
दुनिया के अधिकतर देश कोरोना से जंग लड़ रहे हैं. संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीनेशन का काम जोरों पर है. इन सबके बीच अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने कोरोना वायरस के हाई रिस्क मरीजों के लिए मार्क की गोली को मंजूरी दे दी है. एफडीए वैज्ञानिक पैट्रिजिया कैवाज़ोनी ने कहा, “आज का प्राधिकरण ने कोविड-19 वायरस से बचाव के लिए एक गोली को मंजूरी दे दी है. इसे आसानी से लिया जा सकता है.” इससे कोरोना वायरस के लिए पहला घरेलू उपचार हो सकेगा. दावा है कि यह गोली वायरस को तेजी से फैलने से रोकती है. अध्ययन में पाया गया है कि अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु को रोकने में मार्क की कोरोना पिल 90% प्रभावी थीं. हाल के लैब से मिले आंकड़ों से पता चलता है कि यह दवा ओमिक्रॉन वेरिएंट पर भी प्रभावी है. यह दवा ज्यादा गंभीर मरीजों और कम से कम 12 वर्ष की आयु के रोगियों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जा सकेगी.
एफडीए ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि फाइजर और मार्क दोनों गोलियों को टीकों को बदलने के बजाय पूरक होना चाहिए. एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक मार्क की गोली को कोरोना के लक्षण दिखने के बाद 5 दिनों के भीतर लिया जा सकता है. एक बार यह गोली लिए जाने के बाद यह कोरोना से होने वाली मृत्यु को 30 प्रतिशत तक कम कर सकता है. यह एंटीवायरल गोली कोरोना के लक्षणों को कम कर देती है और तेजी से स्वस्थ होने में मदद करती है. जबकि दोनों उपचार नैदानिक परीक्षणों में आम तौर पर सुरक्षित पाए गए थे, मर्क की गोली के बारे में अधिक संभावित चिंताओं को उठाया गया है, जिसे मोल्नुपिरवीर कहा जाता है.
इन्हें नहीं दी जाएगी ये गोली
एफडीए ने कहा कि 18 साल से कम उम्र के लोगों को मार्क की गोली फिलहाल नहीं दी जाएगी. क्योंकि यह हड्डी और अपास्थि के डेवलपमेंट को नुकसान पहुंचा सकता है. इसके अलावा यह गर्भ में पलने वाले बच्चे को भी नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए यह गर्भवती महिलाओं को भी नहीं दी जाएगी.
माना जा रहा है कि यह गोली गरीब देशों में अस्पतालों पर पड़ने वाले बोझ को कम करने में मददगार साबित होगा. यह गोली महामारी के खिलाफ लड़ने के लिए जरूरी दो तरीकों औषधि और रोकथाम में मददगार होगी.