गुज़रो न बस क़रीब से ख़याल की तरह

आ जाओ ज़िंदगी में नए साल की तरह

नव वर्ष के स्वागत के जश्न में महज 3 दिन ही बचे हैं. ऐसे में हर कोई नए साल के स्वागत की तैयारियों में जुटा है. पुराने साल को अलविदा कहने और नए साल का स्वागत करने के लिए हम सब आतुर हैं नए साल का त्योहार संसार के सबसे पुराने त्योहारों में से एक है, लेकिन समय के साथ इस उत्सव की तारीख और प्रकृति बदल गई है। नववर्ष के स्वागत के जश्न की यह परंपरा लगभग 4000 साल पहले बेबीलोन में शुरू हुई थी उस समय नए वर्ष का ये त्यौहार 21 मार्च को मनाया जाता था जो कि वसंत के आगमन की तिथि भी मानी जाती थी। रोम के शासक जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व 45वें वर्ष में जब जूलियन कैलेंडर की स्थापना की, उस समय विश्व में पहली बार 1 जनवरी को नए वर्ष का उत्सव मनाया गया, आपको पता है कि कई देश अलग-अलग समय पर नववर्ष मनाते हैं क्योंकि उनका कैलेंडर अंग्रेज़ी या रोमन कैलेंडर से मेल नहीं खाता.

हिब्रू नव वर्ष: हिब्रू मान्यताओं के अनुसार भगवान द्वारा विश्व को बनाने में सात दिन लगे थे। इन सात दिनों के संधान के बाद नया वर्ष मनाया जाता है। यह दिन ग्रेगरी कैलेंडर के मुताबिक 5 सितम्बर से 5 अक्टूबर के बीच आता है।
इस्लामी नव वर्ष : इस्लामिक कैलेंडर का नया साल मुहर्रम होता है। इस्लामी कैलेंडर एक पूर्णतया चन्द्र आधारित कैलेंडर है जिसके कारण इसके बारह मासों का चक्र 33 वर्षों में सौर कैलेंडर को एक बार घूम लेता है। इसके कारण नव वर्ष प्रचलित ग्रेगरी कैलेंडर में अलग अलग महीनों में पड़ता है।
पारसी नववर्ष : तीन हज़ार साल पहले जिस दिन ईरान में शाह जमशेद ने सिंहासन ग्रहण किया उसे नया दिन या नवरोज़ कहा गया, नवरोज दो पारसी शब्दों नव और रोज से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है- नयादिन, नवरोज के त्योहार के साथ पारसी समुदाय के
नए साल की शुरुआत होती है। इस दिन से ही ईरानी कैलेंडर की भी शुरुआत होती है 2022 में यह 16 अगस्त को मनाया जाएगा।
भारत में नव वर्ष : भारत के विभिन्न हिस्सों में नव वर्ष अलग-अलग तिथियों को मनाया जाता है। प्रायः ये तिथि मार्च और अप्रैल के महीने में पड़ती है। पंजाब
में नया साल बैसाखी नाम से 13 अप्रैल को मनाया जाता है । सिख नानकशाही कैलंडर के अनुसार 14 मार्च को होला-मोहल्ला नया साल होता है। इसी तिथि के आसपास बंगाली तथा तमिळ नव वर्ष भी आता है। तेलगु नया साल मार्च-अप्रैल के बीच आता है।
आंध्रप्रदेश में इसे उगादी (युगादि=युग+आदि का अपभ्रंश) के रूप में मनाते हैं।यह चैत्र महीने का पहला दिन होता है। तमिल नया साल विशु 13 या 14 अप्रैल को तमिलनाडु और केरल में मनाया जाता है तमिलनाडु में पोंगल 15 जनवरी को नए साल के रूप में आधिकारिक तौर पर भी मनाया जाता है। कश्मीरी कैलेंडर नवरेह का पहला दिन 19 मार्च को होता है। महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के रूप में नया साल
मार्च-अप्रैल के महीने में मनाया जाता है, कन्नड नया वर्ष उगाडी कर्नाटक के लोग चैत्र माह के पहले दिन को मनाते हैं, सिंधी उत्सव चेटी चंड, उगाड़ी और गुड़ी
पड़वा एक ही दिन मनाया जाता है। मदुरै में चित्रैय महीने में चित्रैय तिरूविजा नए साल के रूप में मनाया जाता है। मारवाड़ी नया साल दीपावली के दिन होता है। गुजराती नया साल दीपावली के दूसरे दिन होता है और इस दिन जैन धर्म का नववर्ष भी होता है।

विश्व में नए साल की पहली तारीख के बारे में इतनी विविधताओ के होने के बाद भी रोमन कैलेंडर के अनुसार नये साल के स्वागत का जश्न 01 जनवरी को दुनिया भर में समान रूप से और व्यापक स्वरूप में मनाया जाता है। नए साल के स्वागत की तैयारीयां दिसंबर माह के आखिरी हफ्ते से ही शुरू हो जाती है और नए साल का मुख्य जश्न 31 दिसंबर की रात से शुरू होता है। आइए आपको बताते हैं कि दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में नये साल के स्वागत से किस तरह से किया जाता है और उनके साथ कौनसी दिलचस्प बातें जुड़ी हुई हैं.

अमेरिका चीज़ें फेंक देना: अमेरिका में टाइम्स स्क्वायर पर नये साल का सबसे अहम जश्न होता है और सबकी निगाहें झंडे के लंबे खंभे से नीचे उतरती एक रंगीन चमकती गेंद पर होती है. असल में यह नये साल के लिए काउंटडाउन का प्रतीक है. कई
अमेरिकी शहरों में लोग नववर्ष की पूर्व संध्या पर पारंपरिक तौर पर कुछ चीज़ें ऊंचाई से फेंकते हैं जैसे इंडियाना में लोग ऊंचाई से तरबूज़ फेंकते हैं.
*डेनमार्क प्लेटें तोड़कर स्वागत की परंपरा : अगर आपको अपने दरवाज़े पर कई सारी प्लेटें टूटी हुई मिलें, तो आप कन्फ्यूज़ हो सकते हैं. लेकिन, डेनमार्क में इस बात से हैरानी नहीं होती. यहां मान्यता है कि आने वाला साल खुशकिस्मती लेकर आएगा इसलिए डेनमार्क में लोग अपने दोस्तों या रिश्तेदारों के घर जाकर उनके दरवाज़े पर प्लेटें तोड़कर फेंक देते हैं. यह शुभकामना संदेश की तरह होता है.
रोमानिया भालू बनकर डांस: क्रिसमस पर बच्चों या बड़ों के सैंटा की पोशाक पहनने के बारे में आपने सुना होगा लेकिन रोमानिया में नववर्ष का स्वागत करने के लिए लोग भालू जैसी पोशाक पहनकर डांस करते हैं. इसके पीछे मान्यता है कि नये साल में बुरी आत्माओं से छुटकारा मिले. पुरानी रोमनियाई कहानियों में भालू का चरित्र बेहद खास रहा हैं और भालू लोगों की रक्षा व इलाज करने के लिए मददगार माने जाते
रहे हैं.
ब्राज़ील दाल खाने का रिवाज : ब्राज़ील में नये साल के स्वागत के लिए अनोखी परंपरा है. नये साल के मौके पर यहां लोग खास तौर पर दाल पकाकर खाते हैं. दाल को धन दौलत का प्रतीक माना जाता है इसलिए यहां मान्यता है कि दाल खाई जाए तो नये
साल में समृद्धि हासिल होती है.
स्पेन 12 बजते ही अंगूर खाना: स्पेन में प्रचलित परंपरा को सुनकर आप हैरान भी हो सकते हैं और यह आपको बहुत दिलचस्प भी लग सकता है. स्पेन में जैसे ही घड़ी में 12 बजते हैं तो लोग अंगूरों की तरफ टूट पड़ते हैं. मान्यता है कि घड़ी में मध्यरात्रि का समय होते ही 12 बार अंगूर खाने से आने वाले 12 महीने आपके लिए भाग्य और खुशहाली लाते हैं.
जापान घंटियां बजाना : नये साल के स्वागत से जुड़ी परंपराओं को लेकर अगर एशियाई देशों की बात की जाए तो जापान और ​दक्षिण कोरिया में घंटी बजाना अत्यधिक प्रचलित रिवाज है. जगह जगह नववर्ष की पूर्व संध्या पर लोग घंटी बजाते हुए दिखते हैं. जापान में तो मान्यता के हिसाब से “याबूरी” यानि नववर्ष के स्वागत में 108 बार घंटी बजाना शुभ माना जाता है.
अफ्रीका की अनोखी मान्यता : दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में मान्यता है कि नये साल के स्वागत में घर का गैर ज़रूरी सामान बाहर कर दिया जाता है. लेकिन इसे कबाड़ी को बेचना या फिर रीसेल करने जैसी प्रथा नहीं है बल्कि अपनी खिड़कियों से लोग कुछ सामान खास तौर से पुराना फर्नीचर बाहर फेंकते हैं. इसके पीछे मान्यता यही है कि नये साल में नया सौभाग्य उन्हें हासिल हो.
दक्षिण अमेरिका खाली सूटकेस के साथ घूमना : दक्षिण अमेरिका के कुछ देशों में नये साल की पूर्व संध्या के मौके पर आप लोगों को सामान्य जगहों पर सूटकेस लिये हुए घूमते देख सकते हैं. इसके पीछे लोग मानते हैं कि खाली सूटकेस लेकर वॉक करने का मतलब यह है कि आने वाला साल रोमांच से भरा रहेगा.
चीन सफाई और लाल रंग से पुताई : चीन में
एक महीने पहले से ही घरों की सफ़ाई और रंग-रोगन चालू हो जाता है। इस त्योहार में लाल रंग महत्वपूर्णहोता है और घरों के खिड़की दरवाज़े अक्सर इसी रंग से रंगे जाते हैं। काग़ज़ के बंदनवार और सजावट की जाती है। पहनने में रंगों का ख़ास
ध्यान रखा जाता है। लाल पहनना शुभ, और काला या सफ़ेद अशुभ समझा जाता है। यहाँ लाल ड्रेगन दीर्घ आयु और सुख समृद्धि का प्रतीक है।
थाइलैंड पानी का छिड़काव : थाइलैंड में नए साल के त्यौहार को “सोन्गक्रान” कहते हैं। उनका नए साल का यह त्योहार 13 से 15 अप्रैल तक चलता है। रीति के अनुसार सब लोग एक दूसरे पर पानी का छिड़काव करते हैं। बाल्टियाँ भर-भर कर किसी पर भी निशाना साधा जाता है। गौतम बुद्ध की मूर्तियों का स्नान करवाया जाता है और प्रार्थना के साथ-साथ चावल, फल, मिठाइयाँ आदि का दान किया जाता है।
म्यांमार खुशबूदार पानी की बौछार : म्यांमार में, नव वर्ष के उत्सव को ‘तिजान’ कहते हैं जो तीन दिन चलता है। यह पर्व अप्रैल के मध्य में मनाया जाता है। भारत में होली की तरह इस दिन एक दूसरे को पानी से भिगो देने की परंपरा इस पर्व का प्रमुख अंग है। अंतर इतना है कि इस पानी में रंग की जगह इत्र पड़ा होता है। प्लास्टिक की पिचकारियों में पानी भर कर लोग बिना छत की गाड़ियों में सवार होकर एक दूसरे पर खुशबूदार पानी की बौछारें करते चलते हैं।
अफ़ग़ानिस्तान सात फलों का पेय : अफ़ग़ानिस्तान में नव वर्ष पहली जनवरी को न मनाकर ‘अमल’ की पहली तारीख अर्थात गेगरी कैलेंडर की 21 मार्च को मनाया जाता है।20 मार्च नई दुनिया का प्रमुख दिन होता है। उस रात हरी सब्ज़ियों के साथ-साथ कढ़ी-चावल भी बनते हैं। यहाँ के सात फलों को मिलाकर एक पेय ‘मेवाना नोबराज’ अर्थात ‘नव वर्ष का मेवा’ बनाया जाता है।
*आतिशबाज़ी के नज़ारे : नये साल के स्वागत में पटाखे फोड़ना शायद सबसे आम तरीका है. 31 दिसंबर और 1 जनवरी की मध्यरात्रि में कई देशों में इस तरह जश्न मनाया जाता है. नये साल के स्वागत में आतिशबाज़ी के नज़ारों के लिए न्यूज़ीलैंड का ऑकलैंड स्काय टावर काफी मशहूर है. इसी तरह, ऑस्ट्रेलिया में सिडनी हार्बर पर भी आतिशबाज़ी दर्शनीय होती है. इनके अलावा, कनाडा के टोरंटो, ब्राज़ील के रियो में भी आसमान रंग बिरंगे पटाखों से नहाता है.

नये साल का पहला दिन सबके लिए बहुत ही खास होता है, इसको मनाने के पीछे यह मान्यता है कि साल का पहला दिन अगर उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाए, तो पूरा साल इसी उत्साह और उमंग के साथ खुशियों भरा बीतेगा इस दिन हम गुजरे साल की
गलतियों पर ध्यान देते हुए अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए नई योजनाएं बनाते हैं। व्यापारी अपने व्यापार को आगे ले जाने की नई तरकीबें सोचते है। तो कुछ लोग अपने अंदर अच्छी आदतें डालने की कोशिश करते हैं । नया साल एक नई शुरूआत
को दर्शाता है और हमेशा आगे बढ़ने की सीख देता है। पुराने साल में हमने जो भी किया, सीखा, सफल या असफल हुए उससे सीख लेकर, एक नई उम्मीद के साथ आगे बढ़ना चाहिए। जिस प्रकार हम पुराने साल के समाप्त होने पर दुखी नहीं होते बल्‍कि नए
साल का स्वागत बड़े उत्साह और खुशी के साथ करते हैं, उसी तरह जीवन में भी बीते हुए समय को लेकर हमें दुखी नहीं होना चाहिए। जो बीत गया उसके बारे में सोचने की अपेक्षा आने वाले अवसरों का स्वागत करें और उनके जरिये जीवन को बेहतर बनाने की
कोशिश करें।

नव वर्ष के पहले दिन के स्वागत के लिए अधिकांश देशों में सभी लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और इसे ज्यादा से ज्यादा स्वच्छ बनाते हैं। घर के आंतरिक और बाहरी हिस्सों में विशेष सजावट की जाती है। विशेष रूप से, घर का दरवाज़ा आंगतुकों के लिए आकर्षक और सुंदर लगना चाहिए। इन सजावटों में फूलों की माला, चाक-पाउडर, रंग और अन्य वस्तुओ से बनाये गए प्राकृतिक दृश्य शामिल होते हैं।साथ ही, नहाना और तैयार होना भी विशेष महत्वपूर्ण होता है। मुलाकात और शुभकामनाओं के बाद, जश्न शुरू होता है और लोग विभिन्न और विशेष आहारों का आनंद
उठाते हैं। मेहमानों का स्वागत करने के लिए घर के दरवाज़े पर उनके ऊपर गुलाबजल या अन्य सुगंधित द्रव्य छिड़का जाता है। अक्सर, लोग गरीबों को दान देने के लिए भी इस पवित्र समय का प्रयोग करते हैं।

भारतीय परंपरा के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिप्रदा को मनाए जाने वाले नव वर्ष का स्वागत सिर्फ मनुष्य ही नहीं बल्कि पूरी प्रकृति भी करती है, यह बसंत ऋतु के
आगमन का समय होता है इस समय पौधों पर विविध आकार प्रकार एवं अनन्य रंगो के फूल बिखरे होते हैं। खेत सरसों के फूलों से ढके रहते है, सुबह-सुबह कोयल की आवाज सुनाई देती है, पूरी धरती दुल्हन की तरह सजी रहती है, ऐसा लगता है मानो नवरात्रि में माँ के धरती पर आगमन की प्रतीक्षा कर रही हो। नववर्ष का आरंभ माँ के आशीर्वाद के साथ होता है और नववर्ष के नए सफर की शुरूआत के इस पर्व को मनाने और आशीर्वाद देने स्वयं माँ पूरे नौ दिन तक धरती पर आती हैं।

– राजकुमार जैन (स्वतंत्र विचारक)

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