बिजली कंपनियों का निजीकरण रोकने सहित पांच सूत्रीय मांगो को लेकर संयुक्ती मोर्चा द्वारा धरना एवं ज्ञापन

बिजली कंपनियों का निजीकरण रोकने सहित पांच सूत्रीय मांगो को लेकर संयुक्ती मोर्चा द्वारा धरना एवं ज्ञापन
धार ( डाँ. अशोक शास्त्री ) मानसून सत्र के प्रस्ताकवित विद्युत सुधार अधिनियम 2021 के विरोध में बिजली कर्मी लामबंद हो गए हैं। 15 प्रमुख संगठनों के महागठबंधन मप्र विद्युत अधिकारी (कर्मचारी संयुक्त मोर्चा द्वारा मुख्यंमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री के नाम 27 जुलाई को एक ज्ञापन अधीक्षण यंत्री जेआर कनखरे धार को सौंपा गया। मप्र विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन के संभाग सचिव प्रेम रावल ने बताया कि अधिनियम दरअसल निजीकरण को बढावा देगा, इसलिए विरोध किया जा रहा है। नियमित, संविदा व आऊट सोर्स कर्मचारियों की प्रमुख मांगों के निराकरण के लिए लगातार पत्राचार भी किया जाता रहा है। केन्द्रं सरकार के आश्वाासन के बावजूद मानसून सत्र में उक्तह अधिनियम लाना जनभावनाओं के विपरित है। ज्ञापन में निजीकरण न करने सहित संविदा कर्मचारियेां के नियमितीकरण, आऊट सोर्स कर्मचारियों का कंपनी में संविलीकरण, योग्ययता का हवाला देकर आऊटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी से न निकालने, कोराना से मृत बिजलीकर्मियों को कोरोना योद्वा घोषित कर, उनके परिवार को 50 लाख रू0 की आर्थिक सहायता देने, अनुकंपा नियुक्ति देने के अलावा केन्द्र के समान महंगाई भत्ता, देने की मांग रखी गई है। इस अवसर पर संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारी एवं साथी जिनमें क्षेत्रीय सचिव राजेन्द्रर सिंह चौहान, कार्यपालन यंत्रीगण सर्व विरेन्द्र व्यास, मोहम्मद अनस, सहायक/कनिष्ठम यंत्री गण कैलाश सोलंकी, राजू कोठे, अनिल अमोदे, देवकुमार शर्मा, संदीप पटेल सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित थे।

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