
आज से श्रावण मास का आरंभ दो शुभ योग के साथ होने से शिव आराधना का महत्व दुगना हो जाता है ( डाॅ. अशोक शास्त्री )
आज दिनांक 14 जुलाई से श्रावण मास आरंभ होकर दिनांक 12 अगस्त तक रहेगा । इस बार श्रावण मास 29 दिन रहेगा । श्रावण मास मे शिव जी के पूजन का विशेष महत्व है । इस संदर्भ मे मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाॅ. अशोक शास्त्री ने एक विशेष साक्षात्कार मे विस्तृत जानकारी देते हुए बताया की इस वर्ष श्रावण मास का आरंभ दो शुभ योग के साथ होने से भगवान शिव – पार्वती के पूजन का महत्व दो गुणा बढ जाता है । गुरु पूर्णिमा के अगले दिन से श्रावण मास का आरंभ होता है । इस दिन विष्कुंभ योग , प्रीति योग बन रहे है । ये दोनो शुभ योग मे शिव भक्ति के लिए बहुत लाभदायक होते है । श्रावण मे इन योग मे महादेव का रुद्राभिषेक करने से सभी दुखों का नाश हो जाता है और सभी बिगडे काम बनते है । डाॅ. शास्त्री ने बताया कि श्रावण मास 04 सोमवार पड रहे है । प्रथम सोमवार दिनांक 18 जुलाई , द्वितीय सोमवार दिनांक 25 जुलाई , तृतीय सोमवार दिनांक 01 अगस्त , चतुर्थ सोमवार दिनांक 08 अगस्त को पड रहा है ।
डाॅ. अशोक शास्त्री ने बताया कि श्रावण मास मे समुद्र मंथन हुआ था । सृष्टि की हेतु मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने पिया था जिसके कारण भगवान शिव का कंठ नीला पड गया था । इस कारण उनका एक नाम नीलकंठ हुआ । समस्त देवी – देवताओं ने विष के प्रभाव को कम करने के लिए भगवान शिव पर शीतल जल अर्पित किया तभी शिव को जल बहुत प्रिय है । श्रावण मास मे भोलेनाथ का जलाभिषेक करने से वे प्रसन्न होते है ।
डाॅ. अशोक शास्त्री ने बताया की भगवान शिव की अर्धांगिनी देवी सती ने शिव जी को हर जन्म मे पति के रुप मे पाने के लिए तपस्या की थी । माता सती का दूसरा जन्म पार्वती के रुप मे हुआ था । माॅ पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए श्रावण मास मे कठोर तपस्या की थी । कहते हैं कि शिव – पार्वती का विवाह इसी माह मे होने से भोलेनाथ को श्रावण मास बहुत प्रिय है । माना जाता है कि इस मास मे शिवजी अपने ससुराल आए थे , उनका अभिषेक कर स्वागत किया था ।