क्रूरता! तालिबान ने युवक की डेड बॉडी को बीच चौराहे टांग दिया, बोला- किडनैपिंग में था शामिल

तालिबान ने पिछले महीने अफगानिस्तान पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया था। तालिबान ने दुनिया के सामने दावा किया था कि वह अब बदल चुका है। 20 साल पहले और अब के तालिबान में जमीन आसमान का फर्क है। हालांकि, समय के साथ-साथ तालिबान की बर्बरता सामने आने लगी हैं। बताया जा रहा है कि तालिबान ने बीच सड़क पर एक शव को क्रेन पर टांग दिया। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि तालिबान ने एक डेड बॉडी को वेस्टर्न अफगानिस्तान में हेरात शहर के मुख्य चौराहे पर टांग दिया। इस इलाके के एक तरफ फार्मेंसी की दुकान चलाने वाले वज़ीर अहमद सिद्दीकी ने ‘Associated Press’ को बताया कि वहां चार डेड बॉडी लाए गए थे। तीन अन्य डेड बॉडी को दूसरे स्क्वायर पर टांगने के लिए ले जाया गया है।

सिद्दीकी ने कहा कि यह चारों एक किडनैपिंग के मामले में शामिल थे। इन सभी को पुलिस ने मार दिया। तालिबान के संस्थापकों में से एक मुल्ला नुरूद्दीन तुराबी ने इसी हफ्ते कहा था कि कठोर सजा का प्रावधान एक बार फिर लागू होगा लेकिन शायद जनता के बीच नहीं।

15 अगस्त को काबुल पर कब्जा करने के बाद पूरे देश पर कब्जा कर लिया। पूरी दुनिया की नजर अभी इस वक्त अफगानिस्तान पर टिकी है कि वहां तालिबान किस तरह शासन करता है। अफगानिस्तान में तालिबान का क्रूर चेहरा साल 1990 के दौरान दुनिया ने देखा है। तालिबान अपनी क्रूरता के लिए विश्व भर में कुख्यात माना जाता है।

बता दें कि भारत और अमेरिका ने तालिबान से उसके द्वारा जताई गई प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और महिलाओं, बच्चों एवं अल्पसंख्यक समूहों सहित सभी अफगानों के मानवाधिकारों का सम्मान करने का आह्वान किया है। दोनों देशों ने अफगानिस्तान के नये शासकों से यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है कि युद्धग्रस्त देश की धरती का किसी भी अन्य देश को धमकाने या हमला करने या आतंकवादियों को पनाह या प्रशिक्षण देने के लिए फिर से इस्तेमाल न हो सके।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच शुक्रवार को यहां पहली आमने-सामने की द्विपक्षीय बैठक के बाद भारतीय-अमेरिकी नेताओं के संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने अफगानिस्तान में आतंकवाद से निपटने के महत्व पर विशेष जोर दिया।

संयुक्त बयान के मुताबिक दोनों नेताओं ने संकल्प किया कि तालिबान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के प्रस्ताव 2593 (2021) का पालन करना चाहिए जिसमें कहा गया है कि अफगानिस्तान की सरजमीं का किसी अन्य देश को धमकाने या उसपर हमला करने या किसी आतंकवादी को प्रशिक्षित करने या शरण देने या आतंकवादी हमलों को प्रायोजित करने के लिए दोबारा कभी नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही अफगानिस्तान में आतंकवाद से निपटने के महत्व पर जोर दिया।

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