरिएंट्स के मामले अधिक पाए जा रहे थे. J&J के एक और अधिकारी जोहान वान हूफ ने कहा ‘हम बेहद खुश हैं. हम इस बात को लेकर आश्वस्त है कि इस वैक्सीन नें बूस्टर डोज की कोई जरूरत नहीं है और यह सभी वैरिएंट्स पर असरदार है.’

कम से कम एक साल तक बूस्टर की जरूरत नहीं- कंपनी:-मौजूदा आंकड़ों के आधार हूफ ने कहा कि कंपनी का मानना है कि जिन लोगों को इसका टीका दिया गया है, उन्हें एक साल के भीतर बूस्टर डोज की जरूरत नहीं पड़ेगी. उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो भी हमें नहीं लगता की फार्मूलेशन बदलना पड़ेगा.

बता दें भारत सरकार भी जॉनसन एंड जॉनसन से टीके के मुद्दे पर बात कर रही है. हाल ही में जॉनसन एंड जॉनसन की भारतीय इकाई के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा था, ‘डीसीजीआई की हालिया घोषणा के मुताबिक, अब भारत में कोरोना-रोधी टीकों के क्लीनिकल स्टडीज को पूरा करने की कोई जरूरत नहीं है. हम भारत सरकार के साथ चर्चा कर रहे हैं और यह पता लगा रहे हैं कि भारत में अपनी सिंगल डोज वैक्सीन देने की हमारी क्षमता को कैसे बढ़ाया जाए.’

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