
शुक्रवार को शहर में कोराेना के 29 नए मरीज मिले। ये मरीज महज 210 लोगों की सैंपलिंग में सामने आए हैं। इससे पहले 1 मार्च को 42 और 2 मार्च को 24 मरीज मिले थे। यानी लगभग 71 दिन बाद इतनी बड़ी संख्या में कोविड पॉजिटिव सामने आए हैं।
स्वास्थ्य विभाग अफसरों के मुताबिक, ज्यादातर मरीज वे हैं, जो किसी बीमारी के उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे और वहां जांच में पॉजिटिव आ गए। कुछ मरीज अस्पतालों की ओपीडी में रेंडम जांच के दौरान सामने आए हैं। इन सभी के स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है।
हालांकि सबकी हालत ठीक है और वे ए सिम्प्टोमैटिक हैं। इनमें से किसी के अस्पताल में भर्ती होने की सूचना नहीं है, लेकिन लगातार मरीजों के मिलने से एक्टिव मरीजों की संख्या एक बार फिर 100 हो गई है।

मरीजों में ये बढ़ोतरी पिछले चार-पांच दिनों से हुई है। उसके पहले अप्रैल और मई में तो कई दिन ऐसे भी रहे, जब एक भी मरीज सामने नहीं आया। गुरुवार को तो एक बुजुर्ग महिला की बीमारी से मौत भी हुई। महाराष्ट्र, दिल्ली सहित कई राज्यों में मरीजों के बढ़ने के मद्देनजर स्वास्थ्य अमला सतर्क है।
चिंता की बात:-पिछले कुछ समय से कोरोना के संक्रमित मरीजों की संख्या में कमी आने का बाद लोगों ने स्वतः ही मास्क त्याग दिए थे। शासन और प्रशासन ने भी इस ओर ज्यादा सख्ती नहीं बरती। शहर में बाजारों से लोगों के चेहरों पर से मास्क गायब हो गए हैं। सड़कों पर इक्का दुक्का लोग ही मास्क पहने नजर आते हैं। भीड़ भरे बाजारों में लोग बिना मास्क के नजर आते हैं। वहीं माल, सिनेमा हाल में भी लोग मास्क लगाने के प्रति सजग नहीं हैं। साथ ही लोगों ने सैनिटाइजर का उपयोग भी बंद कर दिया है। कोरोना टीकाकरण होने से भी लोगों की मास्क के प्रति लापरवाही बढ़ती चली गई। लेकिन अब कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच सभी को सतर्क होने की जरूरत है। साथ ही कोरोना की पहली, दूसरी और तीसरी लहर के दौरान सरकार द्वारा जारी की गई कोरोना गाइडलाइन का एक बार फिर से पालन करना जरूरी हो गया है, जिससे कि एक बार फिर से कोरोना के बढ़ते प्रभाव को रोका जा सके। स्वास्थ्य विभाग ने भी एक बार फिर से सतर्कता बरतते हुए सैंपलिंग बढ़ाने का काम किया है।