धार । यूक्रेन तथा रूस संकट के बिच सकुशल घर लौटा राजगढ़ का भानू पारासर, धमाको तथा खौफ के बिच बंकर में बिताए 5 से 6 दीन, परिजनों ने किया स्वागत

यूक्रेन तथा रूस संकट के बिच सकुशल घर लौटा राजगढ़ का भानू पारासर, धमाको तथा खौफ के बिच बंकर में बिताए 5 से 6 दीन, परिजनों ने किया स्वागत

धार ( डाँ.अशोक शास्त्री ) यूक्रेन तथा रूस संकट के बिच यूक्रेन में मेडीकल की पढ़ाई करने गया राजगढ़ के नेत्र चिकित्सा सहायक सतीश पारासर तथा ममता पारासर का पुत्र भानू पारासर सकुशल अपने घर राजगढ़ पहुंचा है। यूक्रेन से सकुशल घर पहुंचने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सरदारपुर पर छात्र भानू का पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया गया। छात्र भानु के माता-पिता तथा परिजन अपने बेटे को सकुशल पाकर बेहद खुश है। छात्र भानू पारासर ने बताया कि वे यूक्रेन के जेक्रोजिया प्रांत में जेक्रोजिया स्टेट मेडीलक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहा थे। यूक्रेन तथा रूस के बिच जंग की चर्चा के बिच उन्होंने 25 फरवरी की भारत आने की प्लेन की टिकट करवाई थी लेकिन इसी बिच 24 फरवरी से ही यूक्रेन और रूस के बिच जंग शुरू हो गई। छात्र भानू ने बताया कि वे लगभग 5 से 6 दिन बंकर में रहे। इस दौरान उन्होंने कई बार धमाकों की आवज भी सूनी यहां तक कि वे जिस बंकर में थे वो बंकर भी धमाको से कई बार हिल गया था। हालात को भांपते हुए जिस यूनीवर्सीटी में वे पढ़ाई कर रहे थे उस यूनिवर्सिटी द्वारा उन्हें तथा उनके साथ मौजूद भारतीय छात्रो को ट्रेन से उजोहोर पहुंचाया जहां से वे चोप रेलवे स्टेशन पहुंचे। चोप रेलवे स्टेशन से यूक्रेन की बॉर्डर पार कर छात्र भानू हंगरी देश के ज़होनी पहुंचे। जहां से उन्हें इंडीयन ऐंबेसी के वालंटियर द्वारा बुडापेस्ट पहुंचाया गया। जहां 2 से 3 दिन संस्था सेवा इंटरनेशनल द्वारा होटल में रूकवाया गया। बुडापेस्ट से छात्र भानू सहित 1 हजार से अधिक aभारतीय छात्रों को एयरफोर्स के विमान से दिल्ली लाया गया। दिल्ली में छात्र भानु तथा मध्यप्रदेश के एक अन्य छात्र को मध्यप्रदेश सरकार के अधिकारी मध्य भवन लेकर पहुंचे। जहां से प्रदेश सरकार द्वारा प्लेन की टिकट उपलब्ध करवाई गई। छात्र भानू प्लेन से इंदौर पहुंचे जहां से वे कल रात्रि अपने घर राजगढ़ पहुंचे है। छात्र भानू ने बताया कि हाल फिलहाल यूक्रेन के हालात काफी खराब है और वहां सभी और भगदड़ मची हुई है।
भानु के माता-पिता ने बताया कि जब से यूक्रेन तथा रूस के मध्य जंग शुरू हुई है तब से उनहें उन्हें दिन रात अपने बेटे की चिंता सता रही थी। सरकार के कई अधिकारियों के उनके पास फोन भी लगातार आते रहें, भारत सरकार के प्रयासों से उनका बेटा सकुशल उनके पास लौट आया है।

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