खरी खरी

#सौटंच

#अरविंदतिवारी
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• शंकर लालवानी, कृष्ण मुरारी मोघे और गौरव रणदिवे के साथ ही शहर के भाजपा विधायक फुले नहीं समा रहे हैं। ऐसा लग रहा है मानो उन्होंने कोई बड़ा किला जीत लिया। पर शहर के बाजार खुलवाने के मामले में दिखाया गया यह अति उत्साह कहीं इन नेताओं के लिए परेशानी का कारण न बन जाए। शहर का व्यापार व्यवसाय बचाने के नाम पर जिन बाजारों को खोलने की पैरवी इन लोगों ने की उनमें से ज्यादातर की दुकान है 30 जुलाई से 3 अगस्त के बीच खाली पड़ी रही। इतना जरूर हुआ कि तफरी के लिए बड़ी संख्या में लोग शहर की सड़कों पर निकल आए। इन पर किसी का नियंत्रण नहीं चला। बाजारों की यह भीड़ बमुश्किल लाइन पर आए शहर के लिए परेशानी का कारण बनती नजर आ रही है।

• आनंदीबेन पटेल के मध्य प्रदेश के कार्यवाहक राज्यपाल की भूमिका में आने के बाद कुलपति पद के कुछ दावेदार बल्ले बल्ले हो रहे हैं। इनमें से एक दो तो यह मानकर चल रहे हैं कि अब तो वे कुलपति बन ही जाएंगे।उनके ऐसा भ्रम पालने का कारण पिछली बार कुलपति पद के लिए हुआ डॉक्टर नरेंद्र धाकड़ का चयन माना जा रहा है। जिस रास्ते डॉक्टर धाकड़ ने यह पद हासिल किया था वह रास्ता इस बार के कुछ दावेदार भी अपनाने का सोच रहे क्योंकि सफलता की सीढी यही है। यह रास्ता क्या है यह तो अनारा बेन पटेल ही बता सकती है। हां इससे प्रोफेसर आशुतोष मिश्रा जैसे मजबूत दावेदारों की परेशानी बढ़ सकती है।

• नगर निगम में देवेंद्र सिंह का वजन लगातार बढ़ रहा वे फिर उसी स्थिति में आ गए हैं जिस स्थिति में मनीष सिंह के निगमायुक्त रहते थे। यकायक वजन बढ़ने के कुछ कारण तो लोगों को समझ में आ रहे हैं लेकिन कुछ कारण तो अभी भी लोगों को पता नहीं। निगम में बढ़ते रूतबे से सी हमें तो कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा है। लेकिन पीली गाड़ियों में घूमने वाले निगम के कारिंदों ने जरूर उनके नाम का खौफ पैदा कर धंधे बाजी शुरू कर दी है। यह लोग ऐसा दिखा रहे हैं मानो उन्हें ऊपर से मनमानी करने की हरी झंडी मिल गई है। यह तो देवेंद्र सिंह ही बता पाएंगे की असलियत क्या है।

• सीएसपी हरीश मोटवानी को वापस इंदौर जाने में तो सांसद शंकर लालवानी मददगार बने लेकिन जयंत राठौर के इंदौर वापसी में मंत्री उषा ठाकुर की अहम भूमिका रही। कांग्रेस सरकार के दौर में जब राठौर को बदनावर से इंदौर भेजा गया था तब तत्कालीन गृहमंत्री बाला बच्चन ने यह कहते हुए आदेश निरस्त करवा दिया था कि मैं गृहमंत्री के साथी इंदौर का प्रभारी मंत्री और मेरी जानकारी के बिना ही यह आदेश कैसे जारी हो गया। राठौर तब तो चुपचाप बैठ गए लेकिन इस बार उनका दांव खाली नहीं गया। पर मोटवानी हो या राठौर दोनों ही विजयनगर सीएसपी तो बन नहीं पाएंगे क्योंकि यहां गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के प्रिय पात्र राकेश गुप्ता मोर्चा संभाल चुके हैं।

• अजय देव शर्मा कलेक्ट्रेट में फिर पुरानी भूमिका में आ गए। पिछले कुछ समय में उनकी पोस्टिंग में बार-बार बदलाव हुआ लेकिन आखिरकार एडीएम बन ही गये।‌ लेकिन करोना काल में रात दिन एक करने वाले बी बी एस तोमर क्यों कलेक्टर मनीष सिंह की वक्र दृष्टि का शिकार हुए यह कोई समझ नहीं पा रहा है। कलेक्टोरेट के गलियारों में भी यह बदलाव चर्चा में रहा। इधर तोमर को एडीएम जैसा अहम पद खोने के बावजूद खुशी इस बात की है कि इंदौर में तो बने रह पाए। तोमर जल्दी ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं और उनकी दिली इच्छा है कि रिटायरमेंट इंदौर से ही हो जा हां इसके लिए कलेक्टर की अब कृपा दृष्टि बहुत जरूरी है।‌

• इंदौर से लेकर दिल्ली तक गोविंद मालू का काढ़ा बहुत चर्चा में है। कोरोना काल में मालू ने आयुर्वेद के जानकार लोगों से राय लेकर एक काढ़ा तैयार करवाया और घर पहुंच सेवा की। जैसे ही यह काढा लोगों तक पहुंचा उसकी डिमांड बढ़ गई। पिछले दिनों जब इसका वितरण बंद किया गया तब तक करीब 25000 पैकेट बांटे जा चुके थे। बारास्ता केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर यह काढा दिल्ली के कुछ बड़े नेताओं तक भी पहुंचा और उन्होंने उपयोग करने के बाद हाथो हाथ और काढे की डिमांड भी मालू तक पहुंचा दी।

• जस्टिस वी एस कोकजे और हुकुम चंद सावला जैसे विश्व हिंदू परिषद के दिग्गज तो कोरोना संक्रमण के चलते उम्र की अधिकता के कारण राम मंदिर के भूमि पूजन समारोह में शामिल नहीं हो पाए। लेकिन धार जिले के मनावर निवासी बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक सोहन सोलंकी को जरूर इस कार्यक्रम में मालवा निमाड़ का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिल गया। सोलंकी संघ में अनेक महत्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन करने के बाद इन दिनों बजरंग दल के शीर्ष पद पर हैं।

और अंत में

सुर्य अस्त टीआई मस्त ।इन्दौर के पूर्वी क्षेत्र के एक थाना प्रभारी रात 9 बजे नशे में मस्त हो जाते है, इसकी चर्चा उनके क्षेत्र में आम हो गई है। लेकिन आला अफसर शायद इससे बेखबर से है। क्योंकि मामला सार्वजनिक हो जाने के बाद भी अफसरों ने इन साहब की सुध नही ली है। खेर आप ही पता लगाइए ये कौन अधिकारी है कि सुर्य अस्त होते ही मस्त हो जाते है।

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