
देश की आजादी को भीख में मिली बताने के बाद से बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत मीडिया की सुर्खियों में बनी हुई है। कंगना रनौत के इस बयान के बाद उन्हें लगातार सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है। तो वहीं, आजादी को भीख बताए जाने वाले बयान पर बीजेपी नेता और पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी ने नाराजगी जाहिर करते हुए तीखी प्रतिक्रिया भी दी थी। जिसपर अब कंगना ने भी वरुण गांधी को जवाब दिया है।कंगना ने वरुण गांधी के ट्वीट को इंस्टाग्राम स्टोरी पर लगाते हुए भड़ास निकाली है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए लिखा है, गांधी को आजादी भीख में मिली थी, जा अब और रो। कंगना के इस बयान ने कई लोगों को नाराज किया है। उनका नाम ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है।

कंगना ने निकाली भड़ास:-कंगना रनौत एक बार फिर गलत वजह से सुर्खियों में हैं। देश को आजादी भीख में मिलने वाले उनके बयान पर वरुण गांधी ने ट्वीट कर नाराजगी जताई थी। कंगना ने वरुण का ट्वीटअपने इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए लिखा है, जबकि मैंने साफतौर पर कहा था कि 1857 की क्रांति को नियंत्रित किया गया था जिसकी वजह से ब्रिटिश शासन की तरफ से और अत्याचार और निर्दयता की गई थी और करीब एक सदी बाद हमें आजादी दी गई वह भी गांधी की भीख पर। जा अब और रो।
कंगना ने निकाली भड़ास:-कंगना रनौत एक बार फिर गलत वजह से सुर्खियों में हैं। देश को आजादी भीख में मिलने वाले उनके बयान पर वरुण गांधी ने ट्वीट कर नाराजगी जताई थी। कंगना ने वरुण का ट्वीटअपने इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए लिखा है, जबकि मैंने साफतौर पर कहा था कि 1857 की क्रांति को नियंत्रित किया गया था जिसकी वजह से ब्रिटिश शासन की तरफ से और अत्याचार और निर्दयता की गई थी और करीब एक सदी बाद हमें आजादी दी गई वह भी गांधी की भीख पर। जा अब और रो।
क्या बोली थीं कंगना:-टाइम्स नाऊ सम्मिट में कंगना रनौत ने कहा था कि कांग्रेस राज ब्रिटिश शासन का ही आगे का रूप था और देश को असली आजादी 2014 में मिली। उनका इशारा नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की ओर था। कंगना ने ये भी कहा था कि 1947 में देश को आजादी भीख में मिली थी।
ये था वरुण गांधी का ट्वीट:-कंगना के इस बयान पर वरुण गांधी ने ट्वीट किया था, कभी महात्मा गांधी जी के त्याग और तपस्या का अपमान, कभी उनके हत्यारे का सम्मान और अब शहीद मंगल पाण्डेय से लेकर रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और लाखों स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों का तिरस्कार। इस सोच को मैं पागलपन कहूं या फिर देशद्रोह?