” भारतीय नववर्ष और अंग्रेजी नववर्ष मे अंतर ” ( डाँ.अशोक शास्त्री )

” भारतीय नववर्ष और अंग्रेजी नववर्ष मे अंतर ” ( डाँ.अशोक शास्त्री )

भारत मे कुछ लोग अपना नूतन वर्ष भूल गए है और अंग्रेजी नववर्ष मनाने लगे है । इसमे किसी भारतीय की गलती नही है क्योंकि अंग्रेजों ने हारे देश 190 वर्ष राज किया है और अंग्रेजों ने भारतीय संस्कृति समाप्त कर अपनी पश्चिमी संस्कृति थोपना चाही उसके कारण आज भी कई भारतीय मानसिक गुलाम हो गए जिसके कारण वे भारतीय नववर्ष भूल गए और ईसाई और अंग्रेजों का नया साल मना रहे है । 01 जनवरी आने के पहले ही भारतवासी नववर्ष की बधाई देने लगते है । उक्त जानकारी मे डाँ.अशोक शास्त्री ने अंग्रेजी नववर्ष और हमारी भारतीय सांस्कृतिक हिंदू नववर्ष मे अंतर को बताते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी से इन दोनों के महत्व को देखते हुए अपना निर्णय ले ।
डाँ.अशोक शास्त्री ने बताया कि भारत देश त्योहारों का देश है , सनातन ( हिंदू ) धर्म मे लगभग 40 त्योहार आते है यह त्यौहार करीब हर महिने या उससे भी अधिक आते है जिससे जीवन मे हमेशा खुशियां रहती है और बडी बात है कि हिंदू त्योहारों मे एक भी ऐसा त्योहार नही है जिसमे शराब पीना , पशु हत्या करना , मांस भक्षण करना , पार्टी आदि के नाम पर दुष्कर्म को बढावा मिलता है । ये सनातन हिंदू धर्म की महिमा है । भारतीय हर त्यौहार के पीछे कुछ न कुछ वैज्ञानिक तथ्य भी छूपे होते है जो जीवन का सर्वांगीण विकास करते है ।
डाँ.अशोक शास्त्री के अनुसार ईसाई धर्म मे 01 जनवरी को जो नया वर्ष मनाते है उसमे कुछ तो नई अनुभूति होना चाहिए लेकिन ऐसा कुछ नही होता है ।
रोमन देश के अनुसार ईसाई धर्म का नववर्ष 01 जनवरी को और भारतीय नववर्ष ( विक्रम संवत )चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है । आईये देखते है दोनों मे तुलनात्मक अंतर क्या है ?
1 – प्रकृति :– 01 जनवरी को कोई अंतर नही जैसा दिसंबर वैसा जनवरी । चैत्र मास मे चारों तरफ फूल खिल जाते है । पेडों पर नए पत्ते आ जाते है । चारों तरफ हरियाली मानों प्रकृति नया साल मना रहो हो ।
2 – मौसम :– दिसंबर और जनवरी मे वही वस्त्र , कंबल , रजाई , ठिठुरते हाथ पैर । जबकी चैत्र मास मे सर्दी जा रही होती है । गर्मी का आगमन होने जा रहा होता है ।
3 – शिक्षा :– विद्यालयों का नया सत्र , दिसंबर – जनवरी मे वही कक्षा , कुछ नया नही । जबकी मार्च – अप्रेल मे स्कूलों का रिजल्ट आता है नई कक्षा , नया सत्र यानि विद्यर्थियों का नया साल ।
4 – वित्तीय वर्ष :– दिसंबर – जनवरी मे कोई खातों की क्लोजिंग नही होती । जबकी 31 मार्च को बैंको की आडिट क्लोजिंग होती है नए बहीखाते खोले जाते है ।
5 – कैलेंडर :– जनवरी मे सिर्फ नया कैलेंडर आता है ।जबकी चैत्र माह मे ग्रह नक्षत्र के हिसाब से नया पंचांग आता है । उसी से सभी भारतीय पर्व , विवाह और अन्य मुहूर्त देखे जाते है । इसके बिना हिंदू समाज जीवन की कल्पना भी नही कर सकता इतना महत्वपूर्ण है ये कैलेंडर यानि पंचांग ।
6 – किसान :– दिसंबर – जनवरी मै खेतों मे वही फसल होती है । जबकी मार्च – अप्रैल मे फसल कटती है । नया अनाज घर मे आता है तो किसानों का नया साल और उत्साह ।
7 – पर्व मनने की विधि :– 31 दिसंबर की रात नए साल के स्वागत के लिए लोग जमकर शराब पीते है , हंगामा करते है , रात को शराब पीकर गाडी चलाने से दुर्घटना की संभावना , बलात्कार जैसी वारदात , पुलिस प्रशासन बेहाल और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विनाश होता है । जबकी भारतीय नववर्ष व्रत उपवास से आरंभ होता है । पहला नवरात्र होता है । घर घर मे माता जी ( शक्ति ) की आराधना होती है । गरीबों को मिठाई , जीवन उपयोगी सामग्री बांटी जाती है । पूजन पाठ से शुद्ध सात्विक वातावरण बनता है ।
8 – एतिहासिक महत्व :– 1 जनवरी का कोई एतिहासिक महत्व नही है । जबकी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन नंबर 1- ब्रम्हाजी ने सृष्टि का निर्माण किया था । इसी दिन से नया संवत्सर आरंभ होता है । 2 – पुरुषोत्तम श्रीराम का राज्याभिषेक । 3 – माँ दुर्गा की उपासना एवं व्रत का आरंभ होता है । 4 – प्रारंभ युगाब्ध ( युधिष्ठिर संवत् ) का आरंभ । 5 – उज्जयिनि सम्राट विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् प्रारंभ । 6 – शालिवाहन शक संवत् ( भारत सरकार का राष्ट्रीय पंचांग ) महर्षि दयानंद द्वारा आर्य समाज की स्थापना । 7 – भगवान झुलेलाल का अवतरण दिवस । 8 – मत्स्यावतार दिवस । 9 – गणितज्ञ भास्कराचार्य ने सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन महिना और वर्ष की स्थापना की ।
आप इन तथ्यों को समझ गए होंगे कि सनातन ( हिंदू ) धर्म की भारतीय संस्कृति कितनी महान है । अतः आप गुलाम बनाने वाले अंग्रेजों का 1 जनवरी वाला नववर्ष न मानकर महान हिंदू धर्म वाला चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को ही अपना नूतन – नववर्ष मनाए ।। जय हो ।।

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