राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और सुष्मिता सेन के ‘Better Half ललित मोदी की नजदीकी के किस्सों की भी कमी नहीं!

लंदन में छुपे भगोड़े बिजनेसमैन ललित मोदी विवादों के बादशाह रहे हैं। अपनी पर्सनल लाइफ से लेकर बिजनेस, क्रिकेट और पॉलिटिक्स- ललित मोदी हर जगह विवादों में रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की ललित मोदी से निकटता तो उनकी मुख्यमंत्री पद से विदाई का एक बड़ा कारण बन गया था।

2003 में वसुंधरा राजे पहली बार राजस्थान की मुख्यमंत्री बनी थीं। लेकिन, ललित मोदी से उनकी दोस्ती की शुरुआत करीब डेढ़ दशक पहले पुरानी थी। दोनों की पहली मुलाकात 1990 के दशक के शुरुआती दिनों में हुई, जब ललित मोदी ग्वालियर में अपनी एक फैक्ट्री के लिए क्लीयरेंस की कोशिशों में लगे थे। इसके बाद से दोनों की दोस्ती लगातार प्रगाढ़ होती रही। वसुंधरा जब पहली बार CM बनी तो मोदी ने उनके साथ अपनी नजदीकियों का भरपूर फायदा उठाया। इतना कि ललित मोदी राजस्थान के सुपर सीएम के रूप में मशहूर हो गए।

रामबाग पैलेस में मिलने के लिए लाइन लगी रहती थी:-जानकारों का कहना है कि राजस्थान में ललित मोदी के रहने का ठिकाना जयपुर का होटल रामबाग पैलेस का एक सुइट हुआ करता था। इस पैलेस के सुइट में मोदी से मिलने के लिए लोगों की लाइन लगी रहती थी। इसी होटल से सरकारी अफसरों और नेताओं तथा बिल्डरों को धमकाते थे। लोगों का कहना है कि मोदी के सामने खड़ा अधिकारी, मंत्री या कोई और उनके तेवर देखकर पसीना-पसीना हो जाता। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि ललित मोदी होटल से सरकार चलाते थे।

गड़बड़ियों के कई किस्से
ललित और मीनल मोदी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर आमेर में दो हवेलियां अपने नाम करवा ली थीं। यह पुरातत्व विभाग के नियमों के खिलाफ था। क्योंकि, दोनों हवेलियां आमेर के किले के नजदीक स्थित थीं। इससे भी बड़ा घपला 90वी स्कैंडल के जरिए सामने आया था। जमीन अधिग्रहण कानून की धारा 90 बी के तहत किसानों को कृषि भूमि को गैर-कृषि भूमि के रूप में परिवर्तित करने की अनुमति दी गई। इस बदलाव का फायदा उठाकर बिल्डर ने किसानों की जमीन अपने नाम करवा ली और ललित मोदी ने भी इसका फायदा उठाया।

घपलों का चेहरा
वसुंधरा के पहले कार्यकाल के अंतिम दिनों में वसुंधरा राजे सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया था। ललित मोदी इसका प्रतीक बन गए। इस समय तक वे क्रिकेट प्रशासन में भी सक्रिय होने लगे थे। इसमें भी उन्हें वसुंधरा राजे से नजदीकियों का फायदा मिला। 2008 के विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस ने भ्रष्टाचार के मुद्दे को जमकर भुनाया और बीजेपी की चुनाव में हार के बाद वसुंधरा की मुख्यमंत्री पद से विदाई हो गई।

2011 में लिखी चिट्ठी नासूर बनी
आईपीएल कमिश्नर पद से विदाई के बाद ललित मोदी को साल 2013 में बीसीसीआई से आजीवन प्रतिबंधित कर दिया गया। उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग सहित कई आरोप थे, लेकिन बीसीसीआई की डिसिप्लिनरी कमेटी की रिपोर्ट आने से पहले ही ललित मोदी भारत छोड़कर जा चुके थे। ताज्जुब यह कि इस कमेटी में वसुंधरा राजे के भतीजे ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल थे। इसके कुछ दिनों बाद एक न्यूज चैनल ने वसुंधरा राजे की 2011 में लिखी एक चिट्ठी का खुलासा किया जो उनके पॉलिटिकल करियर का सबसे बड़ा दाग बन गया।

ललित मोदी के बचाव की कोशिश
वसुंधरा ने इस चिट्ठी में ललित मोदी को यूनाइटेड किंगडम में रहने की इजाजत देने की पैरवी की थी, जिससे वे भारत में गिरफ्तारी से बच सकें। UK के आप्रवासन अधिकारियों को लिखी चिट्ठी में उन्होंने यह भी लिखा था कि इस बारे में भारतीय अधिकारियों को कुछ नहीं बताया जाए। अपनी हस्ताक्षरित चिट्ठी में उन्होंने भारत के राजनीतिक हालात की भी चर्चा की थी। उन्होंने लिखा था कि कांग्रेस पार्टी उन्हें और ललित मोदी को बदनाम करने के लिए लगातार अभियान चला रही है। चिट्ठी का खुलासा तब हुआ जब केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार सत्ता में आ चुकी थी। चिट्ठी विवाद के सामने आने से विपक्षी पार्टियां बीजेपी को देशभक्ति के मुद्दे पर घेरने लगीं। बीजेपी चाहकर भी इस विवाद से खुद को अलग नहीं कर सकी। यह मुद्दा लंबे समय तक सुर्खियों में रहा।

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